kedarnath opening 2026 history and interseting facts related to mahabharat pandav ukhimath Kedarnath Opening 2026: त्रिकोणीय शिवलिंग और पांडवों से जुड़ा रहस्य, ये हैं केदारनाथ मंदिर की दिलचस्प बातें, एस्ट्रोलॉजी न्यूज़ - Hindustan
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Kedarnath Opening 2026: त्रिकोणीय शिवलिंग और पांडवों से जुड़ा रहस्य, ये हैं केदारनाथ मंदिर की दिलचस्प बातें

केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल 2026 को खुल जाएंगे। उखीमठ से बाबा केदार की डोली आज केदारनाथ पहुंच जाएगी। जानिए इस मंदिर का  इतिहास क्या है और यहां कि इतनी मान्यता क्यों है? 

Tue, 21 April 2026 03:20 PMGarima Singh लाइव हिन्दुस्तान
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Kedarnath Opening 2026: त्रिकोणीय शिवलिंग और पांडवों से जुड़ा रहस्य, ये हैं केदारनाथ मंदिर की दिलचस्प बातें

केदारनाथ के कपाट कल यानी 22 अप्रैल से खुल जाएंगे। इस दिन का इंतजार लोग पूरे साल करते हैं। बता दें कि बाबा केदार साल में कुल 6 महीने ही यहां विराजमान होते हैं। गर्मियों में बर्फ पिघलने लगती है और रास्ते धीरे-धीरे साफ होने लगते हैं। ऐसे में यहां पर दर्शन करना आसान हो जाता है। हालांकि जैसे ही ठंड आती है यहां पर पूरा इलाका ही बर्फ की चादर से ढक जाता है। इस वजह से ही मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। इस दौरान बाबा केदार की चल विग्रह डोली को ऊखीमठ के ओंकारेश्वर मंदिर लाया जाता है। पूरी ठंड बाबा केदार की यहीं पर पूजा होती है। गर्मियां शुरु होते ही बाबा केदार वापस केदारनाथ धाम पहुंच जाते हैं। अब मंदिर फिर से खुलने वाला है। ऐसे में आइए जानते हैं इससे जुड़े इतिहास के साथ-साथ कुछ दिलचस्प बातें-

केदारनाथ मंदिर का इतिहास

इस मंदिर को भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है और इसे स्वयंभू यानी अपने आप प्रकट हुआ शिवलिंग भी कहा जाता है। मान्यता है कि महाभारत के युद्ध के बाद पांडव अपने पापों से मुक्ति पाना चाहते थे और इसलिए वो भगवान शिव को ढूंढ रहे थे। शिवजी उनके कर्मों से नाराज थे और दर्शन नहीं देना चाहते थे। ऐसे में उन्होंने भैंसे का रूप धारण किया।

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पौराणिक कथाओं के अनुसार भीम ने जैसे ही उन्हें पहचान लिया शिवजी वैसे ही जमीन में समा गए। उस समय उनकी पीठ का हिस्सा ऊपर ही रह गया और अब केदारनाथ में इसे ही शिवलिंग के रूप में पूजा जाता है। इस पवित्र मंदिर का निर्माण आदि गुरु शंकराचार्य ने करवाया था। मान्यता है कि यहां पर आए हुए हर भक्त के दुख बाबा केदार हर लेते हैं।

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2013 की आपदा के बाद भव्य हुआ धाम

साल 2013 में आई भयानक आपदा ने केदारनाथ इलाके को बुरी तरह से प्रभावित किया था। यहां पर बड़े स्तर पर फिर से निर्माण किया गया है और अब केदारपुरी पहले से और भी भव्य बन गया है। लोगों के लिए अब अच्छी सुविधाएं हैं ताकि केदारनाथ यात्रा आसान बन सके।

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केदारनाथ से जुड़ी दिलचस्प बातें

बता दें कि केदारनाथ मंदिर समुद्र तल से करीब 3,583 मीटर से 3,584 मीटर (लगभग 11,755 से 11,700 फीट) ऊंचाई पर बना है। यहां का शिवलिंग बाकी 11 ज्योतिर्लिंगों से काफी अलग है क्योंकि यह सामान्य शिवलिंग जैसे गोल आकार का नहीं बल्कि त्रिकोणीय आकार का बना हुआ है। मान्यता है कि यहां पर सच्चे मन से मांगी हुई हर मुराद पूरी होती है। यहां पर लिंचोली से आगे बढ़ते ही बर्फ से ढके ऊंचे-ऊंचे पहाड़ों का नजारा देखने लायक होता है जो केदारनाथ यात्रा को और भी खास बना देता है।

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