NEET छात्रा मौत केस में मानवाधिकार आयोग ने लिया संज्ञान, पटना SSP से जवाब तलब; 8 सप्ताह की मोहलत
बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग द्वारा मामले में एसएसपी पटना को नोटिस जारी किया गया है और आठ सप्ताह के भीतर रिपोर्ट की माँग की गई है।

पटना में जहानाबाद की NEET छात्रा की मौत के मामले में बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान ले लिया है। मुजफ्फरपुर के मानवाधिकार मामलों के जानकार मानवाधिकार अधिवक्ता एस.के.झा के द्वारा बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग में दर्ज इस याचिका पर सुनवाई करते हुए आयोग ने मामले को अति गंभीर माना है। आयोग द्वारा मामले में एसएसपी पटना को नोटिस जारी किया गया है और आठ सप्ताह के भीतर रिपोर्ट की माँग की गई है। इस मामले में सीबीआई छानबीन कर रही है। पटना के शंभू हॉस्टल से लेकर जहानाबाद तक सीबीआई पहुंच चुकी है। छात्रा का सामान जांच एजेंसी ने अपने कब्जे में लिया है।
मानवाधिकार अधिवक्ता एसके झा ने बताया कि बिहार मानवाधिकार आयोग में मामले की अगली सुनवाई 22 अप्रैल को होना तय किया गया है। फिलहाल आठ सप्ताह का समय देते हुए आयोग ने पटना एसएसपी से अब तक की गई कार्रवाई का ब्योरा तलब किया है। अधिवक्ता ने बताया कि आयोग से अवकाश प्राप्त जज की निगरानी में जांच की मांग की गई थी। ताकि निष्पक्षता से कार्रवाई हो सके।
जहानाबाद की छात्रा 6 जनवरी को पटना शंभू हॉस्टल में बेहोश पाई गई थी। उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान 11 जनवरी को उसकी मौत हो गई। उसके बाद 12 जनवरी को मामला सुलग गया। निष्पक्ष जांच की मांग कर प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर पुलिस ने लाठी चार्ज कर दिया। इस मामले में पटना पुलिस की बड़ी लापरवाही सामने आई। पुलिस ने इसे आत्महत्या बताया और सेक्सुअल असॉल्ट की संभावना को खारिज कर दिया। लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद बवाल मच गया क्योंकि उसमें यौन उत्पीड़न की संभावना से इनकार नहीं किया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद जांच की दिशा बदल गई और लापरवाही बरतने वाले दो पुलिस पदाधिकारियों पर सस्पेंशन की कार्रवाई हो गई।
इस केस में बयान देने वाले दो बड़े लोगों को जेल जाना पड़ा। पूर्णिया के निर्दलीय सांसद पप्पू यादव को सात दिनों तक जेल में रहना पड़ा। उनकी गिरफ्तारी 31 साल पुराने मामले में कोर्ट से जारी गिरफ्तारी वारंट के आधार पर की गयी। गिरफ्तार होने वाले दूसरे शख्स पूर्व आईपीएस अमिताभ दास हैं। उन पर कांड की जांच को प्रभावित करने की नीयत से सोशल मीडिया के जरिए भ्रम फैलान का आरोप लगा।
छात्रा के परिजनों ने पटना पुलिस और एसआईटी पर परेशान करने का आरोप लगाया। कहा गया कि पुलिस किसी खास मकसद से उन पर प्रेशर बनाया। न्यायाधीश के मार्गदर्शन मं जांच की मांग की गई। 31 जनवरी को सरकार ने सीबीआई जांच की सिफारिश कर दिया। 12 फरवरी को सीबीआई ने केस टेकअवर कर लिया।




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