Sharad Purnima: सुबह 6:17 बजे से शरद पूर्णिमा का उत्तम मुहूर्त शुरू, 8 मुहूर्त में करें मां लक्ष्मी की पूजा
Sharad Purnima Timing 2025 Pooja: पूर्णिमा की तिथि माता लक्ष्मी को समर्पित है। इस बार 6 अक्टूबर के दिन शरद पूर्णिमा की पूजा की जाएगी। शरद पूर्णिमा पर 2 शुभ योग का निर्माण हो रहा है। जानें दिनभर के पूजा मुहूर्त, उपाय, मंत्र-

Sharad Purnima Timing: इस साल आश्विन महीने के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा के दिन शरद पूर्णिमा का व्रत रखा जाएगा। पूर्णिमा की तिथि मां लक्ष्मी को समर्पित है। इस बार 6 अक्टूबर को शरद पूर्णिमा की पूजा की जाएगी। शरद पूर्णिमा पर 2 शुभ योग का निर्माण हो रहा है। दोपहर 01:14 बजे तक वृद्धि योग रहेगा, जिसके बाद ध्रुव योग होगा। शरद पूर्णिमा के दिन विधि-विधान के साथ लक्ष्मी माता की पूजा करने से सुख-समृद्धि बनी रहती है। आइए जानते हैं दिन-भर के लक्ष्मी पूजन मुहूर्त, विधि, भोग, मंत्र व उपाय-
सुबह 6:17 बजे से शरद पूर्णिमा का उत्तम मुहूर्त शुरू
- अमृत - सर्वोत्तम 06:17 ए एम से 07:45 ए एम
- शुभ - उत्तम 09:13 ए एम से 10:41 ए एम
- चर - सामान्य 01:37 पी एम से 03:05 पी एम
- लाभ - उन्नति 03:05 पी एम से 04:33 पी एमवार वेला
- अमृत - सर्वोत्तम 04:33 पी एम से 06:01 पी एम
- चर - सामान्य 06:01 पी एम से 07:33 पी एम
- लाभ - उन्नति 10:37 पी एम से 12:09 ए एम, अक्टूबर 07
8 मुहूर्त में करें मां लक्ष्मी की पूजा
- ब्रह्म मुहूर्त- 04:39 ए एम से 05:28 ए एम
- अभिजित मुहूर्त- 11:45 ए एम से 12:32 पी एम
- विजय मुहूर्त- 02:06 पी एम से 02:53 पी एम
- गोधूलि मुहूर्त- 06:01 पी एम से 06:26 पी एम
- अमृत काल- 11:40 पी एम से 01:07 ए एम, अक्टूबर 07
- निशिता मुहूर्त- 11:45 पी एम से 12:34 ए एम, अक्टूबर 07
- प्रातः सन्ध्या- 05:03 ए एम से 06:17 ए एम
- सायाह्न सन्ध्या- 06:01 पी एम से 07:15 पी एम
शरद पूर्णिमा पर चांद निकलने का समय: 05:27 पी एम
उपाय- माता लक्ष्मी को खुश करने के लिए शरद पूर्णिमा के दिन श्री लक्ष्मी चालीसा का पाठ करें। वैवाहिक दिक्कतें दूर करने के लिए लक्ष्मी नारायण की जोड़े में पूजा करें और माता को शृंगार का समान भी चढ़ाएं।
पूजा-विधि
- पवित्र नदी में या पानी में गंगाजल मिलकर स्नान करें
- भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी का जलाभिषेक करें
- माता का पंचामृत सहित गंगाजल से अभिषेक करें
- अब मां लक्ष्मी को लाल चंदन, लाल रंग के फूल और श्रृंगार का सामान अर्पित करें
- मंदिर में घी का दीपक प्रज्वलित करें
- संभव हो तो व्रत रखें और व्रत रखने का संकल्प लें
- शरद पूर्णिमा की व्रत कथा का पाठ करें
- श्री लक्ष्मी सूक्तम का पाठ करें
- पूरी श्रद्धा के साथ भगवान श्री हरि विष्णु और लक्ष्मी जी की आरती करें
- माता को खीर का भोग लगाएं
- चंद्रोदय के समय चंद्रमा को अर्घ्य दें
- क्षमा प्रार्थना करें
भोग: सात्विक खीर, पंचामृत, ड्राई फ्रूइट्स, फल, सफेद मिठाई
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियां धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है।




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