केंद्र और बिहार सरकार में एक शर्त पर तकरार, पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे समेत 26 प्रोजेक्ट का काम अटका
केंद्र और बिहार सरकार के विभागों में मतभेद के चलते राज्य में 26 नेशनल हाईवे प्रोजेक्ट का काम अधर में आ गया है। पटना-पूर्णिया एक्सप्रेस वे समेत अन्य प्रमुख एनएच परियोनजाएं के बंद होने का खतरा मंडरा रहा है।

बिहार में 26 राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) परियोजनाओं पर ग्रहण लग गया है। वन विभाग की एक शर्त की वजह से इन परियोजनाओं का काम अटक गया है। केंद्र और बिहार सरकार आमने-सामने हो गई है। केंद्रीय सड़क एवं परिवहन राजमार्ग मंत्रालय ने बिहार को चेतावनी दी है कि अगर 31 मई तक इन सभी परियोजनाओं के लिए वन भूमि का उपयोग करने की मंजूरी नहीं दी गई तो सभी प्रोजेक्ट रद्द कर दिए जाएंगे। इन परियोजनाओं के लिए 711.92 हेक्टेयर जमीन की आवश्यकता है। इनमें अधिकतर की मंजूरी 2023 के बाद मिली है। खास बात यह है कि इनमें पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे जैसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट भी शामिल हैं।
अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, बीते 19 मार्च को केंद्रीय सड़क एवं परिवहन राजमार्ग मंत्रालय के सचिव वी उमाशंकर ने बिहार में चल रही राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) परियोजनाओं की समीक्षा की। इस दौरान यह उभर कर आया कि बिहार में वन विभाग सड़क परियोजनाओं के लिए वन भूमि के उपयोग की मंजूरी नहीं दे रहा है, जबकि केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने वन भूमि के उपयोग को लेकर स्पष्ट निर्देश दे रखा है।
केंद्रीय परियोजनाओं के लिए केंद्र सरकार की ओर से निर्धारित शर्तों का अनिवार्य रूप से राज्यों को पालन करना होता है। मगर बिहार में वन विभाग के कुछेक अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की गलत तरीके से व्याख्या कर आदेश जारी करा लिया कि वन भूमि पर सड़क बनाने के एवज में गैर वन भूमि देनी होगी।
बिहार छोड़ देश के अन्य राज्यों में केंद्र सरकार के आदेश का अक्षरश: पालन हो रहा है। बिहार के वन विभाग की इस कार्यशैली से नाराज होकर केंद्रीय सड़क परिवहन राजमार्ग मंत्रालय ने कहा कि वन भूमि पर सड़क बनाने के बावजूद वह जमीन वन भूमि ही रहती है। अगर सड़क बनाने के दौरान कुछ पेड़ों की कटनी-छंटनी होती है तो वन भूमि के उस इलाके में जहां पेड़-पौधे सूख गए हैं, वहां पौधारोपण किया जाना है। उसके लिए एजेंसी की ओर से पैसा दिया जाता है।
बिहार के रवैये से केंद्र नाराज
बिहार में वन विभाग के नोडल अधिकारी से मिली सूचना से नाराज केंद्रीय मंत्रालय ने दो-टूक कहा कि अगर 31 मई तक सभी परियोजनाओं के लिए वन विभाग ने मंजूरी नहीं दी तो स्वीकृत सभी परियोजनाओं को रद्द, खारिज या नामंजूर कर दिया जाएगा।
केंद्र की नाराजगी के बाद बिहार के वन विभाग ने 25 मार्च को नया आदेश जारी किया है। विभाग ने कहा है कि वन भूमि पर सड़क बनाने की मंजूरी दी जाएगी, लेकिन अगर भविष्य में सुप्रीम कोर्ट ने कोई ऐसा आदेश जारी किया तो निर्माण एजेंसियों को अनिवार्य रूप से गैर वन भूमि देनी होगी।
सूत्रों के अनुसार, वन विभाग की इस नई शर्त पर भी केंद्र सरकार ने नाराजगी जताई है। मंत्रालय का साफ कहना है कि कोई राज्य केंद्र सरकार को दिशा-निर्देश नहीं दे सकता या कोई शर्त नहीं थोप सकता है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मद्देनजर ही केंद्रीय वन मंत्रालय ने सभी राज्यों को आदेश जारी किया था और उसका अनिवार्य रूप से पालन किया जाना चाहिए।
इन हाईवे-एक्सप्रेसवे परियोजनाओं का काम अटका-
- बरबीघा-शेखपुरा-जमुई-झाझा-बांका-पंजवारा-बिहार-झारखंड सीमा (141.74 हेक्टेयर)
- वाराणसी-कोलकाता वाया रांची (103.211 हेक्टेयर)
- भागलपुर-खैरा गांव ढाका मोड़ (71.76 हेक्टेयर)
- दरभंगा से बनवारी पट्टी (21.01 हेक्टेयर)
- खरहरा से भलझोर (62.34 हेक्टेयर)
- गंगटा मोड़ से कोभारवा चौड़ीकरण (25.73 हेक्टेयर)
- मोहनियां-चौसा (17.91 हेक्टेयर)
- मेहरौना घाट से सीवान (24.13 हेक्टेयर)
- आरा-सासाराम-पटना (22.71 हेक्टेयर)
- पटना-पूर्णिया एक्सप्रेस-वे (53.09 हेक्टेयर)
- परसरमा-अररिया(78.35 हेक्टेयर)
(रिपोर्ट- हिन्दुस्तान ब्यूरो)




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