बंगाल से भाग बिहार में घुसने की फिराक में बांग्लादेशी, नेपाल में भी नहीं मिल रहा पनाह
बताया जाता है कि सिलीगुड़ी, बागडोगरा, ठाकुरगंज, किशनगंज और फारबिसगंज जैसे प्रमुख चेकपोस्ट पर एसएसबी के जवानों ने गश्त तेज कर दी है। आने-जाने वाले हर संदिग्ध व्यक्ति की कड़ाई से जांच की जा रही है। दूसरी ओर नेपाल की ओर से भी सुरक्षा चक्र मजबूत कर दिया गया है।
पश्चिम बंगाल के पानीटंकी से लेकर बिहार के जोगबनी बॉर्डर तक इन दिनों सुरक्षा एजेंसियां ज्यादा सतर्क हैं। खासतौर से एसएसबी के जवान विशेष रूप से अलर्ट मोड में हैं। जवानों की पैनी निगाह बांग्लादेशी नागिरकों पर है। दरअसल, पश्चिम बंगाल में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों के खिलाफ शासन कार्रवाई कर रहा है। अब ये बांग्लादेशी नागरिक नए ठौर की तलाश में हैं। आशंका है कि वे बिहार घुसने का प्रयास करेंगे। सीधे पश्चिम बंगाल के रास्ते या फिर नेपाल के रास्ते। एसएसबी के आईजी नीतीश कुमार उज्जवल कहते हैं, इंडो-नेपाल बॉर्डर के साथ सीमाई इलाकों में संदिग्ध लोगों की आवाजाही पर पैनी निगाह है।
वर्तमान स्थिति को देखते हुए 24 घंटे खासकर बांग्लादेशियों पर विशेष नजर है। किसी भी तरह की घुसपैठ नहीं हो पाए, इसको लेकर फुलप्रूफ प्लान के साथ जवानों की तैनाती है। बताया जाता है कि सिलीगुड़ी, बागडोगरा, ठाकुरगंज, किशनगंज और फारबिसगंज जैसे प्रमुख चेकपोस्ट पर एसएसबी के जवानों ने गश्त तेज कर दी है। आने-जाने वाले हर संदिग्ध व्यक्ति की कड़ाई से जांच की जा रही है। दूसरी ओर नेपाल की ओर से भी सुरक्षा चक्र मजबूत कर दिया गया है।
नेपाल की आर्म्ड पुलिस फोर्स (एपीएफ) की टीम भी पूरी तरह मुस्तैद है और किसी भी कीमत पर बांग्लादेशियों को नेपाल की सीमा में प्रवेश करने नहीं दे रही है। दोनों देशों की सुरक्षा एजेंसियां आपसी समन्वय से इस घुसपैठ को नाकाम करने की तैयारी है।
सीमांचल में अचानक कम हो गए फेरीवाले
पश्चिम बंगाल में कड़ाई का सीधा असर बिहार के पूर्णिया, अररिया, कटिहार, किशनगंज, कोसी के जिलों में साफ देखने को मिल रहा है। इन क्षेत्रों के कई सस्ते लॉज और डेरे अचानक खाली हो गए हैं। पहले की तुलना में अब पूर्णिया, अररिया, कटिहार और किशनगंज की सड़कों और गलियों में फेरीवाले बेहद कम नजर आ रहे हैं। दरअसल, अवैध रूप से आए बांग्लादेशी नागरिक बेहद सस्ते किराए पर कमरा या लॉज लेकर रहते थे।
दिन में ये कपड़े, बर्तन और अन्य सामान बेचने के बहाने फेरी का काम करते थे, ताकि स्थानीय आबादी में घुल-मिल सकें और सुरक्षा एजेंसियों की नजरों से बचे रहें। कड़े प्रशासनिक रुख और सीमा पर बढ़ी सख्ती के बाद ये लोग अब इन ठिकानों को छोड़कर भाग रहे हैं। हालांकि इसका कोई आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। इस बीच सुरक्षा एजेंसियों ने सीमावर्ती गांवाों के लोगों से भी अपील की है कि वे किसी भी अज्ञात या संदिग्ध व्यक्ति को शरण न दें। इनकी सूचना तुरंत पुलिस या एसएसबी को दें।




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