Shradh Day 4: Do Shradha at this Muhurta time on Chaturthi Pitru Paksha 2025 Vidhi Pitru Paksha चतुर्थी श्राद्ध कब करें, जानें इस दिन किसका होता है श्राद्ध, एस्ट्रोलॉजी न्यूज़ - Hindustan
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Pitru Paksha चतुर्थी श्राद्ध कब करें, जानें इस दिन किसका होता है श्राद्ध

Shradh Day 4, Pitru Paksha 2025: पितर की जिस तिथि को मृत्यु हुई है, उसी तिथि को विधि-विधान के साथ तर्पण किए जाने की धार्मिक मान्यता है। इससे पितर खुश होते हैं और परिवार पर किसी तरह का संकट नहीं आता है।

Wed, 10 Sep 2025 07:43 PMShrishti Chaubey लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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Pitru Paksha चतुर्थी श्राद्ध कब करें, जानें इस दिन किसका होता है श्राद्ध

Shradh Day 4: 11 सितंबर के दिन पितृपक्ष का चौथा दिन है। चतुर्थी श्राद्ध को चौथ श्राद्ध के नाम से भी जाना जाता है। पितर की जिस तिथि को मृत्यु हुई है, उसी तिथि को विधि-विधान के साथ तर्पण किए जाने की धार्मिक मान्यता है। इससे पितर खुश होते हैं और परिवार पर किसी तरह का संकट नहीं आता है। पितृ पक्ष की चतुर्थी तिथि पर कई लोग अपने पितरों का पिंडदान व श्राद्ध कर्म करेंगे। विधि-विधान के साथ जौ, चावल, काली तिल, पुष्प के साथ कुशा से बनी पइति के माध्य से तर्पण दिया जाता है। ऐसे में आइए जानते हैं पितृ पक्ष चतुर्थी पर श्राद्ध कर्म के लिए मुहूर्त व विधि-

चतुर्थी श्राद्ध कब करें

कृष्ण चतुर्थी आरम्भ: 03:37 पी एम, सितम्बर 10

कृष्ण चतुर्थी अन्त: 12:45 पी एम, सितम्बर 11

पितृपक्ष श्राद्ध सम्पन्न करने के लिए कुतुप, रौहिण आदि मुहूर्त देखा जाता है। अपराह्न काल समाप्त होने तक श्राद्ध सम्बन्धी अनुष्ठान सम्पन्न कर लेने चाहिये। श्राद्ध के अन्त में तर्पण किया जाता है।

कुतुप मुहूर्त - 11:53 ए एम से 12:42 पी एम

अवधि - 00 घण्टे 50 मिनट्स

रौहिण मुहूर्त - 12:42 पी एम से 01:32 पी एम

अवधि - 00 घण्टे 50 मिनट्स

अपराह्न काल - 01:32 पी एम से 04:02 पी एम

अवधि - 02 घण्टे 29 मिनट्स

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जानें इस दिन किसका होता है श्राद्ध

चतुर्थी श्राद्ध परिवार के उन मृतक सदस्यों के लिए किया जाता है, जिनकी मृत्यु चतुर्थी तिथि पर हुई हो। इस दिन शुक्ल पक्ष अथवा कृष्ण पक्ष दोनों ही पक्षों की चतुर्थी तिथि का श्राद्ध किया जा सकता है।

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तर्पण का महत्व: इन दिनों विधि विधान से अपने पित्तरों को जल तर्पण दिए जाते हैं। तर्पण एक ऐसी पूजा है, जो अपने पूर्वजों के लिए की जाती है। यह मौका व्यक्ति को साल में एक बार ही मिलता है। पूर्वजों की पंद्रह दिनों तक की गई पूजा से पूरे परिवार पर पित्तरों की कृपा बनी रहती है। पितृ दोष से मुक्ति मिल जाती है। पितृ दोष एक बड़ा दोष के रूप मे माना जाता है, जिसके प्रकोप से जीवन मे उथल-पुथल मचा रहता है। पितृ तर्पण के अलावा देवताओं, ॠषियों और यम को सर्व प्रथम तर्पण दी जाती है।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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