वीर कुंवर सिंह की मूर्ति का अनावरण करना अवैध, आरके सिंह पर दर्ज हो केस; सांसद ने उठाई मांग
आरा के भाकपा माले सांसद सुदामा प्रसाद ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पूर्व केंद्रीय मंत्री आरके सिंह पर एफआईआर करने की मांग रेल प्रशासन से की है। उन्होंने कहा कि आरा जंक्शन के सर्कुलेटिंग एरिया में रविवार को बाबू वीर कुंवर सिंह की मूर्ति का आरके सिंह की ओर से अनावरण किया जाना अवैध कार्य है।

बिहार के भोजपुर जिले के आरा में महान स्वतंत्रता सेनानी बाबू वीर कुंवर सिंह की प्रतिमा का अनावरण किए जाने के मामले में पूर्व केंद्रीय मंत्री आरके सिंह की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। रविवार को बिना किसी पूर्व सूचना के ही आरके सिंह आरा जंक्शन परिसर में पहुंचे थे और बिना किसी समारोह के वहां लगी प्रतिमा का अनावरण करते हुए उस पर माल्यार्पण किया था। उनके साथ बड़ी संख्या में आम से लेकर खास लोग मौजूद थे। प्रतिमा के अनावरण के बाद बाबू कुंवर सिंह अमर रहें के नारे भी पूर्व सांसद और उनके समर्थकों की ओर से लगाये गए थे।
अब इसपर आरा के सांसद सुदामा प्रसाद ने एतराज जताया है। सुदामा प्रसाद ने रेल प्रशासन से मांग उठाई है कि वो आरके सिंह पर केस दर्ज करे। आरा के भाकपा माले सांसद सुदामा प्रसाद ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पूर्व केंद्रीय मंत्री आरके सिंह पर एफआईआर करने की मांग रेल प्रशासन से की है। उन्होंने कहा कि आरा जंक्शन के सर्कुलेटिंग एरिया में रविवार को बाबू वीर कुंवर सिंह की मूर्ति का आरके सिंह की ओर से अनावरण किया जाना अवैध कार्य है। वे अपनी हार पचा नहीं पा रहे हैं। वोट चोरी के बाद यह उद्घाटन चोरी का मामला है। डीआरएम समेत अन्य रेल अधिकारियों से उन्होंने बात की तो सभी ने किसी तरह के कार्यक्रम से अनभिज्ञता जताई। ऐसे में रेल प्रशासन को आरके सिंह पर एफआईआर करनी चाहिए।
आपको बता दें कि दानापुर रेल मंडल के अंतर्गत आरा जंक्शन के सर्कुलेटिंग एरिया में 1857 के महान स्वतंत्रता सेनानी बाबू वीर कुंवर सिंह की लगाई गई प्रतिमा पर रविवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री सह पूर्व सांसद आरके सिंह ने माल्यार्पण कर नमन किया। मालूम हो कि महीनों से तैयार प्रतिमा का अनावरण अब तक नहीं हो पाया था। इस वर्ष बीते 23 अप्रैल को वीर कुंवर सिंह विजयोत्सव पर भी अनावरण नहीं हुआ था। इसे ले समय-समय पर रोष भी जताया जा रहा था। बता दें कि आरा जंक्शन परिसर में प्रतिमा लगे हुए कई महीने बीत चुके थे।
पहले इस प्रतिमा के लिए एक प्लेटफॉर्म बना था और प्रतिमा बनकर लगने आई थी। तत्कालीन सांसद सह पूर्व केंद्रीय मंत्री आरके सिंह के निरीक्षण के बाद उक्त प्रतिमा को वापस भेजकर दूसरी बड़ी प्रतिमा बनवाई गई। प्रतिमा स्थल के चयन को लेकर भी विवाद शुरू हुआ था। बाद में नई और बड़ी प्रतिमा बनकर आई। साथ ही पहले वाले स्थान से हटकर ठीक बगल में नया मंच बना और उस पर प्रतिमा लग भी गई पर प्रतिमा अब तक पर्दे में सहेजी गई थी। आदमकद प्रतिमा अनावरण का इंतजार कर रही थी, लेकिन रविवार को इसका अनावरण बिना किसी पूर्व सूचना के ही हो गया।




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