Vat Savitri Puja Samagri: वट सावित्री की पूजा में क्या-क्या लगता है? नोट करें सामग्री की पूरी लिस्ट
Vat Savitri Puja Samagri Complete List: 16 मई को वट सावित्री का व्रत रखने वाले हैं। नोट कर लें पूजा में क्या-क्या सामान लगेगा? साथ ही पढ़ें देवी सावित्री और सत्यवान की कहानी और जानें पूजा की आसान सी विधि के बारे में।

वट सावित्री का व्रत 16 मई को रखा जाएगा। हिंदू धर्म में इस व्रत को सुहागिन महिलाओं के लिए बहुत ही खास माना जाता है। इस खास दिन पर व्रत रखकर सुहागिनें अपने पति की लंबी उम्र के साथ-साथ वैवाहिक जीवन की सुखी होने की मन्नत मांगती हैं। मान्यता है कि विधि-विधान से इस दिन पूजा की जाए को हर मनोकामना पूरी होती है। श्रद्धा और सही पूजन सामग्री के साथ किया गया वट सावित्री व्रत और भी शुभ फलदायी माना जाता है।
ऐसे में पूजा या व्रत शुरू करने से पहले सभी जरूरी सामान की तैयारी कर लेना बेहद जरूरी होता है। अगर आप भी इस साल वट सावित्री का व्रत रखने जा रही हैं तो पहले जान लें कि पूजा में किन-किन सामग्रियों की जरूरत पड़ती है।
वट सावित्री व्रत की कथा और महत्व
वट सावित्री व्रत के पीछे देवी सावित्री और उनके पति सत्यवान की पौराणिक कथा जुड़ी हुई है। मान्यता है कि सावित्री अपने पति सत्यवान से बहुत प्यार करती थीं। जब यमराज सत्यवान के प्राण लेकर जाने लगे तब सावित्री ने अपनी बुद्धिमानी, भक्ति और दृढ़ निश्चय से यमराज को विवश कर दिया। आखिरकार यमराज ने हार मानकर सत्यवान को दोबारा जीवनदान दे दिया। मान्यता है कि पति के जीवनदान का आशीर्वाद देवी सावित्री को वट यानी बरगद के पेड़ के नीचे ही मिला था। इसी वजह से वट सावित्री की पूजा में बरगद के पेड़ की पूजा का महत्व होता है।
वट सावित्री पूजा की सामग्री
पूजा की थाली
बरगद की पूजा के लिए जल
16 श्रृंगार का सामान
सावित्री-सत्यवान की तस्वीर या मूर्ति
धूप और दीया
बाती और घी
अगरबत्ती
मौली
रोली और हल्दी
कुमकुम
अक्षत
भीगे हुए चने
फूल और माला
फल और मिठाई
पूड़ी-पकवान
पान, सुपारी और लौंग
नारियल
लाल या पीला कपड़ा
मिट्टी या पीतल का कलश
दक्षिणा और दान की सामग्री
वट सावित्री की आसान पूजा विधि
- वट सावित्री व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें।
- घर के मंदिर में दीया जलाकर अब व्रत का संकल्प लें।
- पूजा का सारा सामान एक थाली में सजा लें।
- इसके बाद बरगद के पेड़ के पास जाएं और जल अर्पित करके अक्षत, रोली और फूल वगैरह चढ़ा दें।
- बरगद के पेड़ के चारों ओर कच्चा सूत या मौली लपेटते हुए 7 बार परिक्रमा करें।
- अब ऊपर बताए गए सावित्री और सत्यवान की कथा को पढ़ें।
- पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करें। इसके बाद आखिरी में आरती करके प्रसाद बांट दें। पूजा के बाद आप अपना व्रत खोल सकती हैं।
डिस्क्लेमर- (इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।)




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