बिहार में महाघोटाला, सॉफ्टवेयर हैक कर बेच डाला 350 करोड़ का बालू; रडार पर आए सूबे के रसूखदार
Bihar Sand Scam: बिहार के खनन सॉफ्ट पोर्टल में छेड़छाड़ कर एनआईसी कर्मियों और 100 से अधिक कारोबारियों ने मिलकर 350 करोड़ रुपये का बालू घोटाला किया है। ईओयू 62 मामलों की जांच कर रही है।

Bihar Sand Scam: बिहार के खनन एवं भूतत्व विभाग के डिजिटल सिस्टम में एक बहुत बड़ी सेंधमारी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। राज्य के सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचाते हुए जालसाजों ने विभाग के 'खनन सॉफ्ट' पोर्टल से छेड़छाड़ की और अवैध तरीके से करीब 350 करोड़ रुपये का बालू बेच डाला। सरकारी राजस्व को चूना लगाने के इस हाई-प्रोफाइल मामले में एनआईसी के कई कर्मचारियों के साथ-साथ राज्य के 17 जिलों के 100 से ज्यादा वैध लाइसेंसधारी अब बिहार पुलिस के सीधे निशाने पर आ गए हैं। इस महाघोटाले को लेकर पटना के साइबर थाने में पहली एफआईआर अक्टूबर 2025 में दर्ज कराई गई थी, जिसके बाद मामले की कड़ियां खुलती चली गईं।
ओटीपी वेरिफिकेशन सिस्टम को किया बाईपास
मिली जानकारी के मुताबिक, इस पूरे खेल को अंजाम देने के लिए जालसाजों ने सुरक्षा नियमों को पूरी तरह हवा में उड़ा दिया। दर्ज एफआईआर के अनुसार, बालू कारोबारियों ने जिला खनन कार्यालय की मंजूरी के बिना ही खुद से फर्जी कागजात पोर्टल पर अपलोड कर दिए और बालू उठाने की तय मात्रा को अवैध रूप से सॉफ्टवेयर में बढ़वा लिया। आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) की सघन जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि विभाग में तैनात एनआईसी कर्मियों की मिलीभगत से मोबाइल पर आने वाले ओटीपी ऑथेंटिकेशन के सुरक्षा नियम को पूरी तरह बाईपास यानी बंद कर दिया गया था। इसके बाद डेटाबेस सर्वर और मुख्य सॉफ्टवेयर से छेड़छाड़ कर 17 जिलों के धंधेबाजों ने सरकार को 350 करोड़ से अधिक का चूना लगा दिया।
तत्कालीन निरीक्षक ने दर्ज कराई थी पहली एफआईआर
इस पूरे डिजिटल सिंडिकेट का भंडाफोड़ होने के बाद विभाग के निर्देश पर पटना के तत्कालीन खनन निरीक्षक मृत्युंजय कुमार झा ने पहली शिकायत दर्ज कराई थी। दरअसल, बालू पट्टा क्षेत्र से अलग बालू के भंडारण और उसकी बिक्री के लिए ही लाइसेंसधारियों को लॉगिन आईडी और पासवर्ड दिए जाते हैं, ताकि वे ई-चालान काटकर रिकॉर्ड रख सकें। लेकिन कारोबारियों ने एनआईसी कर्मियों से साठगांठ कर तय लिमिट से कई गुना अधिक बालू बेच डाला। फिलहाल, इस जालसाजी से संबंधित 17 अलग-अलग जिलों में कुल 62 केस दर्ज किए गए हैं, जिनकी पूरी जांच ईओयू (EOU) की स्पेशल टीम कर रही है। आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और आईटी एक्ट की गंभीर धाराओं के तहत कार्रवाई तेज कर दी गई है।




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