Vat Savitri Vrat Date and time pooja muhurat kab hai Vat Savitri 2025 Vat Savitri Vrat: वट सावित्री व्रत कब है? जानें व्रत व पूजा की विधि, एस्ट्रोलॉजी न्यूज़ - Hindustan
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Vat Savitri Vrat: वट सावित्री व्रत कब है? जानें व्रत व पूजा की विधि

  • Vat Savitri Vrat Date and time : वट सावित्री व्रत को शनि जयंती के नाम से भी जाना जाता है। वट सावित्री के दिन सुहागिन महिलाएं भूखी प्यासी रहकर अपने पति की दीर्घायु की कामना के लिए व्रत रखती हैं।

Sat, 12 April 2025 05:43 PMShrishti Chaubey लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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Vat Savitri Vrat: वट सावित्री व्रत कब है? जानें व्रत व पूजा की विधि

Vat Savitri Vrat Date and time: वट सावित्री व्रत हर साल ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि के दिन रखा जाता है। वट सावित्री व्रत हिंदू धर्म का एक प्रमुख त्योहार है। इसे शनि जयंती के नाम से भी जाना जाता है। वट सावित्री महिलाएं पति की दीर्घायु की कामना के लिए रखती हैं। सबसे पहले वट सावित्री का व्रत राजा अश्वपति की पुत्री सावित्री ने अपने पति सत्यवान के लिए किया था। तभी से वट सावित्री व्रत महिलाएं अपने पति के मंगल कामना के लिए रखती हैं। वट सावित्री व्रत के दिन सुहागिन महिलाएं भूखी प्यासी रहकर व्रत करती हैं। साथ ही वट वृक्ष की पूजा करती हैं। इस व्रत को करने से शनि के नकारात्मक प्रभाव में भी कमी आती है।

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वट सावित्री व्रत कब है: 2025 में वट सावित्री का व्रत ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि यानी सोमवार 26 मई को रखा जाएगा। पंचांग अनुसार, 26 मई को अमावस्या तिथि का आरंभ दोपहर में 12 बजकर 12 मिनट पर होगा और 27 तारीख को सुबह में 8 बजकर 32 मिनट पर अमावस्या तिथि समाप्त होगी। शास्त्रीय विधान के अनुसार, अमावस्या तिथि दोपहर के समय होने पर वट सावित्री व्रत किया जाता है। इसलिए यह व्रत 26 मई को किया जाएगा।

जानें व्रत व पूजा की विधि: वट सावित्री व्रत वाले दिन सुहागिन महिलाएं सुबह उठ कर स्नान करें। स्नान के बाद इस व्रत का संकल्प लें। सोलह शृंगार करें। साथ ही इस दिन पीला सिंदूर भी जरूर लगाएं। इस दिन बरगद के पेड़ के नीचे सावित्री-सत्यवान और यमराज की मूर्ति रखें। बरगद के पेड़ में जल डालकर उसमें पुष्प, अक्षत, फूल और मिठाई चढ़ाएं। वृक्ष में रक्षा सूत्र बांधकर आशीर्वाद की प्रार्थना करें। वट वृक्ष की कच्च धागा लपेटकर सात परिक्रमा करें इसके बाद हाथ में काले चने को लेकर इस व्रत की कथा सुनें। कथा के बाद ब्राह्मण को दान दें। दान में वस्त्र दक्षिणा और चने दें। अगले दिन व्रत को तोड़ने से पहले बरगद के वृक्ष का कोपल खाकर उपवास समाप्त करें।

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डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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