Pongal Lohri Khichdi Why and in what forms is Makar Sankranti celebrated across the country know Features and significan पोंगल, लोहड़ी, खिचड़ी...देशभर में क्यों और किस रूप में मनाई जाती है मकर संक्रांति, जानें पर्व से जुड़ी खास बातें, एस्ट्रोलॉजी न्यूज़ - Hindustan
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पोंगल, लोहड़ी, खिचड़ी...देशभर में क्यों और किस रूप में मनाई जाती है मकर संक्रांति, जानें पर्व से जुड़ी खास बातें

मकर संक्रांति एक ऐसा पर्व है पूरे भारत में अलग-अलग राज्यों में कई नामों और कई तरीकों से मनाया जाता है। उत्तर भारत में इसे मकर संक्रांति कहा जाता है, तो यही तमिलनाडु में पोंगल के नाम से जाना जाता है, जबकि गुजरात में इसे उत्तरायण कहते हैं।

Sun, 21 Dec 2025 08:00 PMDheeraj Pal लाइव हिन्दुस्तान
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पोंगल, लोहड़ी, खिचड़ी...देशभर में क्यों और किस रूप में मनाई जाती है मकर संक्रांति, जानें पर्व से जुड़ी खास बातें

भारत में कई महत्वपूर्ण त्योहार बड़े ही धूम धाम और पारंपरिक तरीके से मनाए जाते हैं। इन्हीं में से एक पर्व है मकर संक्रांति। हर साल पौष शुक्ल पक्ष में मकर संक्रांति पर्व मनाया जाता है। इस दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है और तभी से सूर्य उत्तरायण हो जाता है। उत्तरायन अर्थात उस समय से धरती का उत्तरी गोलार्द्ध सूर्य की ओर मुड़ जाता है, तो उत्तर ही से सूर्य निकलने लगता है। इसे सोम्यायन भी कहते हैं।

यह एक ऐसा पर्व है पूरे भारत में अलग-अलग राज्यों में कई नामों और कई तरीकों से मनाया जाता है। उत्तर भारत में इसे मकर संक्रांति कहा जाता है, तो यही तमिलनाडु में पोंगल के नाम से जाना जाता है, जबकि गुजरात में इसे उत्तरायण कहते हैं। असम में इसे माघी बिहू कहते हैं और कर्नाटक में सुग्गी हब्बा, केरल में मकरविक्लु कहा जाता है तो कश्मीर में शिशुर सेंक्रांत के नाम से जाना जाता है। इस दिन से वसंत ऋतु की भी शुरुआत होती है और यह पर्व संपूर्ण अखंड भारत में फसलों के आगमन की खुशी के रूप में मनाया जाता है। चलिए जानते हैं कि मकर संक्रांति के पर्व को कैसे और किस रूप से मनाते हैं।

पोंगल

तमिलनाडु में मकर संक्रांति का त्योहार पोंगल के रूप में मनाया जाता है। यह खासतौर पर किसानों का पर्व है। यह उत्सव लगभग 4 दिन तक चलता है। लेकिन मुख्य पर्व पौष मास की प्रतिपदा को मनाया जाता है। पोंगल के पहले अमावस्या को लोग बुरी रीतियों का त्यागकर अच्छी चीजों को ग्रहण करने की प्रतिज्ञा करते हैं। यह कार्य 'पोही' कहलाता है और जिसका मतलब है- ‘जाने वाली।’

लोहड़ी

पंजाब और हरियाणा में मकर संक्रांति को लोहड़ी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन अग्नि देव की पूजा की जाती है। पारंपारिक तौर पर देखें तो यह पर्व रबी फसल की कटाई से जुड़ा है। लोहड़ी के दिन शाम के समय सभी लोग लोहड़ी का चारें तरफ नाचते हैं। लोहड़ी के दिन शाम के समय सभी लोग आग जलाकर अग्नि के चारों तरफ चक्कर लगाते हुए नाचते और गाते हैं। इस दौरान अग्नि में तिल, रेवड़ी, गुड़ और गजक आदि चीजें डालते हैं। साथ ही इस दिन रबी की फसल को भी आग में समर्पित किया जाता है। साथ ही अग्नि देव और सूर्य देव को धन्यवाद दिया जाता है। इस दौरान कुछ लोग लड्डू भी बांटते हैं। इस दिन कई लोग पतंग भी उड़ाते हैं।

बिहू पर्व

असम में बिहु के पर्व को बेहद उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस त्योहार को असम के लोग पूरे सात दिनों तक मनाते हैं। इस पर्व में कई तरह के पकवान बनाए जाते हैं, जिन्हें भगवान को अर्पित किया जाता है। यह एक वर्ष में यह त्योहार तीन बार मनाते हैं। पहला सर्दियों के मौसम में पौष संक्रांति के दिन, दूसरा विषुव संक्राति के दिन और तीसरा कार्तिक माह में मनाया जाता है।

पतंग महोत्सव

गुजरात सहित कई राज्यों में मकर संक्रांति के पर्व को 'पतंग महोत्सव' के नाम से भी जाना जाता है। पतंग उड़ाने के पीछे मुख्य कारण है कुछ घंटे सूर्य के प्रकाश में बिताना।

संक्रांति उत्सव

कर्नाटक, केरल तथा आंध्र प्रदेश में इसे केवल संक्रांति ही कहते हैं। इस दिन पवित्र नदी में स्नान करने का, तिल-गुड़ खाने का तथा सूर्य को अर्घ्य देने का महत्व है। यह दिन दान और आराधना के लिए महत्वपूर्ण है। मकर संक्रांति से सभी तरह के रोग और शोक मिटने लगते हैं।

खिचड़ी

उत्तर प्रदेश और बिहार में मकर संक्रांति को खिचड़ी के रूप में जानते हैं। क्योंकि इस दिन खिचड़ी बनाकर खाने और दान करने की परंपरा है। मान्यता है कि खिचड़ी नवग्रहों को संतुलित करने और शुभ फल प्राप्त करने का प्रतीक है। खिचड़ी बनाकर इसे सूर्य देवता को अर्पित किया जाता है, फिर इसे ब्राह्मणों को दान देकर अपने भोजन में शामिल किया जाता है। यह परंपरा अन्नदान और परोपकार का संदेश भी देती है।

विदेशों में भी मनाया जाता है यह पर्व

मकर संक्रांति के पर्व को बांग्लादेश में पौष संक्रान्ति, नेपाल में माघे संक्रान्ति या खिचड़ी संक्रान्ति, थाईलैंड में सोंगकरन, लाओस में पि मा लाओ, म्यांमार में थिंयान, कम्बोडिया में मोहा संगक्रान और श्री लंका में पोंगल एवं उझवर तिरुनल के रूप में मनाते हैं।

14 या 15 को क्यों मनाया जाता है संक्रांति

मकर संक्रांति एक ऐसा त्योहार है जो धरती की तुलना में सूर्य की स्थिति के हिसाब से मनाया जाता है, यही वजह है कि चंद्रमा की स्थिति में मामूली हेरफेर की वजह से यह कभी 14 जनवरी को होता है तो कभी 15 को, लेकिन सूर्य की मुख्य भूमिका होने की वजह से अंग्रेजी तारीख नहीं बदलती है।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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