साहेबगंज विधानसभा सीट: राजू कुमार सिंह की होगी कड़ी परीक्षा, बदल गए हैं सियासी समीकरण
2005 में लोजपा से राजनीति में कदम रखने वाले राजू कुमार सिंह जदयू, वीआईपी का सफर तय करते हुए अब भाजपा में हैं। वह 2005 के विधानसभा चुनाव में लोजपा से, फिर अक्टूबर, 2005 में जदयू से जीते। 2015 में जदयू छोड़ भाजपा में शामिल हुए। 2020 में वीआईपी के टिकट पर जीते थे।

Bihar Elections: बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के साहेबगंज का इतिहास जितना समृद्ध रहा है, उतनी ही इस विधानसभा क्षेत्र की सियासी जमीन भी उर्वर रही है। ऐतिहासिक केसरिया बौद्ध स्तूप साहेबगंज के नजदीक है। महात्मा गांधी भी इसी रास्ते से होकर चंपारण गए थे। साहेबगंज सीट से जीतकर विधानसभा पहुंचने वाले नवल किशोर सिंह से लेकर मौजूदा विधायक राजू कुमार सिंह तक राज्य सरकार में मंत्री बने। पिछले चुनाव में मुकेश सहनी की नेतृत्व वाली पार्टी वीआईपी से चुनाव जीतने वाले राजू कुमार सिंह फिलहाल भाजपा कोटे से राज्य सरकार में पर्यटन मंत्री हैं।
1952 से अस्तित्व में आई साहेबगंज विधानभा सीट पर 1985 तक (1969 और 1977 को छोड़कर) कांग्रेस का कब्जा रहा। 1990 में ‘मंडल’ की आंधी में राजनीति बदलाव आया और जनता दल के टिकट पर राम विचार राय विजयी हुए। वे लगातार तीन बार यहां से जीते। इस सीट पर 1990 के बाद की राजनीति राम विचार राय और राजू कुमार सिंह के इर्द-गिर्द ही घूमती रही।
पांच साल में यहां की सियासत में कई बदलाव आए। 2025 के विधानसभा चुनाव में बदले समीकरण की सियासी साख की परीक्षा होनी है। रामविचार राय अब इस दुनिया में नहीं हैं। 2005 में लोजपा से राजनीति में कदम रखने वाले राजू कुमार सिंह जदयू, वीआईपी का सफर तय करते हुए अब भाजपा में हैं। वह 2005 के विधानसभा चुनाव में लोजपा से, फिर अक्टूबर, 2005 में जदयू से जीते। 2015 में जदयू छोड़ भाजपा में शामिल हुए। 2020 में वीआईपी के टिकट पर जीते थे। उनकी भाजपा से उम्मीदवारी संभावित मानी जा रही है।
उधर, राम विचार राय के दिवंगत होने के बाद सियासत की धारा क्या होगी, यह भी तय होना बाकी है। महागठबंधन की ओर से टिकट के कई दावेदार हैं। एनडीए के खाते में हाजीपुर-सुगौली रेल लाइन का साहेबगंज और केसरिया तक विस्तार बड़ी उपलब्धि है। लेकिन, तीन बड़े चौरों का विकास, सीएचसी में महिला चिकित्सक की तैनाती और डिग्री कॉलेज नहीं खुल पाना क्षेत्र का बड़ा चुनावी मुद्दा है।
बुद्ध से बापू तक जुड़ी हैं स्मृतियां
पूर्वी चंपारण जिले का केसरिया ऐतिहासिक बौद्ध स्तूप साहेबगंज शहर से महज 10 किलोमीटर दूर है। ऐसा माना जाता है कि भगवान बुद्ध वैशाली से उत्तर प्रदेश जाते समय यहीं से गुजरे थे, लेकिन गंडक में बाढ़ होने से कुछ समय के लिए केसरिया में ठहरे थे। यहां से उन्होंने बौद्ध धर्म का प्रचार शुरू किया था। महात्मा गांधी भी इसी रास्ते से चम्पारण गए थे। बदुरवा मठ में 150 साल पुराने पीपल के उस पेड़ से भी क्षेत्र को पहचान मिलती है, जिसपर 20 हजार से अधिक चमगादड़ों का बसेरा है।
पांच साल में दिखा बदलाव
● गंडक नदी पर बंगरा घाट पुल बनने से सारण और सीवान की ओर जाना हुआ आसान
● हाजीपुर सुगौली नई रेललाइन परियोजना के तहत पहली बार रेललाइन साहेबगंज पहुंची
● साहेबगंज नगर पंचायत से नगर परिषद में उत्क्रमित हुआ
● पारू प्रखंड के फतेहाबाद में गंडक नदी पर एक और पुल की मंजूरी मिली
● पीएचसी का सीएचसी में परिवर्तन से चिकित्सकीय सुविधा में विस्तार
साहेबगंज विस क्षेत्र
यहां से तीन बार जीते नवल किशोर सिंह सहकारिता मंत्री रहे थे। सहकारिता के क्षेत्र में उनके योगदान की वजह से लोग उन्हें बिहार में सहकारिता के जनक कहकर बुलाते हैं। दशकों पुरानी मांग बंगरा घाट में गंडक पर पुल का निर्माण, वैशाली होकर केसरिया, अरेराज जानेवाली एसएच 74 का फोरलेन में बदलने का काम शुरू होना बड़ी उपलब्धियां हैं। विधायक सह पर्यटन मंत्री राजू कुमार सिंह ने कहा कि फतेहाबाद में गंडक पर पुल निर्माण की स्वीकृति और हाजीपुर-सुगौली रेललाइन का साहेबगंज तक काम लगभग पूरा होने को है।
राजद के जिलाध्यक्ष रमेश कुमार गुप्ता ने कहा कि साहेबगंज पर हमारी स्वाभाविक दावेदारी है। राजद ही यहां से महागठबंधन अपना उम्मीदवार पेश करेगा। जहां तक क्षेत्र के विकास की बात है, तो सड़क, बिजली, पानी, रोटी, कपड़ा, मकान जैसी बुनियादी जरूरतें पूरी करने में विधायक विफल रहे हैं। खासकर महिला चिकित्सक और महिला शिक्षा के लिए उनके स्तर से कोई प्रयास नहीं किया गया है।
● देवरिया को प्रखंड बनाए जाने का दशकों पुरानी मांग पूरी नहीं हुई
● इलाके के तीन चौर का मत्स्यपालन के लिए विकसित किया जाना
● विधानसभा क्षेत्र में महिला डिग्री कॉलेज की स्थापना नहीं होना
● सीएचसी में महिला चिकित्सक की पदस्थापना नहीं हो पाना
● बांध निर्माण के समय विस्थापित लोगों का पुनर्वास का मसला




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