मोक्षदा एकादशी और गीता जयंती आज, नोट कर लें पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, उपाय, मंत्र से लेकर सबकुछ
मार्गशीष शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली मोक्षदा एकादशी विशेष फल देने वाली मानी जाती है। इस बार एकादशी तिथि का शुभारंभ 30 नवंबर रात्रि 9:28 से हो रहा है जो एक दिसंबर सोमवार शाम सात बजे तक रहेगा। उदया तिथि की प्रधानता के अनुसार मोक्षदा एकादशी एक दिसंबर सोमवार को मनाई जाएगी।

मार्गशीष शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली मोक्षदा एकादशी विशेष फल देने वाली मानी जाती है। इस बार एकादशी तिथि का शुभारंभ 30 नवंबर रात्रि 9:28 से हो रहा है जो एक दिसंबर सोमवार शाम सात बजे तक रहेगा। उदया तिथि की प्रधानता के अनुसार मोक्षदा एकादशी एक दिसंबर सोमवार को मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन व्रत करने से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है। एकादशी का पर्व भगवान विष्णु को समर्पित होता है। एकादशी पर विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना की जाती है। मोक्षदा एकादशी पर ही गीता जयंती भी मनाई जाती है।
मोक्षदा एकादशी 2025: तिथि और शुभ मुहूर्त
एकादशी तिथि प्रारंभ: 30 नवंबर 2025, रात 9:29 बजे
एकादशी तिथि समाप्त: 1 दिसंबर 2025, शाम 7:01 बजे
व्रत पारण: 2 दिसंबर 2025, सुबह 6:57 बजे से 9:03 बजे तक
इस दिन भद्रा सुबह 8:20 बजे से शाम 7:01 बजे तक रहेगी, जबकि पंचक सुबह 6:56 से रात 11:18 बजे तक रहेगा।
मोक्षदा एकादशी पूजा विधि: मोक्षदा एकादशी के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और हल्के, स्वच्छ कपड़े पहनें। सबसे पहले व्रत का संकल्प लें। पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करने के बाद भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें और दीपक जलाएं। विष्णु भगवान को पीले फूल, तुलसी दल, पंचामृत, केले और पीली मिठाई का भोग लगाएं। दिनभर सात्त्विकता बनाए रखें, फलाहार या निर्जल व्रत करें और मन ही मन ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करते रहें। इस दिन श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ विशेष शुभ माना जाता है। कम से कम एक अध्याय अवश्य पढ़ें या सुनें। शाम को फिर से दीपक जलाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आराधना करें और तुलसी पर जल चढ़ाएं। रात्रि में जागरण, भजन-कीर्तन और प्रभु-स्मरण करने से व्रत का फल कई गुना बढ़ जाता है। द्वादशी के पारण मुहूर्त में तुलसी जल से व्रत का समापन करें।
मोक्षदा एकादशी पूजा सामग्री: पूजा के लिए भगवान विष्णु की प्रतिमा या फोटो, गंगाजल, दीपक और घी/तेल, रूई की बत्ती, धूप-अगरबत्ती, चंदन या हल्दी, पीले फूल, तुलसी दल, पंचामृत, फल (विशेषकर केला), पीली मिठाई, कलश, अक्षत चावल, कुमकुम-रोली, पूजा की थाली, मेवा और यदि उपलब्ध हो तो तुलसी का पौधा ज़रूर शामिल करें।
उपाय: मोक्षदा एकादशी के दिन किए गए उपाय अत्यंत फलदायी माने जाते हैं। सुबह स्नान के बाद भगवान विष्णु और तुलसी माता को जल अर्पित करें और ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का शांत मन से जाप करें। इस दिन पीली वस्तुओं का दान-जैसे हल्दी, पीला कपड़ा, केला या पीली मिठाई विशेष पुण्य देता है। तुलसी के पौधे के पास दीपक जलाना और घर की उत्तर दिशा में घी या कपूर का दीपक रखना नकारात्मक प्रभावों को दूर करता है। पितरों की शांति के लिए आकाशदीप जलाना और विष्णु सहस्रनाम या गीता के श्लोकों का पाठ करना बेहद शुभ माना जाता है। गरीबों, ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र या अन्न दान करने से जीवन में बाधाओं का निवारण होता है और घर में सुख-शांति बढ़ती है। पूरे दिन सात्त्विक आचरण, संयम और जप का पालन करने से व्रत का प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है।
मंत्र:“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का 108 बार जाप करना शुभ माना जाता है, क्योंकि यह मन को शांत करता है और पापों का क्षय करता है। इसके साथ ही भक्त “ॐ नारायणाय नमः” और “ॐ विष्णवे नमः” का जप भी कर सकते हैं।




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