premanand maharaj on wasting water and electricity bad for our karma during latest ekantik vartalaap Premanand Maharaj: पानी और बिजली की बर्बादी से पुण्य नष्ट होता है? प्रेमानंद महाराज ने दिया ये जवाब, एस्ट्रोलॉजी न्यूज़ - Hindustan
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Premanand Maharaj: पानी और बिजली की बर्बादी से पुण्य नष्ट होता है? प्रेमानंद महाराज ने दिया ये जवाब

प्रेमानंद महाराज ने हाल ही में एकांतिक वार्तालाप के दौरान बताया है कि पानी और बिजली का दुरुपयोग करने से हमारे अच्छे कर्म खत्म हो जाते हैं। 

Sat, 18 April 2026 02:26 PMGarima Singh लाइव हिन्दुस्तान
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Premanand Maharaj: पानी और बिजली की बर्बादी से पुण्य नष्ट होता है? प्रेमानंद महाराज ने दिया ये जवाब

Premanand Maharaj Latest: वृंदावन के जाने माने संत प्रेमानंद महाराज अक्सर रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े सवालों को बहुत ही आसान भाषा में समझाते हैं। लोगों को आध्यात्म की राह पर चलने की समझ देने वाले प्रेमानंद महाराज रोज एकांतिक वार्तालाप करते हैं। यहां पर वो लोगों के सवाल का जवाब आमने-सामने होकर देते हैं। कई लोगों के मन में यह सवाल आता है कि क्या पानी और बिजली की बर्बादी करना सही है या नहीं? तो वहीं आपने ने भी ये कहीं ना कहीं देख या सुन लिया ही होगा कि इन चीजों का व्यर्थ करना मतलब अपने ग्रहों को खराब करना या फिर अपने कर्मों को खराब करना है लेकिन इस बात में कितनी सच्चाई है? इसे लेकर कन्फ्यूजन बना रहता है।

आज के समय में हम कई बार बिना सोचे-समझे इन चीजों का ज्यादा इस्तेमाल कर लेते हैं। धीरे-धीरे ये हमारी आदत बन जाती है और हम ध्यान ही नहीं देते कि हम कितना बेवजह खर्च कर रहे हैं। एक शख्स ने जब प्रेमानंद महाराज ने पूछा कि क्या बिजली और पानी की बर्बादी से हमारा पुण्य नष्ट होका है? तो सवाल पर प्रेमानंद महाराज ने जो जवाब दिया है वो जानने लायक है।

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प्रेमानंद महाराज ने दिया ये जवाब

प्रेमानंद महाराज ने कहा कि मान लो टोटी खुली है पानी की तो व्यर्थ में खुली मत रखो। वो किसी के काम आएगी। अगर व्यर्थ में आप पानी ले रहे हो तो टैक्स लग रहा है आपका भजन कट रहा है। आपके पुण्य नष्ट हो रहे हैं। व्यर्थ में लाइट मत जलाओ। अगर काम चल रहा है बिना लाइट के तो मत जलाओ। प्रकृति के वस्तु का जितना उपभोग करोगे। कोई भी हो। उतने ही तुम्हारे पुण्य नष्ट होंगे। तो प्रकृति का एक बूंद पानी भी फ्री नहीं है। इसका भी टैक्स है। एक बूंद पानी भी फ्री नहीं है इसलिए प्रकृति का उतना ही प्रयोग करो जितनी तुम्हें आवश्यकता हो नहीं तो तुम्हारे पुण्य नष्ट हो रहे हैं।

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ऐसे नष्ट होंगे हमारे पाप

प्रेमानंद महाराज ने आगे कहा कि ये हमारा सरकारी कानून है। जितना प्रकृति का भोग करोगे उतना ही तुम्हारे पुण्य नष्ट होंगे। अब जब पाप आएगा तो वही प्रकृति दंड देने वाली बन जाती है। वहीं फिर हमें बहुत दुख देती है। तो भजन करने वालों को जहां अहक उपासना कि मैं भजन करता हूं वहां इन बातों से बचना चाहिए।

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भगवान की शरण में जाना

महाराज ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि जो भगवान की शरण जाता है वो तो जोई-जोई प्यारौ करै सोई मोहि भावै। महलों में रखो चाहे झोपड़ी में वास दो। जैसी तुम्हारी मर्जी हो। हे नाथ मैं आपकी शरण में हूं। उनका भजन नहीं करता हूं। उनका भजन सीधा भगवान को प्राप्त कराता है।

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