mahashivratri vrat bhagwan shiv puja vidhi Mahashivratri : महाशिवरात्रि पर इस विधि से करें भगवान शिव की पूजा, एस्ट्रोलॉजी न्यूज़ - Hindustan
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Mahashivratri : महाशिवरात्रि पर इस विधि से करें भगवान शिव की पूजा

  • इस बार महाशिवरात्रि का पर्व 26 फरवरी बुधवार को मनाया जाएगा। भोलेनाथ का जलाभिषेक 26 फरवरी को सुबह 11 बजकर 8 मिनट से शत्रुनाशक परिघ योग व शुभ की चौघड़िया में प्रारंभ होगा।

Thu, 20 Feb 2025 04:41 PMYogesh Joshi लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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Mahashivratri : महाशिवरात्रि पर इस विधि से करें भगवान शिव की पूजा

mahashivratri vrat : इस बार महाशिवरात्रि का पर्व 26 फरवरी बुधवार को मनाया जाएगा। भोलेनाथ का जलाभिषेक 26 फरवरी को सुबह 11 बजकर 8 मिनट से शत्रुनाशक परिघ योग व शुभ की चौघड़िया में प्रारंभ होगा। निर्णयसिंधु व धर्मसिंधु ग्रंथों सहित स्कन्द पुराण, शिव पुराण, लिंगपुराण, नारदसंहिता आदि धर्मग्रंथों के अनुसार फाल्गुन कृष्ण पक्ष में जिस दिन आधीरात के पहले व आधीरात के बाद चतुर्दशी तिथि प्राप्त हो वही महाशिवरात्रि है, इस दिन प्रदोषकाल युक्त हो तो श्रेष्ठ है। इस समय शिवरात्रि का व्रत करके पूर्ण फल प्राप्त करें। चतुर्दशी तिथि 26 फरवरी को सुबह 11 बजकर 8 बजे श्रवणनक्षत्र के साथ शुरु होकर सायंकाल 5 बजकर 23 से धनिष्ठा नक्षत्र लगने के बाद 27 फरवरी को सुबह 8 बजकर 54 मिनट तक रहेगा।

धर्मग्रंथों के अनुसार महाशिवरात्रि निशीथकालीन पर्व है अत: 26 फरवरी को ही पूर्णत: श्रेष्ठ शास्त्रोंचित समस्त शुभ फल प्रदान करने वाला महाशिवरात्रि है। इस दिन जलाभिषेक के साथ दुग्धाभिषेक, रुद्राभिषेक व पूजन समस्त भक्तों के लिए अत्यंत शुभ फल देने व कल्याण करने वाला होगा।

इस दिन प्रदोषकाल में भी पूजन अवश्य करें। भगवान भोलेनाथ का अभिषेक गंगाजल से, गाय के दूध से, गन्ने के रस से करना उत्तम रहेगा। पूजन में बेलपत्र, भांग, धतूरा व फूल, आंक, शमी पुष्प व पत्र, कनेर का फूल, कलावा व फल, सफ़ेद मिष्ठान आदि के साथ मनोकामना पूर्ति के लिए पूजन में अक्षत, तिल के साथ नीले, सफ़ेद व पीले पुष्प व दूर्वा भगवान भोलेनाथ को अत्यंत प्रिय है, इसलिए इन्हें अवश्य चढ़ाएं। जिस भी जातक की कुंडली में कालसर्प दोष या राहु की नकारात्मक स्थति है, उन्हें महाशिवरात्रि को चांदी अथवा तांबे के नाग-नागिन का जोड़ा भी अवश्य चढ़ाना चाहिए तथा रुद्राभिषेक भी कराना चाहिए। महाशिवरात्रि के दिन चार प्रहर रुद्राभिषेक पूजन भी विधान है जिससे समस्त मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। महाशिवरात्रि पूजन में भद्रा विचार नहीं लिया जाता है।

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