हनुमान चालीसा कब नहीं पढ़ना चाहिए? जानिए वजह
Hanuman Chalisa: हनुमान चालीसा में एक चौपाई है कि जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा, होय सिद्धि साखी गौरीसा। इसका अर्थ है कि भगवान शंकर इस हनुमान चालीसा के प्रेरक हैं, इसलिए वे साक्षी हैं कि जो भी इसका पाठ करेगा उसे हर प्रकार की सिद्धियां प्राप्त होगी यानी उसे निश्चय ही सफलता प्राप्त होगी।

हनुमान चालीसा की एक चौपाई है कि "जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा, होय सिद्धि साखी गौरीसा"। इसका अर्थ है कि भगवान शंकर इस हनुमान चालीसा के प्रेरक हैं, इसलिए वे साक्षी हैं कि जो भी इसका पाठ करेगा उसे हर प्रकार की सिद्धियां प्राप्त होगी यानी उसे निश्चय ही सफलता प्राप्त होगी। इसलिए कहा जाता है कि हनुमान जी को समर्पित पाठ हनुमान चालीसा पढ़ने के अनगिनत लाभ हैं। लेकिन अगर आप हनुमान चालीसा का पाठ रोजाना करते हैं, तो इसके नियम जान लें, तभी इसका फल प्राप्त होगा, अन्यथा बजरंगबली नाराज हो जाते हैं। कुछ समय और परिस्थितियां ऐसी हैं जब इसका पाठ करने से पूरा लाभ नहीं मिलता है। चलिए जानते हैं कि कब नहीं पढ़ना चाहिए हनुमान चालीसा।
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए हनुमान चालीसा का पाठ सबसे आसान उपायों में से एक है। इसका नियमित पाठ करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, समस्याओं का समाधान मिलता है।
हनुमान चालीसा पाठ कब और कैसे करें
हनुमान चालीसा हमेशा एक साफ जगह बैठकर करना चाहिए। फिर चाहे वो घर हो, मंदिर या कोई तीर्थ क्षेत्र। इसके लिए हमेशा आसन का इस्तेमाल करें। स्नान के बाद स्वस्छ वस्त्र पहनें, शांत और साफ जगह बैठें। इसके बाद हनुमान जी के सामने दीपक जलाएं। चालीसा का पाठ करने से पूर्व, राम जी का नाम लें। उन्हें फूल, भोग अर्पित करें और फिर पाठ शुरू करें। ब्रह्म मुहूर्त में हनुमान चालीसा का पाठ करना सबसे उत्तम माना गया है।
शास्त्रों की मानें तो इस अवधि के दौरान वातावरण में सबसे शुद्ध ऊर्जा, शांति और शक्ति मौजूद होती है। ऐसे में ब्रह्म मुहूर्त यानी सुबह 4 बजे से लेकर 5 बजकर 30 मिनट तक के बीच में हनुमान चालीसा का पाठ करना सबसे शक्तिशाली और फलदायी माना गया है। इसके अलावा संध्याकाल में हाथ-पैर धोने के बाद इसका पाठ करना सही माना गया है।
कब नहीं करें
-सूर्यास्त के तुरंत बाद ही हनुमान चालीसा का पाठ नहीं करना चाहिए। क्योंकि इस समय का प्रभाव कम माना जाता है।
- हनुमान चालीसा को गुस्से में पढ़ना अच्छा नहीं माना जाता है। क्योंकि इसका भाव "शांति, श्रद्धा और समर्पण" है।
-बिना स्नान, बिना शुद्धता या जल्दबाजी में किया गया पाठ कम फलदायी होता है।
-अशुद्ध अवस्था में भी हनुमान चालीसा का पाठ करना उचित नहीं होता।
- मान्यता है कि कभी भी दोपहर के समय हनुमान चालीसा का पाठ नहीं करनी चाहिए।
- हनुमान चालीसा का पाठ करते समय किसी भी व्यक्ति से बातचीत नहीं करनी चाहिए।
कितनी बार करें पाठ
वैसे तो हनुमान चालीसा का पाठ एक बार, तीन बार, या सात बार करना शुभ माना जाता है। विशेष मनोकामना की पूर्ति के लिए 108 बार पाठ किया जा सकता है।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।




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