rudravart kund sitapur belpatra sinks in water mystery of lord shiva भगवान शिव को समर्पित एक ऐसा रहस्यमय कुंड, जहां पानी में डूब जाता है बेलपत्र, विज्ञान भी है हैरान, एस्ट्रोलॉजी न्यूज़ - Hindustan
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भगवान शिव को समर्पित एक ऐसा रहस्यमय कुंड, जहां पानी में डूब जाता है बेलपत्र, विज्ञान भी है हैरान

रुद्रावर्त कुंड भगवान शिव का एक रहस्यमय स्थल है, जहां बेलपत्र पानी में डूब जाता है और दूध सीधी धारा बनाकर नीचे चला जाता है। नैमिषारण्य के पास स्थित इस कुंड में शिव स्वयं शिवलिंग रूप में विराजमान हैं। जानिए इस चमत्कारिक कुंड की पूरी कहानी, मान्यताएं और आध्यात्मिक महत्व।

Tue, 14 April 2026 08:12 PMNavaneet Rathaur लाइव हिन्दुस्तान
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भगवान शिव को समर्पित एक ऐसा रहस्यमय कुंड, जहां पानी में डूब जाता है बेलपत्र, विज्ञान भी है हैरान

उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में नैमिषारण्य के निकट स्थित रुद्रावर्त कुंड एक अनोखा और रहस्यमय स्थान है। गोमती नदी के किनारे बसा यह कुंड पहली नजर में साधारण-सा लगता है, लेकिन इसके अंदर छिपी दिव्य शक्ति आज भी विज्ञान को हैरान करती है। यहां भक्त जब सच्चे मन से बेलपत्र अर्पित करते हैं, तो वह पानी में तैरने की बजाय धीरे-धीरे डूब जाता है। स्थानीय मान्यता है कि इस कुंड में स्वयं भगवान शिव शिवलिंग रूप में विराजमान हैं।

रुद्रावर्त कुंड का पौराणिक महत्व

नैमिषारण्य को 88 हजार ऋषि-मुनियों की तपोभूमि कहा जाता है। इसी क्षेत्र में स्थित रुद्रावर्त कुंड को भगवान शिव का विशेष धाम माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, यहां भगवान शिव ने रुद्र रूप धारण कर त्रिपुरासुर का संहार किया था। इसी वजह से इस कुंड को रुद्रावर्त नाम मिला। भक्तों की मान्यता है कि इस कुंड में स्नान और पूजा करने से सभी प्रकार के पाप नष्ट हो जाते हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

बेलपत्र पानी में डूबने का चमत्कार

रुद्रावर्त कुंड की सबसे अनोखी बात यह है कि यहां अर्पित किया गया बेलपत्र पानी में डूब जाता है। आमतौर पर बेलपत्र पानी की सतह पर तैरता रहता है, लेकिन यहां यह सीधे नीचे चला जाता है। भक्त मानते हैं कि बेलपत्र सीधे शिवलिंग तक पहुंचता है। अगर बेलपत्र जरा सा भी टूटा या खंडित हो, तो वह नहीं डूबता। यह दृश्य देखकर कई लोग हैरान रह जाते हैं।

दूध की अनोखी धारा

बेलपत्र के अलावा, यहां दूध चढ़ाने का भी चमत्कार देखा जाता है। जब भक्त दूध अर्पित करते हैं, तो वह पानी में फैलने की बजाय एक सीधी धारा बनाकर नीचे की ओर जाता दिखाई देता है। सामान्य पानी में दूध तुरंत फैल जाता है, लेकिन यहां चीजें अलग होती हैं। स्थानीय लोग इसे भगवान शिव की प्रत्यक्ष उपस्थिति का प्रमाण मानते हैं।

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स्वयं शिवलिंग के रूप में विराजमान शिव

स्थानीय परंपरा और भक्तों की मान्यता है कि रुद्रावर्त कुंड में भगवान शिव स्वयं शिवलिंग के रूप में विराजमान हैं। इसलिए जो भी अर्पण किया जाता है, वह सीधे महादेव को प्राप्त होता है। यहां त्वचा संबंधी समस्याओं से मुक्ति और मनोकामना पूर्ति की मान्यता है।

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त्वचा रोगों में राहत और मनोकामना पूर्ति

रुद्रावर्त कुंड में स्नान करने और पूजा करने से त्वचा संबंधी समस्याओं में राहत मिलने की मान्यता है। भक्तों का विश्वास है कि यहां सच्चे मन से प्रार्थना करने पर सभी इच्छाएं पूरी होती हैं। इस कुंड के पानी में स्नान करने और बेलपत्र अर्पित करने से मानसिक शांति भी मिलती है।

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रुद्रावर्त कुंड सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आस्था और चमत्कार का जीवंत प्रमाण है। यहां आने वाले हर भक्त को भगवान शिव की उपस्थिति का अनुभव होता है। अगर आप भी सच्ची श्रद्धा रखते हैं, तो एक बार इस रहस्यमय कुंड के दर्शन जरूर करें।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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