Paush Amavasya 2025 Time On December 19 Pooja Amavasya Muhurat Amavasya Ke Upay 19 दिसंबर को पौष अमावस्या पर 3 उत्तम मुहूर्त में करें स्नान, दान, पूजा, जानें पूजा की विधि और उपाय, एस्ट्रोलॉजी न्यूज़ - Hindustan
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19 दिसंबर को पौष अमावस्या पर 3 उत्तम मुहूर्त में करें स्नान, दान, पूजा, जानें पूजा की विधि और उपाय

Paush Amavasya 2025 Time: अमावस्या के दिन किए गए स्नान, दान और तर्पण से सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। ​वैदिक पंचांग और उदयातिथि के नियमानुसार, व्रत, और स्नान-दान 19 दिसंबर शुक्रवार को ही किए जाएंगे।

Wed, 17 Dec 2025 07:32 PMShrishti Chaubey लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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19 दिसंबर को पौष अमावस्या पर 3 उत्तम मुहूर्त में करें स्नान, दान, पूजा, जानें पूजा की विधि और उपाय

Paush Amavasya 2025 Time: इस साल पौष मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या शुक्रवार को है। ये दिन सूर्य उपासना के लिए अत्यंत शुभ फलदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन किए गए स्नान, दान और तर्पण से पूर्वज अपने वंशजों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करते हैं। ​वैदिक पंचांग और उदयातिथि के नियमानुसार, व्रत, धार्मिक कार्य, और स्नान-दान 19 दिसंबर शुक्रवार को ही किए जाएंगे। 19 दिसंबर को 04:59 ए एम से अमावस्या तिथि शुरू होगी और 20 दिसंबर को 07:12 ए एम पर खत्म होगी। ​पौष अमावस्या पर स्नान और दान का विशेष महत्व है, जिसके लिए कुछ मुहूर्त बेहद शुभ माने जाते हैं। आइए जानते हैं दिसंबर में अमावस्या पर स्नान, दान व पूजा मुहूर्त-

19 दिसंबर को पौष अमावस्या पर 3 उत्तम मुहूर्त में करें स्नान, दान, पूजा

ब्रह्म मुहूर्त में स्नान, दान और पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 05 बजकर 19 मिनट से 06 बजकर 14 मिनट तक है। ​लाभ मुहूर्त सुबह 08 बजकर 26 मिनट से 09 बजकर 43 मिनट तक रहेगा, जबकि ​अभिजीत मुहूर्त पर दान-पुण्य का शुभ मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 58 मिनट से 12 बजकर 39 मिनट तक किया जाना शुभ रहेगा। ​

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उपाय- पौष अमावस्या के दिन किसी जरूरतमंद को वस्त्र, फल आदि का दान करें।

पूजा-विधि: सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर घर पर ही स्नान करें। यदि संभव हो, तो नहाने के जल में गंगाजल या पास के किसी पवित्र नदी में स्नान करें। स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें और सूर्य देव को तांबे के लोटे में जल, लाल फूल और तिल मिलाकर ऊँ सूर्याय नमः मंत्र के साथ अर्घ्य दें। इसके बाद किसी शांत और पवित्र स्थान पर बैठकर अपने पितरों के निमित्त तर्पण करें। इसके लिए कुश और काले तिल का प्रयोग करना शुभ माना जाता है। शाम के समय पीपल के वृक्ष की पूजा करें और उसके नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं। पीपल में त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु, महेश का वास माना जाता है, जिनकी पूजा अति फलदायी है। संध्या काल में अपने घर की दक्षिण दिशा में यमराज के निमित्त एक दीपक जलाना शुभ होता है। इससे पितरों की आत्मा को शांति मिलती है।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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