भूल नहीं सकते खौफ का वो मंज़र; मुजफ्फरपुर हॉस्पिटल फायर ट्रेजेडी में आपबीती की 7 कहानियां
मुजफ्फरपुर के प्रसाद हॉस्पिटल में आईसीयू में लगी आग में 6 मरीजों की मौत हो गई। कई लोगों को बचा लिया गया। लेकिन, हादसे ने जो दर्द दिया उसे कभी भुलाया नहीं जा सकता।

Muzaffarpur Hospital Fire Tragedy: बिहार के मुजफ्फरपुर में प्रसाद प्राइवेट हॉस्पिटल के आईसीयू में लगी आग ने छह जिंदगियों को निगल लिया और एक दर्जन को तबाह कर दिया। जो लोग मौत के मुंह में समा गए उनके परिजनों की चित्कार से पूरा बिहार गमगीन है। जो बचकर निकल गए उनके चेहरों पर भी खौफ के निशान बरकरार हैं। वो मंजर कैसा था, कैसे बचे, कौन मर गया, आग कैसे तबाही मचा रही थी, इन सवालों से जूझते मरीज और उनके परिजन बताते हैं कि इस हादसे को जिन्दगी भर भूल नहीं सकते।
पैर का ऑपरेशन कराने आई थी, जान ही चली गई
प्रसाद हॉस्पिटल की आईसीयू में लगी आग में सीतामढ़ी जिले के बेलसंड प्रखंड के रूपौली गांव की चंचला वर्मा (61) की मौत हो गई। चंचला आंगनबाड़ी सेविका के साथ संघ की प्रखंड अध्यक्ष भी थीं। पति कुशेष प्रसाद ने बताया कि बुधवार को घर में गिरने से चंचला वर्मा का पैर टूट गया था। इलाज के लिए उसी शाम उन्हें मुजफ्फरपुर में भर्ती कराया गया था। चिकित्सकों ने ऑपरेशन के बाद उन्हें आईसीयू में शिफ्ट किया था। परिजन उनके स्वस्थ होने की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन तभी अस्पताल में यह दर्दनाक हादसा हो गया। मृतका के घर में मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
पत्नी को नहीं बचा सका ...कहकर फफक पड़े
मुजफ्फरपुर के कथैया थाने के दिसतौलिया निवासी 62 वर्षीया गीता देवी को परिजनों ने बुधवार को अस्पताल में भर्ती कराया था। पति ईश्वर ठाकुर ने बताया कि पत्नी की डायलिसिस करानी थी। अचानक हॉस्पिटल में आग लग गई। पत्नी को लेकर बाहर भागे, लेकिन आग की लपटें इतनी तेज थीं कि बुरी तरह से घिर गया। किसी तरह पुत्र के साथ खुद बाहर निकला, लेकिन पत्नी को नहीं बचा सका। इतना कहकर वे फफकने लगे। ईश्वर ठाकुर ने बताया कि वह भारतीय सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद घर पर ही खेती करते थे। उन्हें दो पुत्र हैं। एक गांव में अमीन है, जबकि दूसरा दूसरे प्रदेश में रहकर काम करता है।
ऑपरेशन से सुधर रही थी सेहत, आग ने छीन ली सांसें
प्रसाद हॉस्पिटल के आईसीयू में भर्ती किये गये शिवहर तरियानी के उदय कुमार साह का न्यूरो ऑपरेशन किया गया था। उनके परिजनों ने बताया कि 1 जून को शाम 6 बजे उन्हें प्रसाद हॉस्पिटल में भर्ती किया गया था। उसके बाद उनका ऑपरेशन किया गया। ऑपरेशन के बाद उनकी हालत में कुछ सुधार हो रहा था, लेकिन हादसे ने उनकी जान ले ली। उदय कुमार की उम्र 56 वर्ष थी। उनके परिजनों ने बताया कि आईसीयू में हादसा होने के बाद सभी कर्मचारी वहां से भाग गये और किसी ने मरीज की मदद नहीं की। मरीज को ऑक्सीजन लगा था और आईसीयू से निकलने में असमर्थ था। मरीज के परिजनों ने अस्पताल पर लापरवाही का आरोप लगाया। उदय साह के परिजनों ने भी कहा कि उन्हें पांच दिन पहले भर्ती किया गया था, लेकिन अस्पताल के रिकार्ड में भर्ती की तारीख 1 जून बतायी गई है।
