bjp bihar new cm samrat choudhary feet in Luvkush equation and alliance with jdu लवकुश समीकरण को तवज्जो, गठबंधन का भी रखा ख्याल, सम्राट चौधरी के बहाने एक तीर से कई निशाने, Bihar Hindi News - Hindustan
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लवकुश समीकरण को तवज्जो, गठबंधन का भी रखा ख्याल, सम्राट चौधरी के बहाने एक तीर से कई निशाने

भाजपा में आने से पहले सम्राट चौधरी राजद और जदयू में भी रहे हैं। यानी उन्होंने समाजवादी विचारधारा से ही राजनीति की शुरुआत की। मिलनसार व्यक्तित्व होने के कारण सम्राट चौधरी का पुराने सभी नेताओं और विधायकों से बेहतर तालमेल रहा है।

Wed, 15 April 2026 06:58 AMNishant Nandan हिन्दुस्तान ब्यूरो, पटना
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लवकुश समीकरण को तवज्जो, गठबंधन का भी रखा ख्याल, सम्राट चौधरी के बहाने एक तीर से कई निशाने

सम्राट चौधरी को बिहार की कमान सौंपकर भाजपा ने एक तीर से कई निशाना साधा है। सम्राट को सीएम बनाकर एक ओर जहां एनडीए की लव-कुश समीकरण को तवज्जो देने का संदेश दिया है तो यह भी बता दिया है कि अगर वह अपने दम पर सरकार चला सकती है तो गठबंधन का भी ख्याल रखती है।बिहार में लव-कुश समीकरण एनडीए का मजबूत वोटबैंक है। ये वोटर नीतीश कुमार के साथ ही रहे हैं। अब जब नीतीश कुमार मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ राज्यसभा जा रहे हैं तो इनमें कोई गलत संदेश नहीं जाए, इसको लेकर भाजपा ने सम्राट चौधरी को राज्य की कमान सौंपी है।

इसके पीछे एनडीए ने यह बताने की कोशिश की है कि सत्ता के केंद्र में पार्टी (जदयू से भाजपा) बदल रही है, लेकिन सत्ता इन्हीं (लव-कुश) के पास हस्तांतरण हो रहा है। बिहार में हुए जातिगत जनगणना के अनुसार लव-कुश समीकरण बिहार की कुल अबादी में तीसरी बड़ी जाति है। कुर्मी-कोयरी की आबादी लगभग 7.07 फीसदी है। कोयरी की संख्या 4.2 प्रतिशत तो कुर्मी की अबादी 2.87 फीसदी है। लव-कुश समीकरण की अन्य जातियां जैसे दांगी, धानुक, अमात, गंगोता आदि भी एनडीए को ही वोट करती रही है।

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सुशील मोदी के बाद भाजपा ने तारकिशोर प्रसाद और रेणु देवी को उपमुख्यमंत्री की कमान सौंपी, लेकिन पार्टी का यह प्रयोग अपेक्षाकृत असफल रहा। दोनों नेताओं का प्रभाव उतना दमदार नहीं रहा। इस कारण एक बार फिर पार्टी में शून्यता की स्थिति उत्पन्न हो गई। तब सम्राट चौधरी पर भाजपा ने दांव खेला। उन्हें न केवल विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी सौंपी, बल्कि बिहार भाजपा की कमान भी सौंपी।

समाजवादी विचारधारा से ही राजनीति की शुरुआत की

भाजपा में आने से पहले सम्राट चौधरी राजद और जदयू में भी रहे हैं। यानी उन्होंने समाजवादी विचारधारा से ही राजनीति की शुरुआत की। मिलनसार व्यक्तित्व होने के कारण सम्राट चौधरी का पुराने सभी नेताओं और विधायकों से बेहतर तालमेल रहा है। खासकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जब मन बना लिया कि वे अब राज्यसभा जाएंगे तो कई ऐसे अवसर आए जब उन्होंने सम्राट चौधरी को ही आगे खड़ा किया।

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शकुनी और नीतीश का रहा है गहरा संबंध

सम्राट चौधरी के पिता पूर्व मंत्री शकुनी चौधरी का नीतीश कुमार से पुराना नाता रहा है। लालू के विरोध में जब राजनीति शुरू हुई तो शकुनी ने नीतीश कुमार का साथ दिया। शकुनी चौधरी समता पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक थे। 1994 में नीतीश कुमार ने जब लालू से अलग होकर समता पार्टी बनाई तो शकुनी उन चंद बड़े नेताओं में थे, जिन्होंने नीतीश का साथ दिया था। उनके समर्थन के बिना नीतीश के लिए बिहार में पैठ बनाना मुश्किल था। शकुनी ने नीतीश को पहली बार सीएम बनाने में अहम रोल निभाया था। अब नीतीश ने ही सम्राट का नाम भाजपा समक्ष रखा था।

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