65 का दूल्हा, 60 की दुल्हन, मंदिर में लव मैरिज; बिहार के जमुई में गजब की प्रेम कहानी
पति-पत्नी बने जोड़े खुश हैं। इलाके में चर्चा है जोरों पर है कि इस उम्र में भी लोग शादी कर सकते हैं। घर की बहू नाराज है जबकि, बुजुर्ग दंपति का कहना है कि परिजन देखभाल नहीं कर रहे थे तो एक दूसरे का सहारा बनना पड़ा।

Amazing Love Story: ना उम्र की सीमा हो ना जन्म का हो बंधन, जब प्यार करे कोई तो देखे केवल मन। बिहार के जमुई में एक प्रेम कहानी जब शादी के रिश्ते में मुकम्मल हुई तो परिवार और समाज भले ही नाराज हो गया लेकिन, पड़ोसी से पति-पत्नी बने जोड़े खुश हैं। इलाके में चर्चा है जोरों पर है कि इस उम्र में भी लोग शादी कर सकते हैं। घर की बहू नाराज है जबकि, बुजुर्ग दंपति का कहना है कि परिजन देखभाल नहीं कर रहे थे तो एक दूसरे का सहारा बनना पड़ा। उन्हें किसी के ताने की कोई चिंता नहीं है।
जमुई के खैरा थाना इलाके के डुमरकोला महादलित टोले 65 वर्षीय चपर माझी को अपने पड़ोस में रहने वाली आशा देवी से प्रेम हो गया। चपर मांझी ने बताया कि दोनों एक साथ उठते बैठते प्रेम के रिश्ते में आ गए। उन्हें कोई आश्चर्य नहीं है कि लोग क्या कह रहे हैं। चपर मांझी की पत्नी की मौत पांच साल पहले हो गई। आशा देवी भी विधवा है। पति की मौत के बाद वह अकेली हो गई थी। दोनों मजदूरी करते हैं लेकिन, खाली समय में एक दूसरे के पास बैठकर सुख-दुख शेयर करते थे।
चपर मांझी ने बताया कि उसका बेटा है और बहू भी है। घर में पोते पोतियां भी है। लेकिन, पत्नी की कमी तब खलती है जब कोई उनकी देखभाल करने के लिए आगे नहीं आता। बुढ़ापे की उम्र में खाने पीने की दिक्कत होती है काम करने जाना चाहते हैं पर समय पर कुछ खाने को नहीं मिलता है। इसलिए आशा देवी से शादी की बात की। वह तैयार हो गई तो गांव के मंदिर में भगवान को साक्षी मानकर शादी कर ली।
आशा देवी का भी वही हाल है। पति के निधन के बाद अकेली पड़ गई। चपर मांझी ने ही सहारा दिया। दोनों अपनी जरूरतों के लिए एक दूसरे का सहयोग करते रहे। यह बात गांव में लोगों को पता चल गया। चपर मांझी ने शादी कर लेने की बात की ताकि कोई कुछ नहीं बोलेगा तो राजी हो गई। आशा देवी बाकी उम्र उनके साथ बसर करना चाहती है।
चपर मांझी की बहू कुसुम देवी इस रिश्ते से नाराज है। उसका कहना है कि कोई इससे खुश नहीं है। ससुर को अपने बेटे, बहू, पोता, पोती का मुंह देखकर जीना चाहिए था। इस उम्र में शादी करके ठीक नहीं किया।
परिजन खफा हैं और समाज के लोग ताने दे रहे हैं कि श्राद्ध की उम्र में शादी की है। लेकिन बुजुर्ग जोड़ी को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। उनका कहना है कि ताना देने वाले रोटी, पानी या दवा देने नहीं आ सकते।




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