मृत्यु क्या है और इससे डर क्यों लगता है? जानिए प्रेमानंद महाराजका जवाब
वृंदावन की गलियों में भक्ति का एक अलग ही रंग देखने को मिलता है। इन्हीं पावन गलियों के बीच बसे हैं प्रेमानंद महाराज, जिनके दर्शन के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु पहुंचते हैं।

वृंदावन की गलियों में भक्ति का एक अलग ही रंग देखने को मिलता है। इन्हीं पावन गलियों के बीच बसे हैं प्रेमानंद महाराज, जिनके दर्शन के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु पहुंचते हैं। उनकी सादगी, भक्ति और श्री राधा के प्रति गहरा प्रेम उन्हें लाखों लोगों के दिलों से जोड़ता है। उनके दर्शन के लिए फिल्मी सितारे, क्रिकेटर, राजनेता और आम लोग सभी पहुंचते हैं। दर्शन के साथ-साथ श्रद्धालु उनसे जीवन और आध्यात्म से जुड़े कई सवाल भी पूछते हैं। ऐसे ही एक भक्त ने उनसे पूछा, “मृत्यु क्या है और इससे डर क्यों लगता है?” चलिए जानते हैं इस पर प्रेमानंद महाराज जी ने क्या उत्तर दिया।
मृत्यु एक भ्रम है
इस सवाल का जवाब देते हुए प्रेमानंद महाराज जी कहते हैं कि मृत्यु एक भ्रम है और यह सत्य वस्तु नहीं है। महाराज जी कहते हैं कि पंचभूतों से रचित यह हमारा शरीर है। जब इसका अंतिम संस्कार होता है, तब अग्नि तत्व अग्नि में मिल गया। जल तत्व जल में, वायु तत्व वायु में, पृथ्वी तत्व पृथ्वी में, आकाश तत्व आकाश में मिल गया। अब बताइए इसमें मरा कौन। मरा नहीं ना। आत्मा अविनाशी चैतन्य धन है। उसको कोई मार सकता नहीं।
पंचभूत में मिल जाता है
महाराज जी कहते हैं कि आत्मा अच्छेद है। अकलेध्य है, अशोष्य है, अदाय है। शरीर पंचभूत, पंचभूत में मिल गए। आत्म तत्व अंतर्ध्य हो गया और मरा कोई नहीं। हमने इस शरीर को अपना मान लिया है। मैं स्त्री, मैं पुरुष। इसमें नीयत समय तक रहना है। 50, 80 और 100 वर्ष। इसके बाद हट जाना है। इस शरीर से हट जाना ही मरण कहा जाता है। दूसरे शरीर को प्राप्त करना जन्म कहा जाता है। लेकिन जनम और मरण का अस्तित्व नहीं है। भ्रम है। जब आप जन्म स्वीकार करते हैं, तो मृत्यु भी स्वीकार करनी पड़ेगी।
भ्रम मिटा दो
महाराज जी कहते हैं कि ना जन्म है और ना मृत्यु है, तो एक भ्रम चल रहा है। इसी भ्रम को मिटा दो। वो आगे कहते हैं कि भगवान के चरणों का आश्रय लेकर भजन के बल से भ्रम मिटा दो। तो जो मैं तत्व है उसमें किसी की भी दाल नहीं गल सकती है। ना काल की, ना मृत्यु की, ना अस्त्र की, ना शस्त्र की। शरीरा का राग छूट गया, वो जीवन मुक्त हो गया। मृत्यु ट्रांसफर है। महाराज जी कहते हैं कि आत्मा तो एक ही है। अनेक शरीर दिखाई दे रहे हैं। जैसे सूर्य एक है और घड़े करोड़ों रखे हुए हो, तो करोड़ सूर्य भासते हैं। सूर्य तो एक है। ऐसे ही परमात्मा, जिसे आत्मा कहते हैं, वो एक है।
डिस्क्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।




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