17 या 18 दिसंबर, कब है साल 2025 का अंतिम प्रदोष व्रत? जानिए सही तिथि से लेकर पूजा विधि
हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित एक महत्वपूर्ण व्रत है। साल 2025 का अंतिम प्रदोष व्रत पौष मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को है। कई लोग 17 या 18 दिसंबर को लेकर कन्फ्यूज हैं, लेकिन सही तिथि जानना जरूरी है।

हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित एक महत्वपूर्ण व्रत है। यह हर महीने की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है और प्रदोष काल में शिव पूजा करने से विशेष फल प्राप्त होता है। मान्यता है कि इस व्रत से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, पापों का नाश होता है और भगवान शिव का आशीर्वाद मिलता है।
साल 2025 का अंतिम प्रदोष व्रत पौष मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को है। कई लोग 17 या 18 दिसंबर को लेकर कन्फ्यूज हैं, लेकिन सही तिथि जानना जरूरी है। आइए विस्तार से समझते हैं।
साल 2025 के अंतिम प्रदोष व्रत की सही तिथि
वैदिक पंचांग के अनुसार, पौष मास कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 16 दिसंबर 2025 को रात 11:57 बजे शुरू होकर 18 दिसंबर 2025 को रात 2:32 बजे तक रहेगी। हालांकि, त्रयोदशी तिथि 17 दिसंबर को पूरे दिन और प्रदोष काल में व्याप्त रहेगी, इसलिए साल 2025 का अंतिम प्रदोष व्रत 17 दिसंबर 2025, दिन - बुधवार को रखा जाएगा। यह बुध प्रदोष व्रत कहलाएगा, जो बुद्धि, व्यापार और सफलता के लिए विशेष शुभ है।
17 दिसंबर को शाम में 5:38 बजे से रात 8:18 बजे तक प्रदोष काल मुहूर्त रहेगा। पूजा इसी मुहूर्त में करना सबसे उत्तम माना जाता है।
प्रदोष व्रत का महत्व और लाभ
प्रदोष व्रत को भगवान शिव की सबसे प्रिय पूजा माना जाता है। शास्त्रों में कहा गया है कि प्रदोष काल में शिवजी पृथ्वी पर भ्रमण करते हैं और भक्तों की पुकार सुनते हैं। इस व्रत से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं, स्वास्थ्य अच्छा रहता है, धन-समृद्धि बढ़ती है और संतान सुख मिलता है। बुध प्रदोष होने से यह व्रत विशेष रूप से करियर, बिजनेस और मानसिक शांति के लिए फलदायी है। नियमित प्रदोष व्रत रखने से कुंडली के शिव संबंधी दोष भी दूर होते हैं।
प्रदोष व्रत की सरल पूजा विधि
प्रदोष व्रत की पूजा शाम के समय करें। सबसे पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। घर के मंदिर में भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करें। शिवलिंग का अभिषेक दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से करें। शिवजी को बिल्व पत्र, धतूरा, आक के फूल और सफेद चंदन चढ़ाएं। माता पार्वती को सुहाग सामग्री अर्पित करें। इस दिन शिव-पार्वती को खीर और गुड़ का भोग लगाएं। रुद्राक्ष की माला से ॐ नमः शिवाय मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें। प्रदोष व्रत कथा पढ़ें या सुनें। अंत में शिव आरती करें और पूजा में हुई किसी भूल के लिए क्षमा मांगें।
व्रत के नियम और सावधानियां
व्रत सुबह से शुरू करें और शाम पूजा के बाद फलाहार से पारण करें। दिन भर सात्विक भोजन (फल, दूध, ड्राई फ्रूट्स) लें। क्रोध, झूठ और निंदा से दूर रहें। ब्रह्मचर्य का पालन करें। अगर निर्जला व्रत नहीं रख सकते हैं, तो फलाहार करें। पूजा में परिवार सहित शामिल हों तो फल कई गुना बढ़ता है।
साल का अंतिम प्रदोष व्रत 17 दिसंबर को रखकर भगवान शिव की कृपा प्राप्त करें। मान्यता है कि यह व्रत मनोकामनाएं पूरी करता है और जीवन में सुख-शांति लाता है।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
लेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




साइन इन