बृज बिहारी से पहले ओंकार और अनिल, भुटकुन शुक्ला ने उठाई थी कसम, कहां से आए चार AK-47?
पूर्व मंत्री बृज बिहारी प्रसाद की हत्या भी छोटन शुक्ला मर्डर कांड के बदला का ही नतीजा था। छोटन शुक्ला के भाई भुटकुन शुक्ला ने अपने बड़े भाई के हत्यारे से उसी अंदाज में बदला लेने की कसम उठाई थी। ओंकार और अनिल बृज बिहारी के करीबी थे जिनकी हत्या बृज बिहारी से बदला लेने के लिए की गयी।

बिहार सरकार के पूर्व मंत्री बृज बिहारी प्रसाद हत्याकांड में मुन्ना शुक्ला को उम्रकैद की सजा के ऐलान से मर्डर की कई कहानियां चर्चा में हैं। मुजफ्फरपुर स्थित चांदनी चौक के पास कौशलेंद्र कुमार शुक्ला उर्फ छोटन शुक्ला की हत्या का बदला लेने के लिए घटना के दो साल के बाद वर्ष 1996 में पूर्व मंत्री बृजबिहारी प्रसाद के करीबी ओंकार सिंह व अनिल सिंह की हत्या की गई थी। पूर्व मंत्री बृज बिहारी प्रसाद की हत्या भी छोटन शुक्ला मर्डर कांड के बदला का ही नतीजा था। छोटन शुक्ला के भाई भुटकुन शुक्ला ने अपने बड़े भाई के हत्यारे से उसी अंदाज में बदला लेने की कसम उठाई थी। ओंकार सिंह और अनिल सिंह बृज बिहारी प्रसाद के करीबी थे जिनकी हत्या बृज बिहारी प्रसाद को दर्द देने के लिए की गयी थी।
वर्ष 1995 में पुरुलिया में हवाई जहाज से गिराई गई अत्याधुनिक हथियारों में से मुजफ्फरपुर लाई गईं एके-47 से दोनों पर गोलियां बरसाई गई थीं। एक साथ चार एके-47 से 200 से अधिक राउंड फायरिंग की गई थी। दरअसल, अहियापुर स्थित बाजार समिति में टेंडर था। इस टेंडर में बृजबिहारी प्रसाद के करीबी ओंकार सिंह, अनिल सिंह, लल्लू सिंह आदि ने भी भाग लिया था। बाजार समिति से कार से लौटने के दौरान छोटन शुक्ला के भाई भुटकुन शुक्ला और अन्य हमलावरों ने जीरोमाइल गोलंबर के पास ओंकार की कार को घेर लिया। तीन तरफ से आए हमलावरों ने एके-47 से कार पर फायरिंग की थी।
कार में ओंकार सिंह, अनिल सिंह और चालक की कार में ही मौत हो गई थी। बताया जाता है कि लल्लू सिंह घिरते ही कार से उतर गया था जिससे वह बच गया। हालांकि, बाद में उसकी भी हत्या कर दी गई थी। बताया जाता है कि ओंकार, अनिल और लल्लू की हत्या के बाद भुटकुन शुक्ला ने चार एके-47 हत्या में शामिल एक कुख्यात को गिफ्ट के तौर पर दिया था।
छोटन की हत्या में ओंकार समेत सात पर दर्ज हुआ था केस
चांदनी चौक के पास छोटन शुक्ला के साथ लालगंज थाना के जलालपुर निवासी रेवती रमण शुक्ला उर्फ चिकरू शुक्ला, समस्तीपुर के नारायण झा, पूर्वी चंपारण के केसरिया निवासी ओमप्रकाश सिंह और एक अन्य अज्ञात जिसे मुन्ना शुक्ला भी नहीं पहचान सका था की हत्या की गई थी। इस हत्याकांड की एफआईआर चार दिसंबर 1994 को ब्रह्मपुरा थाना के दारोगा रवींद्र कुमार के बयान पर दर्ज की गई थी। उसने अज्ञात हमलावरों को आरोपित बनाया था। करजा के रौतिनिया गांव निवासी विपिन कुमार ने मुख्य न्यायिक दंडाधकारी के कोर्ट में परिवाद दाखिल किया था।
इसमें छोटन शुक्ला की हत्या का सीधा आरोप ओंकार सिंह, उसके बॉडीगार्ड, अनिल सिंह, लल्लू सिंह के अलावा ब्रह्मपुरा थाना के तत्कालीन इंस्पेक्टर दीपक कुमार अंबष्ट, दारोगा प्रदीप कुमार सिंह और संजय सिंह पर लगाया था। कोर्ट के आदेश पर इस परिवाद को लेकर भी अलग से एफआईआर दर्ज की गई। लेकिन, पुलिस ने जांच में आरोपितों को क्लीन चिट देते हुए फाइनल रिपोर्ट कोर्ट में पेश कर दी थी।




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