बिहार में डेढ़ दशक बाद अक्टूबर में 21 नदियां उफान पर, तटबंधों की सुरक्षा बढ़ी; रात में भी निगरानी
जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि नदियों का इस तरह बढ़ना हमारे लिए परेशानी का कारण बना हुआ है। इस समय नदियों की ऐसी प्रकृति अप्रत्याशित है। हम सतर्क हैं और सभी तटबंधों की 24 घंटे निगरानी की जा रही है।

नेपाल और पड़ोसी राज्यों में बारिश से 21 नदियां खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गयी है। ऐसी स्थिति 15 वर्षों के बाद आई है जब राज्य की नदियां अक्टूबर के पहले-दूसरे सप्ताह में इतनी बड़ी संख्या में लाल निशान के पार हुई है। यही नहीं इस दौरान कोसी और बागमती में रिकॉर्ड जलस्राव भी हुआ। कोसी में 15 वर्षों में दूसरी बार इतना पानी आया, जबकि बागमती भी अपने सर्वाधिक जलस्तर के रिकॉर्ड के करीब पहुंची। बागमती ने दूसरा सर्वोच्च जलस्तर का रिकॉर्ड बनाया।
इसके पहले वर्ष 2019 में सूबे की नदियों में भारी उफान आया था और अक्तूबर के पहले सप्ताह के अंत में 18 नदियां खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गयी थीं। इसी तरह 2020 में भी 16 नदियां खरते के निशान से ऊपर पहुंची थीं। जल संसाधन विभाग भी नदियों के इस व्यवहार से हैरान है। विभाग ने नदियों के तटबंधों की सुरक्षा बढ़ा दी है। रात्रि पेट्रोलिंग भी शुरू की गयी है।
संबंधित अभियंताओं के साथ-साथ तटबंध सुरक्षाकर्मियों को 24 घंटे निगरानी की हिदायत दी गयी है। कोसी, बागमती, गंडक, परमान, ललबकिया, कमला बलान, अधवारा, महानंदा, लखनदेई, पुनपुन के अलावा माही, बाया, गंडकी, थोमाने, पश्चिम कनकई, बनास, कर्मनाशा, दुर्गावती, मोहाने, भूतही, घोघा नदियां खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गयी है।
कोसी में दूसरी बार रिकाॅर्ड जलस्तर
कोसी नदी ने 57 वर्षों में जलस्तर का दूसरा सबसे बड़ा रिकॉर्ड बनाया। 5 अक्तूबर को कोसी में 5.33 लाख क्यूसेक पानी आया। यह पिछले साल के 6.61 लाख क्यूसेक के बाद सर्वाधिक है। इसके पहले 1968 में 5 अक्टूबर को ही 7.88 लाख क्यूसेक पानी आया था।
जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि नदियों का इस तरह बढ़ना हमारे लिए परेशानी का कारण बना हुआ है। इस समय नदियों की ऐसी प्रकृति अप्रत्याशित है। हम सतर्क हैं और सभी तटबंधों की 24 घंटे निगरानी की जा रही है। किसी भी स्थिति से निपटने के लिए हम पूरी तरह तैयार हैं।




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