Paush Putrada Ekadashi 2025: Date, Puja Vidhi, Shubh Muhurat, Upay and Daan Paush Putrada Ekadashi: पौष पुत्रदा एकादशी कल, नोट कर लें पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, उपाय, दान से लेकर सबकुछ, एस्ट्रोलॉजी न्यूज़ - Hindustan
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Paush Putrada Ekadashi: पौष पुत्रदा एकादशी कल, नोट कर लें पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, उपाय, दान से लेकर सबकुछ

Paush Putrada Ekadashi 2025: हिंदू धर्म में एकादशी को बहुत खास माना जाता है। पौष महीने के शुक्ल पक्ष में जो एकादशी पड़ती है उसे पौष पुत्रदा एकादशी के नाम से जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस एकादशी को खास तौर पर संतान सुख और बच्चों की भलाई के लिए शुभ माना जाता है।

Mon, 29 Dec 2025 02:14 PMYogesh Joshi लाइव हिन्दुस्तान
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Paush Putrada Ekadashi: पौष पुत्रदा एकादशी कल, नोट कर लें पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, उपाय, दान से लेकर सबकुछ

Paush Putrada Ekadashi: हिंदू धर्म में एकादशी को बहुत खास माना जाता है। पौष महीने के शुक्ल पक्ष में जो एकादशी पड़ती है उसे पौष पुत्रदा एकादशी के नाम से जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस एकादशी को खास तौर पर संतान सुख और बच्चों की भलाई के लिए शुभ माना जाता है। मान्यता है कि यह व्रत करने से न सिर्फ भगवान की कृपा मिलती है, बल्कि घर-परिवार में सुख, शांति और खुशहाली भी बनी रहती है। हिंदू पंचांग के अनुसार, पौष महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी 30 दिसंबर 2025 को सुबह 7:50 बजे शुरू होगी और 31 दिसंबर 2025 को सुबह 5:00 बजे समाप्त होगी। हिंदू धर्म में व्रत और पूजा सूर्योदय की तिथि यानी उदयातिथि के हिसाब से की जाती है। इसलिए पौष पुत्रदा एकादशी का व्रत 30 दिसंबर 2025 को ही रखा जाएगा।

पौष पुत्रदा एकादशी का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पौष पुत्रदा एकादशी का व्रत संतान की इच्छा रखने वाले दंपतियों के लिए बहुत फलदायी माना गया है। इसका ज़िक्र विष्णु पुराण और पद्म पुराण में भी मिलता है।कहा जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु की सच्चे मन से पूजा करने, व्रत रखने और दान करने से संतान सुख मिलता है। जिनके पहले से बच्चे हैं, उनके लिए यह व्रत बच्चों के अच्छे स्वास्थ्य, लंबी उम्र और उज्ज्वल भविष्य के लिए लाभकारी माना जाता है। इस व्रत में मन, वाणी और कर्म- तीनों से पवित्र रहना जरूरी होता है। पूरे मन से भगवान विष्णु की आराधना करने से जीवन की परेशानियां भी धीरे-धीरे दूर होती हैं।

दान का महत्व

दान सिर्फ अपने लिए सुख पाने का साधन नहीं है, बल्कि यह समाज और आत्मा- दोनों की उन्नति का रास्ता है। पौष पुत्रदा एकादशी पर किया गया दान खास फल देता है। भागवत पुराण के अनुसार, शुभ दिन पर किया गया दान बड़ा पुण्य देता है और मोक्ष का मार्ग आसान करता है। शास्त्रों में कहा गया है कि एकादशी के दिन ब्राह्मणों, गरीबों, असहाय और जरूरतमंद लोगों की मदद करने से कभी खत्म न होने वाला पुण्य मिलता है।

शास्त्रों में यह भी कहा गया है कि दान से धर्म और पुण्य की प्राप्ति होती है और पुत्रदा एकादशी पर किया गया दान बहुत शुभ होता है। दान करते समय सबसे जरूरी चीज होती है भावना की शुद्धता। अगर दान दिल से, अच्छे मन और सही नीयत से किया जाए, तो भगवान की विशेष कृपा जरूर मिलती है।

पौष पुत्रदा एकादशी पर क्या दान करें?

इस दिन अन्न दान को सबसे अच्छा माना गया है। अन्न दान करने से विशेष पुण्य मिलता है।

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पूजा विधि: एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद घर के मंदिर या पूजा स्थान को साफ करें। भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर के सामने दीपक जलाएं और मन में व्रत का संकल्प लें। पूजा के समय तुलसी के पत्ते जरूर चढ़ाएं, क्योंकि भगवान विष्णु को तुलसी अत्यंत प्रिय होती है। इसके बाद भगवान विष्णु को फूल, फल, धूप और दीप अर्पित करें। “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें या विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। अगर पूरा पाठ संभव न हो, तो श्रद्धा से विष्णु चालीसा या नाम स्मरण भी किया जा सकता है। पूजा के दौरान मन को शांत रखें और भगवान से परिवार की सुख-शांति, संतान सुख और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करें।

दिन भर व्रत रखें या फलाहार करें और जितना हो सके, क्रोध, झूठ और नकारात्मक सोच से दूर रहें। शाम के समय फिर से भगवान विष्णु की आरती करें और जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र या अपनी क्षमता अनुसार दान दें। एकादशी का व्रत अगले दिन द्वादशी तिथि पर ब्राह्मण या जरूरतमंद को भोजन कराकर और भगवान को भोग लगाकर खोला जाता है।

एकादशी व्रत का पारण ऐसे करें: एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि में किया जाता है। पारण हमेशा सूर्योदय के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले करना शुभ माना जाता है। पारण से पहले स्नान कर लें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद भगवान विष्णु की पूजा करें, दीपक जलाएं और उन्हें भोग लगाएं। पारण के समय सबसे पहले तुलसी दल या चरणामृत लेना अच्छा माना जाता है। इसके बाद हल्का और सात्विक भोजन ग्रहण करें। आमतौर पर दूध, फल, साबूदाना, मिठाई या सादा भोजन से पारण किया जाता है। बहुत भारी, तला-भुना या मसालेदार खाना पारण के समय नहीं खाना चाहिए।

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व्रत पारण का समय-

पारण (व्रत तोड़ने का) समय - 31 दिसंबर को 01:26 पी एम से 03:31 पी एम तक

पारण तिथि के दिन हरि वासर समाप्त होने का समय - 10:12 ए एम

उपाय: एकादशी के दिन सुबह स्नान के बाद भगवान विष्णु को तुलसी के पत्ते चढ़ाएं और “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का 11 या 21 बार जप करें।

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