केदारनाथ के कपाट बंद, 6 माह तक उखीमठ में होगी पूजा
केदारनाथ धाम, भगवान शिव के प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक है। यह धाम उत्तराखंड राज्य के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित है और हिमालय की ऊंचाई पर बसा होने के कारण प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर है। केदारनाथ धाम में हर साल हजारों श्रद्धालु आते हैं।

केदारनाथ धाम, भगवान शिव के प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक है। यह धाम उत्तराखंड राज्य के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित है और हिमालय की ऊंचाई पर बसा होने के कारण प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर है। केदारनाथ धाम में हर साल हजारों श्रद्धालु आते हैं। सर्दियों में, भारी बर्फबारी और कठिन मौसम के कारण मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। इस साल 2025 में, केदारनाथ के कपाट 23 अक्टूबर को, भाई दूज के दिन बंद कर दिए गए। यह तिथि हिंदू पंचांग और ज्योतिष गणना के आधार पर तय की जाती। जब मंदिर बंद रहता है, तब भगवान की पूजा उखीमठ में होती है, जहां रावल और पुजारी विशेष अनुष्ठानों के साथ देवता की आराधना करते हैं। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है।
कपाट बंद होने की प्रक्रिया
केदारनाथ के कपाट बंद करने की प्रक्रिया में कई धार्मिक अनुष्ठान शामिल होते हैं। इस वर्ष, 2025 में कपाट बंद करने की प्रक्रिया 20 अक्टूबर से शुरू हुई। इस दिन, भकुंट भैरव की पूजा के बाद मंदिर के गर्भगृह से स्वयंभू लिंग के ठीक ऊपर स्थापित सोने का छत्र और कलश उतार दिया गया था। इसके बाद, केदारनाथ के रावल (मुख्य पुजारी) और अन्य पुजारियों ने विशेष पूजा अर्चना की।
शीतकालीन पूजा स्थल: उखीमठ
जब केदारनाथ के कपाट बंद होते हैं, तो भगवान केदारनाथ की पूजा उखीमठ में होती है। यह स्थान रुद्रप्रयाग जिले में स्थित है और यहां केदारनाथ के रावल और अन्य पुजारी भगवान केदारनाथ की पूजा करते हैं। यह परंपरा सदियों पुरानी है और सर्दियों में श्रद्धालुओं के लिए पूजा का यह स्थान महत्वपूर्ण है।
कब खुलेंगे कपाट-
केदारनाथ का मंदिर कब खुलेगा, यह महाशिवरात्रि के दिन तय किया जाता है। यह तारीख पंचांग और शुभ समय देखकर चुनी जाती है। उखीमठ के ओंकारेश्वर मंदिर के पुजारी और बद्री-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) मिलकर यह तय करते हैं कि कपाट कब खुलेंगे।




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