Sakat Chauth Vrat Kab Hai 2026 Date, Puja Vidhi and Chand Nikalne Ka Samay सकट चौथ कब है? नोट कर लें सही डेट, पूजा विधि और चंद्रोदय टाइम, एस्ट्रोलॉजी न्यूज़ - Hindustan
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सकट चौथ कब है? नोट कर लें सही डेट, पूजा विधि और चंद्रोदय टाइम

Sakat Chauth Vrat Kab Hai 2026 : हर माह संकष्टी चतुर्थी पड़ती है। माघ महीने में पड़ने वाली संकष्टी चतुर्थी व्रत को सकट चौथ कहा जाता है। माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाई जाने वाली सकट चौथ को संतान की रक्षा और जीवन के संकटों से मुक्ति का खास व्रत माना जाता है। 

Sat, 27 Dec 2025 11:45 AMYogesh Joshi लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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सकट चौथ कब है? नोट कर लें सही डेट, पूजा विधि और चंद्रोदय टाइम

Sakat Chauth 2026: हर माह संकष्टी चतुर्थी पड़ती है। माघ महीने में पड़ने वाली संकष्टी चतुर्थी व्रत को सकट चौथ कहा जाता है। माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाई जाने वाली सकट चौथ को संतान की रक्षा और जीवन के संकटों से मुक्ति का खास व्रत माना जाता है। इस दिन भक्त गणेश जी की पूजा कर अपने बच्चों की लंबी उम्र, सुख और सुरक्षा की कामना करते हैं। सकट चौथ को तिलकुट चतुर्थी, लंबोदर संकष्टी चतुर्थी, माघी चौथ और माघ संकष्टी चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। इस व्रत में दिनभर उपवास रखा जाता है और रात को चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही व्रत पूरा किया जाता है। पूजा में गणेश जी को तिल और गुड़ से बने तिलकुट या लड्डू का भोग लगाया जाता है। सकट चौथ के दिन पूजा में दूर्वा, शमी पत्र, बेल पत्र, गुड़ और तिल के लड्डू चढ़ाए जाते है। यह व्रत संतान के जीवन में विघ्न, बाधाओं को हरता है। संकटों व दुखों को दूर करने वाला और रिद्धि-सिद्धि देने वाला है। सकट चौथ पर तिल का विशेष महत्व है। इसलिए भगवान गणेश को तिल के लड्डुओं का भोग जरूर लगाना चाहिए।

सकट चौथ 2026 की तारीख- पंचांग के अनुसार, माघ कृष्ण चतुर्थी तिथि की शुरुआत 6 जनवरी 2026 को सुबह 8 बजकर 01 मिनट से होगी, जो 7 जनवरी 2026 को सुबह 6 बजकर 52 मिनट तक रहेगी। ऐसे में सकट चौथ का व्रत 6 जनवरी 2026, मंगलवार को रखा जाएगा।

सकट चौथ पूजा का शुभ मुहूर्त

6 जनवरी को सकट चौथ की पूजा के लिए कई शुभ मुहूर्त बन रहे हैं—

पूजा का मुख्य मुहूर्त: सुबह 9:51 बजे से दोपहर 1:45 बजे तक

लाभ-उन्नति मुहूर्त: 11:09 AM से 12:27 PM

अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त: 12:27 PM से 1:45 PM

ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 5:26 बजे से 6:21 बजे तक

अभिजीत मुहूर्त: 12:06 PM से 12:48 PM

इन शुभ समयों में गणेश जी की पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।

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सकट चौथ पर चंद्रोदय का समय- सकट चौथ का व्रत चंद्र दर्शन के बाद ही खोला जाता है।

चंद्रोदय का समय: रात 8 बजकर 45 मिनट (देश के विभिन्न स्थानों में चंद्रोदय का समय अलग-अलग होता है)

कृष्ण पक्ष की चतुर्थी का चंद्रमा देर से निकलता है, इसलिए व्रती लोगों को चंद्र दर्शन के लिए थोड़ा इंतजार करना पड़ता है।

सकट चौथ पर प्रीति योग और नक्षत्र- सकट चौथ के दिन प्रीति योग बन रहा है, जो सुबह से लेकर रात 8:21 बजे तक रहेगा। इसके बाद आयुष्मान योग शुरू होगा। गणेश पूजा प्रीति योग में होगी और चंद्रमा को अर्घ्य आयुष्मान योग में दिया जाएगा। इस दिन अश्लेषा नक्षत्र सुबह से दोपहर 12 बजकर 17 मिनट तक रहेगा, उसके बाद मघा नक्षत्र लगेगा।

सकट चौथ का महत्व- सकट चौथ का व्रत खासतौर पर संतान की सुरक्षा, सुख और लंबी उम्र के लिए रखा जाता है। यह संकष्टी चतुर्थी भी है, जिसका व्रत जीवन के कष्ट और संकट दूर करता है और कार्यों में सफलता दिलाता है। इस व्रत को करने से परिवार में सुख-शांति आती है। मान्यता है कि जो लोग श्रद्धा से यह व्रत रखते हैं, उन पर भगवान गणेश की विशेष कृपा बनी रहती है।

सकट चौथ के दिन दिया जाता है चंद्रमा को अर्घ्य- शास्त्रों के अनुसार, चंद्रमा को औषधियों का स्वामी और मन का कारक माना जाता है। चंद्रदेव की पूजा के दौरान महिलाएं संतान के दीर्घायु और निरोगी होने की कामना करती हैं। चंद्रमा को अर्घ्य देने से सौभाग्य का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है।

इस विधि से दें अर्घ्य- चांदी के पात्र में पानी में थोड़ा सा दूध मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य देना चाहिए। संध्याकाल में चंद्रमा को अर्ध्य देना काफी लाभप्रद होता है। चंद्रमा को अर्घ्य देने से मन में आ रहे समस्त नकारात्मक विचार, दुर्भावना और स्वास्थ्य को लाभ मिलता है। चंद्रमा को अर्घ्य देने से चंद्र की स्थिति भी मजबूत होती है।

पूजा विधि- सकट चौथ के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करें। संभव हो तो इस दिन व्रत रखें। इसके बाद भगवान गणेश का गंगाजल से अभिषेक करें और उन्हें पुष्प अर्पित करें। पूजा के दौरान भगवान गणेश को दूर्वा घास जरूर चढ़ाएं, क्योंकि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दूर्वा अर्पित करने से गणेश जी शीघ्र प्रसन्न होते हैं। इसके बाद गणेश जी को सिंदूर लगाएं और ध्यान करें। भगवान को मोदक या लड्डू का भोग लगाएं। इस व्रत में चंद्र पूजा का भी विशेष महत्व होता है, इसलिए शाम को चंद्र दर्शन के बाद ही व्रत खोलें। अंत में भगवान गणेश की आरती जरूर करें।

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