31 दिसंबर की दोपहर को इतने बजे से पौष पुत्रदा एकादशी व्रत पारण का मुहूर्त शुरू, जानें क्या खाकर करें पारण
Paush Putrada Ekadashi 2025 paran muhurat time vidhi: मान्यताओं की मानें तो पौष पुत्रदा एकादशी का व्रत रखने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है। वहीं, पौष पुत्रदा एकादशी की पूजा ही नहीं पारण का भी मुहूर्त देखा जाता है।

पौष पुत्रदा एकादशी 2025: आज विष्णु भक्त पौष पुत्रदा एकादशी का व्रत रखेंगे और भगवान की उपासना करेंगे। धार्मिक मान्यताओं की मानें तो पौष पुत्रदा एकादशी का व्रत रखने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है। वहीं, पौष पुत्रदा एकादशी की पूजा ही नहीं पारण का भी मुहूर्त देखा जाता है। आइए जानते हैं कब होगा पौष पुत्रदा एकादशी व्रत का पारण व विधि-
31 दिसंबर की दोपहर को इतने बजे से पौष पुत्रदा एकादशी व्रत पारण का मुहूर्त शुरू, जानें क्या खाकर करें पारण
पौष पुत्रदा एकादशी व्रत पारण का शुभ मुहूर्त- पौष महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का व्रत पारण 31 दिसंबर को किया जाएगा। इस दिन पारण (व्रत तोड़ने का) शुभ समय दोपहर में 01:26 पी एम से 03:31 मिनट तक रहेगा। पारण तिथि के दिन हरि वासर समाप्त होने का समय सुबह 10 बजकर 12 मिनट रहेगा।
कुछ जातक 31 दिसंबर को व्रत रखेंगे, उनका व्रत पारण 1 जनवरी के दिन होगा। 1 जनवरी 2026 को व्रत तोड़ने का शुभ मुहूर्त सुबह में 07:14 मिनट से 09:18 मिनट तक रहेगा। इस दिन द्वादशी सूर्योदय से पहले समाप्त हो जाएगी।
पौष पुत्रदा एकादशी का व्रत पारण कैसे करें?
- स्नान आदि कर साफ वस्त्र धारण करें
- भगवान श्री हरि विष्णु का जलाभिषेक करें
- प्रभु का पंचामृत सहित गंगाजल से अभिषेक करें
- अब प्रभु को पीला चंदन और पीले पुष्प अर्पित करें
- मंदिर में घी का दीपक प्रज्वलित करें
- ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें
- पूरी श्रद्धा के साथ भगवान श्री हरि विष्णु और लक्ष्मी जी की आरती करें
- प्रभु को तुलसी सहित भोग लगाएं
- अंत में व्रत संकल्प पूर्ण करें व क्षमा प्रार्थना करें
क्या खाकर करें पौष पुत्रदा एकादशी व्रत का पारण?
पौष पुत्रदा एकादशी व्रत का पारण पूजा-पाठ करने के बाद भगवान विष्णु को अर्पित किए गए प्रसाद को ग्रहण करके करना उत्तम माना जाता है।
व्रत पारण के समय ध्यान रखें ये बातें- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी व्रत के अगले दिन सूर्य के उदय होने के बाद पारण किया जाता है। पौष पुत्रदा एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले करना जरूरी माना जाता है। अगर द्वादशी तिथि सूर्योदय से पहले समाप्त हो जाती है तो पौष पुत्रदा एकादशी व्रत का पारण सूर्योदय के बाद ही किया जाता है। द्वादशी तिथि के भीतर पारण न करना शुभ नहीं माना जाता है। पौष पुत्रदा एकादशी व्रत का पारण हरि वासर के दौरान भी नहीं करना चाहिए। जो विष्णु भक्त व्रत कर रहे हैं, उन्हें व्रत तोड़ने से पहले हरि वासर समाप्त होने का इंतजार करना चाहिये। हरि वासर द्वादशी तिथि की पहली एक चौथाई अवधि मानी जाती है। व्रत तोड़ने के लिए सबसे शुभ समय प्रातः काल का होता है। कुछ कारणों की वजह से अगर कोई प्रातः काल पारण करने में सक्षम नहीं है तो उसे मध्याह्न के बाद पारण करना चाहिए।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियां मान्यताओं पर आधारित हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।




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