Quote of the Day: जन्म देने वाली मां के अलावा ये 4 स्त्रियां होती हैं मां समान, आचार्य चाणक्य से जानें इनके बारे में
चाणक्य नीति के अनुसार मां का दर्जा केवल जन्म देने वाली महिला तक सीमित नहीं है। उन्होंने पांच प्रकार की माताओं का उल्लेख किया है, जिनका सम्मान करना हर व्यक्ति का धर्म है।

आज 7 अप्रैल 2026 का यह सुविचार हमें मातृत्व की व्यापकता की याद दिलाता है। आचार्य चाणक्य ने कहा है कि हर व्यक्ति की एक नहीं, पांच माताएं होती हैं। उन्होंने मां के सम्मान को केवल जन्म देने वाली मां तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे और भी व्यापक रूप दिया। चाणक्य नीति का यह श्लोक आज भी प्रासंगिक है:
राजपत्नी गुरोः पत्नी मित्र पत्नी तथैव च।
पत्नी माता स्वमाता च पञ्चैता मातरः स्मृता।।
चाणक्य नीति में पांच माताओं का महत्व
चाणक्य के अनुसार मां का दर्जा केवल जन्म देने वाली महिला तक सीमित नहीं है। उन्होंने पांच प्रकार की माताओं का उल्लेख किया है, जिनका सम्मान करना हर व्यक्ति का धर्म है। यह श्लोक हमें सिखाता है कि सम्मान और कृतज्ञता का भाव केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि जीवन में आने वाली हर उस महिला के प्रति होना चाहिए जो हमें मार्गदर्शन, सुरक्षा या पालन-पोषण देती है।
पहली मां - राजा की पत्नी
चाणक्य कहते हैं कि जिस राजा या शासक पर प्रजा की रक्षा और पालन की जिम्मेदारी होती है, वह पिता के समान होता है। इसलिए उसकी पत्नी, यानी राजपत्नी को माता के समान सम्मान देना चाहिए। ऐसे में हर नागरिक को अपनी राजा या शासक की पत्नी को माता के समान सम्मान देना चाहिए।
दूसरी मां - गुरु की पत्नी
गुरु को पिता के समान माना जाता है क्योंकि वे ज्ञान, संस्कार और जीवन का सही मार्ग सिखाते हैं। ऐसे में गुरु की पत्नी को भी माता का दर्जा प्राप्त है। वे शिष्य के जीवन में मां जैसी भूमिका निभाती हैं। आचार्य चाणक्य कहते हैं कि गुरु पत्नी का सम्मान करना हर शिष्य का धर्म है।
तीसरी मां - मित्र पत्नी
भाई या मित्र की पत्नी को भाभी कहा जाता है। शास्त्रों और चाणक्य नीति में भाभी को भी माता के समान सम्मान देने की बात कही गई है। भाभी परिवार में मां जैसी देखभाल और मार्गदर्शन करती है। इसलिए भाभी का आदर करना हर व्यक्ति का कर्तव्य है।
चौथी मां - पत्नी की मां
पत्नी की मां यानी सास को भी चाणक्य माता का दर्जा देते हैं। सास परिवार में अनुभव, समझ और स्थिरता का प्रतीक होती है। उन्होंने अपनी बेटी को जन्म दिया और संस्कार दिए, इसलिए सास का सम्मान करना पत्नी के प्रति सम्मान का ही हिस्सा है।
पांचवी मां - स्वमाता
पांचवीं और सबसे महत्वपूर्ण मां वह है जिसने हमें जन्म दिया - हमारी अपनी मां। चाणक्य कहते हैं कि स्वमाता सबसे पूज्यनीय है, क्योंकि वह हमें जीवन देने वाली है। उसकी सेवा, सम्मान और देखभाल करना हर व्यक्ति का प्रथम धर्म है।
आज के समय में चाणक्य की यह नीति और भी प्रासंगिक हो जाती है। हम अक्सर केवल अपनी जन्मदात्री मां तक सम्मान सीमित कर देते हैं, जबकि चाणक्य हमें सिखाते हैं कि मातृत्व का भाव व्यापक होना चाहिए। राजपत्नी, गुरुपत्नी, भाभी और सास – इन सभी के प्रति सम्मान और कृतज्ञता रखने से समाज में सद्भाव और संस्कार बढ़ते हैं।




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