हस्तरेखा शास्त्र: हथेली के इन 5 जगहों पर क्रॉस का निशान देता है अनहोनी के संकेत, जानें इससे बचाव के उपाय
हस्तरेखा में क्रॉस का निशान अक्सर अनोहनी का संकेत देता है। शनि पर्वत, मणिबंध, चंद्र पर्वत, मस्तिष्क रेखा और जीवन रेखा पर क्रॉस के अशुभ फल एवं बचाव के वास्तु-ज्योतिष उपाय जानिए।

हस्तरेखा शास्त्र में रेखाओं के साथ-साथ विभिन्न चिह्नों का भी विशेष महत्व होता है। इनमें क्रॉस का चिह्न काफी गंभीर माना जाता है। क्रॉस दो रेखाओं के एक-दूसरे को काटने से बनता है और यह जीवन में किसी विशेष घटना या संकट का संकेत देता है। यदि यह क्रॉस हथेली के किसी प्रमुख पर्वत या महत्वपूर्ण रेखा पर स्थित हो, तो यह अशुभ फल दे सकता है। कई बार यह अनोहनी (अप्रत्याशित दुर्घटना या संकट) का पूर्व संकेत भी होता है। आइए जानते हैं हथेली के उन 5 खास स्थानों पर क्रॉस का निशान क्या संकेत देता है और इससे बचाव के उपाय क्या हैं।
शनि पर्वत पर क्रॉस - संघर्ष और अकाल मृत्यु का संकेत
शनि पर्वत (मध्यमा उंगली के नीचे) पर क्रॉस होना बहुत गंभीर माना जाता है। यह दर्शाता है कि व्यक्ति को उसके अच्छे कर्मों का पूरा फल नहीं मिल पाता है। जीवन और करियर में बार-बार बाधाएं, संघर्ष और सामाजिक बदनामी का सामना करना पड़ सकता है। कुछ मामलों में कारावास या मान-सम्मान की हानि भी होती है। शनि पर्वत पर क्रॉस अकाल मृत्यु की आशंका को भी बढ़ाता है।
बचाव का उपाय: शनिवार को शनि मंदिर में तेल का दीपक जलाएं। 'ॐ शं शनैश्चराय नमः' मंत्र का जाप करें। काले तिल और सरसों का दान करें।
मणिबंध पर क्रॉस - बाल्यावस्था में कष्ट का संकेत
मणिबंध (कलाई) के ऊपर, जीवन रेखा की शुरुआत में क्रॉस होना अशुभ है। यह जीवन की शुरुआत में ही बड़े कष्ट, गंभीर बीमारी या दुर्घटना का संकेत देता है। हस्तरेखा विशेषज्ञ इसे बाल्यावस्था में स्वास्थ्य संकट या अकाल मृत्यु से जोड़कर देखते हैं।
बचाव का उपाय: जीवन रेखा की रक्षा के लिए हनुमान चालीसा का नियमित पाठ करें। लाल मूंगा धारण करें और मंगलवार को हनुमान जी को सिंदूर चढ़ाएं।
चंद्र पर्वत पर क्रॉस - भावनात्मक अस्थिरता और जल आपदा
चंद्र पर्वत (हथेली के नीचे बाएं भाग) पर क्रॉस व्यक्ति की भावुक प्रकृति को दर्शाता है। ऐसे लोगों को जीवन में भ्रम, धोखा और मानसिक असंतुलन की समस्या रहती है। ऐसे लोगों को विदेश यात्रा या जल से संबंधित दुर्घटना की आशंका बढ़ जाती है।
बचाव का उपाय: सोमवार को चंद्रमा की पूजा करें। चांदी का गिलास या चंद्र यंत्र धारण करें। 'ॐ सोम सोमाय नमः' मंत्र का जाप करें।
मस्तिष्क रेखा पर क्रॉस - मानसिक तनाव और चोट का खतरा
मस्तिष्क रेखा (Head Line) पर क्रॉस बनना मानसिक स्वास्थ्य के लिए खतरे का संकेत है। ऐसे व्यक्ति बार-बार मानसिक तनाव, डिप्रेशन या दिमागी चोट का शिकार हो सकते हैं। ऐसे लोगों को वाहन चलाते समय सावधानी बरतनी चाहिए।
बचाव का उपाय: भगवान गणेश की पूजा करें। 'ॐ गं गणपतये नमः' मंत्र का जाप करें। हरे रंग के पत्थर (पन्ना) धारण करें और ध्यान-योग का अभ्यास करें।
जीवन रेखा पर क्रॉस - जीवन संकट और दुर्घटना का संकेत
जीवन रेखा पर गहरा क्रॉस अत्यंत अशुभ माना जाता है। यह गंभीर रोग, दुर्घटना या जीवन को छोटा करने वाले संकट का संकेत देता है। यदि जीवन रेखा टूटी हुई भी हो तो प्रभाव और बढ़ जाता है।
बचाव का उपाय: जीवन रेखा की रक्षा के लिए हनुमान जी की उपासना करें। रोज सुबह 'ॐ हं हनुमते नमः' मंत्र का 108 बार जाप करें। लाल धागा या रक्षा कवच धारण करें।
हस्तरेखा शास्त्र में क्रॉस का निशान हमेशा चेतावनी का प्रतीक होता है। यदि हथेली पर ऊपर बताए गए स्थानों पर क्रॉस है, तो घबराएं नहीं। समय रहते ज्योतिषीय उपाय अपनाकर इन अशुभ प्रभावों को कम किया जा सकता है। अपनी हथेली का विश्लेषण किसी अनुभवी हस्तरेखा विशेषज्ञ से करवाएं और समय पर उपाय शुरू करें।




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