दूसरी मंजिल पर ठहरी पत्नी को उतार कर बाहर भागे
हथौड़ी के पत्नी पूनम कुमारी का गॉल ब्लैडर का ऑपरेशन हुआ था। उनके पति ने बताया कि हम लोग प्रसाद हॉस्पिटल के दूसरे तल पर ठहरे हुए थे। करीब तीन बजे के आसपास अचानक अस्पताल में चीख-पुकार मचने लगी। उस समय बेटी जगी हुई थी। दरवाजा खोलकर बाहर देखा तो ऊपर से शीशे टूटकर नीचे गिर रहे थे और लोग इधर-उधर भाग रहे थे। तुरंत भागकर सूचना दी कि अस्पताल में कुछ हादसा हो गया है। फिर जिस अवस्था में था, उसी हालत में पत्नी को कमरे से निकालकर बाहर की ओर भागे। जब तक निकले, अस्पताल धुआं से भर चुका था। सांस लेना मुश्किल हो रहा था। अस्पताल से बाहर निकलने के बाद लगा कि नया जीवन मिल गया। अस्पताल के भीतर का दृश्य भयावह था।
संजीत के लिए फरिश्ता बन आया अग्निशमन दस्ता
साहेबगं के विशुनपुर कल्याण निवासी संजीत पासवान (35) के लिए अग्निशमन दस्ता का जवान फरिश्ता बनकर आया। अस्पताल की दूसरी मंजिल पर भर्ती संजीत को जवान ने गोद में उठाकर नीचे लाया। संजीत के परिजनों ने बताया कि उसे टायफायड हो गया था। मंगलवार को भर्ती कराया गया था। संजीत की मां मीना देवी ने बताया कि आईसीयू में आग लगने के बाद भगदड़ मच गई। उसने बताया कि सुबह डिस्चार्ज स्लिप लेकर बेटे को एसकेएमसीएच में भर्ती कराया। संजीत को एक 13 वर्ष का पुत्र अनमोल कुमार तथा पुत्री अंकिता कुमारी 10 वर्ष है।
चेहरे पर गीला तौलिया रख मरीजों को बाहर निकाला
चतुरसी गांव के सुरेंद्र ने बताया कि सड़क दुर्घटना में घायल उनके भाई रंजीत कुमार (20 वर्ष) को एक जून को प्रसाद हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने उसे 72 घंटे के विशेष पर्यवेक्षण में रखा था। यह पर्यवेक्षण गुरुवार को पूरा होने वाला था। इस बीच आईसीयू में लगी आग में रंजीत बुरी तरह झुलस गया। धुएं से बचने के लिए गीला तौलिया से चेहरे पर पट्टी लगाकर आईसीयू में जाकर मरीजों को बाहर निकालने में मदद की। रंजीत को भी गोबरसही स्थित हॉस्पिटल में शिफ्ट किया गया।
देख नहीं सकता, अनजान हाथों ने बचाई मेरी जिंदगी
मैं देख नहीं सकता, लेकिन मौत के मुंह से निकालने वाली को कैसे भूल सकता हूं। दो महिलाएं थीं जिन्होंने दोनों तरफ से मुझे थामा और आईसीयू बाहर निकाला। प्रसाद अस्पताल की आईसीयू में भर्ती नेत्रहीन मो. मुश्ताक यह बताते हुए फफक पड़े। रघुनाथपुर निवासी 70 वर्षीय नेत्रहीन मुश्ताक को दो महिलाओं ने सहारा देकर बाहर निकाला। बताया कि हाई डायबिटीज के कारण बेटे मो. चांद ने उन्हें यहां भर्ती कराया था। बताया कि जब चारों तरफ शोर हो रहा था तो उन्हें कुछ समझ नहीं आ रहा था। वह बस अपने बेटे को पुकार रहे थे। तभी दो महिलाओं ने कंधा पकड़कर उनको उठाया और सहारा देकर कहीं बैठा दिया।




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