रत्न शास्त्र: क्या आपने भी धारण किया है नीलम रत्न, नोट कर लें ये बातें, वरना मिलेगा अशुभ परिणाम
नीलम एक प्रभावशाली रत्न है और इसे हर व्यक्ति नहीं पहन सकता। इसे धारण करने से पहले कुंडली में शनि ग्रह की स्थिति का सही आकलन करना बेहद जरूरी होता है।

ज्योतिष शास्त्र में नीलम रत्न को शनि ग्रह का प्रतिनिधि माना जाता है। कहा जाता है कि जिन लोगों के लिए यह रत्न अनुकूल होता है, उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव दिखाई देने लगते हैं। कई बार लंबे समय से रुके हुए काम बनने लगते हैं और जीवन में आने वाली बाधाएं भी धीरे-धीरे कम होने लगती हैं। शनि ग्रह की स्थिति बदलने पर कुछ लोगों पर साढ़ेसाती और कुछ पर शनि की ढैय्या शुरू हो जाती है। ऐसे समय में नीलम रत्न को शनि के प्रभाव को संतुलित करने वाला माना जाता है। लेकिन इसे धारण करने के कुछ नियम है। इसे पहनने से पहले और पहनने के बाद कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। चलिए इसके बारे में जानते हैं।
कौन पहन सकता है नीलम
नीलम एक प्रभावशाली रत्न है और इसे हर व्यक्ति नहीं पहन सकता। इसे धारण करने से पहले कुंडली में शनि ग्रह की स्थिति का सही आकलन करना बेहद जरूरी होता है। बिना ज्योतिषीय सलाह के नीलम पहनना कई बार अशुभ परिणाम भी दे सकता है। यदि कुंडली में शनि का संबंध छठे, आठवें या बारहवें भाव से हो, तो ऐसे लोगों को नीलम पहनने से बचना चाहिए। भले ही उनकी राशि वृषभ, मकर या कुंभ ही क्यों न हो, लेकिन यदि शनि की स्थिति अनुकूल न हो तो यह रत्न नकारात्मक प्रभाव भी दे सकता है। इसलिए इसे पहनने से पहले ग्रह स्थिति की जांच बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
नीलम पहनने से पहले करें ये टेस्ट
जिन लोगों के लिए नीलम रत्न उपयुक्त माना जाता है, उन्हें इसे पहनने से पहले एक छोटा सा परीक्षण करना चाहिए। इसके लिए नीलम को एक साफ नीले कपड़े में लपेटकर रात को सोते समय तकिए के नीचे रख दें। इसके बाद उस रात आने वाले सपनों पर ध्यान दें। यदि सपने सामान्य और शांत हों तथा किसी प्रकार की घबराहट या डर महसूस न हो, तो इसे शुभ संकेत माना जाता है। ऐसे में नीलम धारण किया जा सकता है।
किस धातु में पहनें नीलम
नीलम रत्न को आमतौर पर सोने या व्हाइट गोल्ड की अंगूठी में जड़वाकर पहनना शुभ माना जाता है। कहा जाता है कि सही विधि से नीलम पहनने पर शनि ग्रह के दुष्प्रभाव कम हो सकते हैं। जिन लोगों पर शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या चल रही होती है, उनके लिए यह रत्न कई बार सहायक माना जाता है।
नीलम पहनने का सही दिन और समय
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार नीलम रत्न को शनिवार के दिन पहनना शुभ माना जाता है, क्योंकि यह ग्रह शनि से संबंधित है।
शनिवार शनि देव को समर्पित दिन माना जाता है।
हालांकि इसे धारण करते समय शुभ मुहूर्त का ध्यान रखना भी जरूरी है।
सामान्यतः शाम के समय नीलम पहनना अच्छा माना जाता है।
अंगूठी धारण करते समय शनिदेव के मंत्रों का जाप करना भी लाभकारी माना जाता है।
नीलम रत्न के लाभ
यदि नीलम आपके लिए अनुकूल हो, तो यह आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में सहायक माना जाता है।
नौकरी और व्यवसाय से जुड़े कार्यों में भी सकारात्मक परिणाम मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
इसके अलावा नीलम पहनने से मानसिक शांति मिलने और तनाव कम होने की भी मान्यता है।
कुछ लोगों को भय, बेचैनी या घबराहट जैसी समस्याओं से भी राहत मिलती है।
साथ ही व्यक्ति के स्वभाव में धैर्य और वाणी में मधुरता आने लगती है।
पहनने के बाद ना करें ये गलतियां
नीलम रत्न पहनने के बाद उसे बार-बार नहीं उतारना चाहिए। इसके अलावा तामसिक भोजन और शराब से परहेज करना चाहिए। इससे दुष्प्रभाव भी देखने पड़ते हैं। अक्सर लोग सोते समय, स्नान करते समय या व्यायाम करते समय अपने हाथों से अंगूठी में जड़ित रत्न को उतार देते हैं। जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं करना चाहिए। अपना पहना हुआ रत्न भी किसी मित्र या रिश्तेदार को ट्रायल के लिए कभी नहीं देना चाहिए।
डिस्क्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।




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