बिहार चुनाव: फुलपरास विधानसभा सीट पर कौन मारेगा बाजी, JDU की शीला कुमारी पर सबकी निगाह; राहुल और पीके भी लगा रहे जोर
Bihar Assembly Elections: इस बार चुनाव में जदयू की शीला कुमारी के सामने जीत का सिलसिला बरकरार रखने की चुनौती है। वह पहली बार चुनाव जीतीं और मंत्री भी बनीं, तो लोगों की अपेक्षाएं भी बढ़ गईं। दूसरी तरफ, एनडीए व महागठबंधन दोनों इस क्षेत्र में जोर आजमाइश कर रहे हैं।

Bihar Assembly Elections" data-vars-link-type="Auto" data-vars-page-type="story">Bihar Assembly Elections: भुतही बलान व कोसी नदी के मध्य स्थित मधुबनी जिले का फुलपरास विधानसभा क्षेत्र दिग्गज समाजवादियों की कर्मभूमि रही है। यहां के विधायक धनिक लाल मंडल बिहार विधानसभा के अध्यक्ष और बाद में हरियाणा के राज्यपाल भी रहे तो पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर ने विधानसभा सदस्य बनने के लिए इसी क्षेत्र को चुना था। देवेंद्र प्रसाद यादव भी यहां से विधायक रहे। पिछले तीन चुनावों से जदयू जीत रहा है। राज्य की परिवहन मंत्री शीला देवी यहां से विधायक हैं। समाजवादियों का गढ़ रहे फुलपरास का 1952 से 2020 तक विभिन्न राजनीतिक दलों ने प्रतिनिधित्व किया है। कांग्रेस को पांच बार सफलता मिली।
संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी और जनता पार्टी ने 3-3 बार, समाजवादी पार्टी ने 2 बार, जनता दल ने एक बार और जदयू ने चार बार जीत दर्ज की। 1967 में रसिक लाल यादव को पराजित कर संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के धनिक लाल मंडल ने पहली बार यहां समाजवाद की जो मजबूत जमीन तैयार की, उस पर बाद के चुनावों में समाजवादी धारा की पार्टियां जीतती रहीं। 1985 और 1995 में दो बार कांग्रेस जीती। यहां से राजद और भाजपा को कभी जीत का मौका नहीं मिला। 2020 में जदयू ने निवर्तमान विधायक गुलजार देवी का टिकट काटकर शीला देवी को उतारा था। वह सफल भी रहीं। हालांकि जीत का अंतर थोड़ा कम हुआ। जदयू यहां लगातार तीन बार से जीत रही हैै और इस फिलहाल यह जदयू का गढ़ माना जाता है।
हर साल भुतही बलान और कोसी नदी की बाढ़ की त्रासदी झेलने वाले इस विधानसभा क्षेत्र में चुनाव के ठीक पहले होने वाली जातीय-सामाजिक गोलबंदी निर्णायक साबित होती है। इस बार चुनाव में जदयू की शीला कुमारी के सामने जीत का सिलसिला बरकरार रखने की चुनौती है। वह पहली बार चुनाव जीतीं और मंत्री भी बनीं, तो लोगों की अपेक्षाएं भी बढ़ गईं। दूसरी तरफ, एनडीए व महागठबंधन दोनों इस क्षेत्र में जोर आजमाइश कर रहे हैं। फुलपरास से सटे झंझारपुर में बड़े नेताओं का लगातार दौरा हो रहा है।
प्रधानमंत्री, गृहमंत्री का इस इलाके में सभाएं हो चुकीं हैं। जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने भी झंझारपुर में रैली की है। राहुल गांधी की मतदाता अधिकारी रैली भी होनी है। फुलपरास के लोगों को बाढ़ से होने वाले कटाव और विस्थापन से निजात का इंतजार है। कोसी दियारा के कई गांवों का संपर्क तो साल के कुछ महीनों तक कटा रहता है। हर साल चुनाव में यह मुद्दा छाया उठता है। कोई उद्योग-धंधा न होने से लोग पलायन को मजबूर होते हैं। अनुमंडल मुख्यालय में कोई डिग्री कॉलेज भी नहीं है।
कर्पूरी ठाकुर के लिए देवेंद्र यादव ने छोड़ी थी सीट
