बिहार पंचायत चुनाव में कैमरे से होगी फर्जी वोटर की पहचान, मंत्री दीपक प्रकाश ने बताया प्लान
पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने कहा कि इस साल होने वाले बिहार पंचायत चुनाव में कैमरे और नई तकनीक से फर्जी एवं बोगस वोटर की पहचान की जाएगी। साथ ही मतगणना में धांधली को भी रोका जाएगा।
बिहार में इस साल होने वाले पंचायत चुनाव को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। इस बार का पंचायत चुनाव कई मायनों में खास होने वाला है। फर्जी मतदान पर अंकुश लगाने के लिए तकनीक का उपयोग किया जाएगा। फेशियल रिकग्निशन से बोगस वोटर की पहचान की जाएगी। अगर कोई व्यक्ति दोबारा फर्जी मतदान करने आता है, तो कैमरे से उसकी पहचान की जाएगी। बिहार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने इस बारे में जानकारी दी।
मंत्री ने औरंगाबाद में मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि पंचायत चुनाव 2026 में बोगस वोटिंग पर रोक लगाने के लिए अहम कदम उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष और सरल बनाने के लिए नई तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। ताकि लोगों का चुनाव प्रक्रिया में विश्वास बढ़ सके।
उन्होंने कहा कि इस साल होने वाले पंचायत चुनाव में कुछ बदलाव देखने को मिलेंगे। इस साल आरक्षण का नया रोस्टर लागू होगा। इस बार पंचायत चुनाव ईवीएम से कराए जाएंगे। 6 पदों के लिए एक साथ वोटिंग होगी। इसके लिए 6 अलग-अलग बैलेट मशीन लगाई जाएंगी। मतदान केंद्रों पर अलग-अलग रंगों की बैलेट यूनिट में मतदाता सभी पदों पर वोट डाल सकेंगे।
मंत्री दीपक प्रकाश ने बताया कि मतगणना के दौरान संभावित धांधली को रोकने के लिए भी विशेष ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। ईवीएम में मैनुअल तरीके से वोटों की गिनती की जाएगी। वहां भी कैमरों के जरिए निगरानी की जाएगी। मतगणना के दौरान धांधली की हजारों शिकायत अक्सर आती थीं, जिससे छुटकारा मिलेगा।
दिसंबर तक हो जाएंगे पंचायत चुनाव
मंत्री ने कहा कि पिछले पंचायत चुनाव दिसंबर 2021 में हुए थे। जनवरी 2022 में पंचायती राज संस्थाओं के विजयी जन प्रतिनिधियों का शपथ ग्रहण हुआ था। हर 5 साल में चुनाव कराए जाते हैं। उसी अवधि को देखते हुए, 2026 के अंत तक पंचायत चुनाव करा दिए जाएंगे।




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