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बिहार पंचायत चुनाव 2026 में बदल जाएंगी आरक्षित सीटें, जानिए क्या कहता है नियम

Bihar Panchayat Election 2026: बिहार में अगले साल पंचायत चुनाव का बिगुल बजने वाला है। इस चुनाव में पंचायत चुनाव में मिलने वाले आरक्षित सीटों को बदला जाएगा। पंचायती राज कानून के तहत हर दो चुनावों के चक्र में यह फेरबदल करना होता है।

Fri, 28 Nov 2025 07:59 AMJayesh Jetawat हिन्दुस्तान ब्यूरो, पटना
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बिहार पंचायत चुनाव 2026 में बदल जाएंगी आरक्षित सीटें, जानिए क्या कहता है नियम

Bihar Panchayat Election 2026: बिहार में विधानसभा चुनाव खत्म होने के बाद अगले साल त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की होने वाले हैं। आगामी पंचायत चुनाव में राज्य की सभी आरक्षित सीटों में बदलाव होगा। नियमानुसार पिछले दो चुनावों में जिन सीटों पर जिस कोटि के उम्मीदवारों को आरक्षण का लाभ दिया गया है, अब तीसरे चुनाव में वहां पर आरक्षण का चक्र बदल जाएगा। त्रिस्तरीय पंचायत आम चुनाव में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अत्यंत पिछड़ा वर्ग और महिलाओं को अधिकतम 50 प्रतिशत आरक्षण का लाभ दिया जा रहा है। राज्य में होनेवाले पंचायत चुनाव में यह तीसरी बार आरक्षण चक्र में बदलाव होगा।

पंचायती राज अधिनियम के प्रावधान के अनुसार, लगातार दो आम चुनावों के बाद आरक्षण का चक्र बदल जाएगा। साल 2006 में पहली बार सभी पदों का आरक्षण तय किया गया था, जिसका चक्र 2011 के आम चुनाव तक लागू रहा। फिर, 2016 में नए आरक्षण चक्र के अनुसार चुनाव हुआ और 2021 के पंचायत चुनाव में भी लागू रहा।

एक पद पर लगातार दो बार जिस कोटि के उम्मीदवारों के लिए आरक्षण तय किया गया था, वह अब 2026 के चुनाव में बदल जाएगा। जहां पर जिस कोटि के प्रत्याशियों के लिए 2021 में पद आरक्षित थे, उसे समाप्त कर जनगणना के आधार पर नए सिरे से आरक्षण का लाभ दिया जाएगा।

पंचायत चुनाव में कैसे तय होता है आरक्षण?

त्रिस्तरीय पंचायतों में पदों का आरक्षण अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) को उसकी जनसंख्या के अनुपात में दिया जाता है। अगर किसी निर्वाचन क्षेत्र में अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति की आबादी 25 प्रतिशत है तो वहां उस कोटि के पदों का आरक्षण भी 25 प्रतिशत होगा। शेष पदों में अत्यंत पिछड़ा वर्ग (ईबीसी) के प्रत्याशियों को 20 प्रतिशत के निकट होगी। पदों का आरक्षण जिला दंडाधिकारी द्वारा नियमानुसार तैयार किया जाएगा।

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आरक्षण के दिशा-निर्देश के अनुसार पंचायत सदस्यों का आरक्षण ग्राम पंचायत के कुल पदों के आधार पर तैयार किया जाएगा। जबकि, मुखिया के पदों का आरक्षण एक पंचायत समिति के अंदर आने वाले ग्राम पंचायतों के आधार पर तैयार होगा। वहीं, पंचायत समिति के सदस्यों का आरक्षण उस पंचायत समिति के कुल सदस्यों के आधार पर तैयार होगा।

इसी तरह, प्रखंड प्रमुख का आरक्षण प्रत्येक जिला के कुल पदों का 50 प्रतिशत होगा। जबकि जिला परिषद सदस्यों का आरक्षण हर जिले के कुल सदस्यों की संख्या का 50 प्रतिशत होगा। जिला परिषद अध्यक्ष के पदों का आरक्षण राज्य में जिला अध्यक्षों के कुल पदों का 50 प्रतिशत होगा।

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