1977 के चुनाव में फुलपरास से जनता पार्टी के टिकट पर देवेंद्र प्रसाद यादव ने कांग्रेस के उत्तम लाल यादव को हराया था। समस्तीपुर से सांसद रहते कर्पूरी ठाकुर दूसरी बार बिहार के मुख्यमंत्री बने। छह माह के भीतर उनका बिहार विधान मंडल के किसी सदन का सदस्य बनना जरूरी था। ऐसे में देवेंद्र यादव ने फुलपरास से इस्तीफा दिया और कर्पूरी ठाकुर ने मुख्यमंत्री रहते यहां उपचुनाव में जीत दर्ज की। वह दो साल से भी कम अवधि तक मुख्यमंत्री रहे, लेकिन इस दौरान दबे-पिछड़े लोगों के लिए किये गये उनके कई फैसले बिहार में बदलाव में मील का पत्थर साबित हुए। स्वतंत्रता आंदोलन में भी इस क्षेत्र की पहचान रही है। 1942 में स्वतंत्रता सेनानियों ने थाना फूंक दिया था। हुलासपट्टी का अंकुरित शिवालय जागेश्वर नाथ चर्चित स्थल है। इसका संबंध रामायण काल से है।
इस बार चुनाव में होंगे ये मुद्दे
● फुलपरास में बस पड़ाव का निर्माण
● एनएच 27 के अंडरपास एवं आसपड़ोस के इलाके को जलजमाव की समस्या का निदान
● फुलपरास अनुमंडल मुख्यालय में डिग्री कॉलेज की स्थापना
● फुलपरास रेफरल अस्पताल को अपग्रेड करना
पांच वर्षों में हुए ये बदलाव
● फुलपरास रेफरल अस्पताल में एक ऑक्सीजन प्लांट लगाया गया
● घोघरडीहा कॉलेज में स्नातक में सभी संकायों की पढ़ाई शुरू हो गई
● मधेपुर, घोघरडीहा और फुलपरास में 466 किलोमीटर ग्रामीण सड़कों का निर्माण कराया गया
● अवशेष योजना एवं अन्य मदों से 285 सड़कों की स्वीकृति मिली, जिसमें 96 सड़कों का निर्माण पूर्ण
कांग्रेस नेता और निकटतम प्रतिद्वंद्वी कृपानाथ पाठक ने कहा कि पिछले पांच वर्षों से फुलपरास का विकास कार्य ठप है। विकास के नाम पर महज खानापूर्ति की गई है। बाढ़ की समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई है। इसके समाधान के लिए काम नहीं किया गया है। अपराध और भ्रष्टाचार चरम पर है। जनता की समस्याओं के सवाल पर मैं संघर्ष करता रहूंगा।
मौजूदा विधायक शीला देवी ने कहा कि फुलपरास के चतुर्दिक विकास के लिए हर संभव प्रयास कर रही हूं। ग्रामीण सड़कों को सुदृढ़ करने के लिए लगातार प्रयास जारी है। अधिकतर सड़कों का निर्माण किया जा चुका है। यहां की जो भी समस्या मेरे संज्ञान में आती हैं, मैं उसके समाधान के लिए हमेशा तत्पर रहती हूं। -शीला कुमारी, परिवहन मंत्री सह विधायक फुलपरास
कभी पति तो कभी पत्नी रही विधायक
देवनाथ यादव 1995 में कांग्रेस के टिकट पर जीते थे। पार्टी बदलने के बाद भी 2005 में वे समाजवादी पार्टी से जीते। उनकी पत्नी गुलजार देवी ने भी जदयू से दो बार जीत हासिल की।
वायदे जो पूरे नहीं हुए
● फुलपरास को बाढ़ की समस्या से निजात नहीं मिली
● हुलासपट्टी स्थित जागेश्वर नाथ शिवालय को पर्यटक स्थल का दर्जा नहीं मिल सका
● फुलपरास में बस पड़ाव का निर्माण भी नहीं कराया जा सका
● फुलपरास में मजदूरों का पलायन रोकने के लिए कोई उद्योग नहीं लगा
साल - प्रत्याशी एवं पार्टी
1952: काशीनाथ मिश्रा, कांग्रेस
1957: रसिक लाल यादव, कांग्रेस
1962: रसिक लाल यादव, कांग्रेस
1967: धनिक लाल मंडल, संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी
1969: धनिक लाल मंडल, संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी
1972: उत्तम लाल यादव, संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी
1977: देवेन्द्र प्रसाद यादव, जनता पार्टी
1977: कर्पूरी ठाकुर, जनता पार्टी
1980: सुरेन्द्र यादव, जनता पार्टी
1985: हेमलता यादव, कांग्रेस
1990:राम कुमार यादव, जनता दल
1995: देवनाथ यादव, कांग्रेस
2000: राम कुमार यादव, जनता दल यू
2005: देवनाथ यादव, समाजवादी पार्टी
2010: गुलजार देवी, जनता दल यू
2015: गुलजार देवी,जनता दल यू
2020: शीला कुमारी, जनता दल यू




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