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Malmas 2026: मलमास शुरू होने से शादी-मुंडन जैसे कई मांगलिक कार्यों पर लग जाएगा ब्रेक, जानें कब से कब तक रहेगा अधिक मास

साल 2026 में मलमास 17 मई से 15 जून तक रहेगा। इस दौरान कई मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है, लेकिन आध्यात्मिक साधना के लिए यह महीना अत्यंत शुभ होता है। आइए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से।

Mon, 4 May 2026 03:12 PMNavaneet Rathaur लाइव हिन्दुस्तान
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Malmas 2026: मलमास शुरू होने से शादी-मुंडन जैसे कई मांगलिक कार्यों पर लग जाएगा ब्रेक, जानें कब से कब तक रहेगा अधिक मास

हिंदू पंचांग में अधिक मास या मलमास का विशेष महत्व है। इसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। यह समय पूरी तरह भगवान विष्णु की आराधना को समर्पित माना जाता है। साल 2026 में मलमास 17 मई से 15 जून तक रहेगा। इस दौरान कई मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है, लेकिन आध्यात्मिक साधना के लिए यह महीना अत्यंत शुभ होता है।

मलमास क्यों पड़ता है?

जब सूर्य की गति धीमी हो जाती है और चंद्र मास सूर्य मास से आगे निकल जाता है, तब अधिक मास पड़ता है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार यह घटना लगभग हर 2.5 साल में होती है। इस बार ज्येष्ठ मास में अधिक मास आ रहा है। शास्त्रों में इसे भगवान विष्णु का विशेष मास माना गया है। इसलिए इसे पुरुषोत्तम मास का नाम दिया गया है।

2026 में मलमास की तिथियां

वैदिक पंचांग के अनुसार, मलमास 17 मई 2026 को शुरू होकर 15 जून 2026 तक चलेगा। इस पूरे महीने सूर्य की गति मंद रहने के कारण शुभ मुहूर्त नहीं बन पाते। यही कारण है कि इस अवधि में मांगलिक कार्यों पर रोक लगाई जाती है।

मलमास में किन कार्यों पर लगेगी रोक?

मलमास को शुभ कार्यों के लिए अशुभ माना जाता है। इस दौरान इन मांगलिक कार्यों से बचना चाहिए:

  • शादी-विवाह
  • गृह प्रवेश या नए घर की नींव रखना
  • मुंडन संस्कार या जनेऊ संस्कार
  • नया व्यापार, दुकान या शोरूम शुरू करना
  • कोई नया वाहन या संपत्ति खरीदना

ऐसा माना जाता है कि इन कार्यों को मलमास में करने से जीवन में क्लेश, आर्थिक हानि और अशांति आ सकती है।

मलमास में क्या करें?

मलमास को केवल निषेध का महीना नहीं, बल्कि भक्ति और आध्यात्मिक साधना का महीना भी माना जाता है। इस दौरान निम्न कार्य शुभ फल देते हैं:

  • भगवान विष्णु और लक्ष्मी की पूजा-अर्चना
  • अनाज, जल, तिल, कपड़े और फल का दान
  • विष्णु सहस्रनाम, पुरुषोत्तम मास व्रत और ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप
  • सात्विक भोजन और सत्कर्म

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मलमास का धार्मिक महत्व

पुराणों में मलमास को विष्णु भक्ति का विशेष काल बताया गया है। जो भक्त इस महीने में श्रद्धा से विष्णु की आराधना करते हैं, उन्हें सामान्य महीनों से कई गुना अधिक फल मिलता है। इस माह में किया गया दान, व्रत और जप अत्यंत फलदायी होता है। इसलिए मलमास को 'पुरुषोत्तम मास' कहकर इसे शुभ माना जाता है।

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सावधानियां और सलाह

मलमास के दौरान कोई भी नया शुभ कार्य शुरू करने से पहले पंचांग या ज्योतिषी से अवश्य सलाह लें। इस अवधि में पुराने काम पूरे करने, घर की सफाई करने और आध्यात्मिक क्रियाओं पर ध्यान केंद्रित करना ज्यादा उचित रहता है। 17 मई से 15 जून 2026 तक मलमास रहेगा, इसलिए अपनी शादी या अन्य महत्वपूर्ण कार्यक्रमों की तारीख पहले से तय कर लें।

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मलमास हमें सिखाता है कि हर समय शुभ कार्य नहीं होते, कभी-कभी रुककर भक्ति और आत्म-चिंतन का समय भी जरूरी होता है।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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