Bhai Dooj 2025 Tilak Shubh Muhurat Puja Time Rahukaal Kab hai Bhai Dooj 2025 Tilak Time : आयुष्मान योग में भाई दूज, बहनें राहुकाल में न करें पूजा, जानें तिलक करने का शुभ मुहूर्त, एस्ट्रोलॉजी न्यूज़ - Hindustan
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Bhai Dooj 2025 Tilak Time : आयुष्मान योग में भाई दूज, बहनें राहुकाल में न करें पूजा, जानें तिलक करने का शुभ मुहूर्त

दीपावली के पांचवें और आखिरी पर्व के रूप में भाई दूज मनाया जाता है। यह त्योहार भाई-बहन के प्रेम, स्नेह और रिश्ते के मजबूती का प्रतीक है। हिन्दू पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को भाई दूज का पर्व मनाया जाता है। इस साल यह पर्व 23 अक्टूबर, गुरुवार को पड़ रहा है।

Thu, 23 Oct 2025 08:57 AMYogesh Joshi लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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Bhai Dooj 2025 Tilak Time : आयुष्मान योग में भाई दूज, बहनें राहुकाल में न करें पूजा, जानें तिलक करने का शुभ मुहूर्त

दीपावली के पांचवें और आखिरी पर्व के रूप में भाई दूज मनाया जाता है। यह त्योहार भाई-बहन के प्रेम, स्नेह और रिश्ते के मजबूती का प्रतीक है। हिन्दू पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को भाई दूज का पर्व मनाया जाता है। इस साल यह पर्व 23 अक्टूबर, गुरुवार को पड़ रहा है। ज्योतिषियों के अनुसार इस बार भाई दूज पर आयुष्मान योग बन रहा है। आयुष्मान योग को विशेष रूप से शुभ माना जाता है। यह योग स्वास्थ्य, दीर्घायु, सुख-समृद्धि और समग्र सकारात्मक ऊर्जा देने वाला होता है। ऐसे में भाई दूज के दिन बहनें अपने भाइयों के अच्छे स्वास्थ्य, लंबी उम्र और जीवन में खुशहाली की कामना करती हैं। यही वजह है कि आयुष्मान योग का होना इस पर्व को और भी खास बना देता है।

पंचांग के अनुसार इस साल कार्तिक शुक्ल द्वितीया तिथि 22 अक्टूबर की रात 8:16 बजे शुरू होकर 23 अक्टूबर की रात 10:46 बजे तक रहेगी। इसका अर्थ यह है कि पूरे दिन सूर्योदय से लेकर रात तक द्वितीया तिथि का महत्व बना रहेगा। इसलिए भाई दूज का शुभ पर्व 23 अक्टूबर को मनाया जाएगा।

भाई दूज पर टीका लगाने का शुभ समय

भाई दूज पर बहनें अपने भाइयों को तिलक कर उनका सम्मान करती हैं और लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना करती हैं। द्वितीया तिथि 23 अक्तूबर को सूर्योदय के समय से पूर्व ही मौजूद रहेगी इसलिए प्रातः काल से ही भाई दूज पर टीका करने के मुहूर्त शुरू हो जाएंगे।

● सुबह 6 बजकर 26 मिनट से 7 बजकर 51 मिनट के बीच शुभ चौघड़िया

● सुबह 10 बजकर 39 मिनट से दोपहर 1 बजेकर 27 मिनट तक चर और लाभ चौघड़िया का श्रेष्ठ मुहूर्त

अगर किसी कारणवश दिन में अपने भाई को तिलक नहीं कर पाएं, तो शाम 4:16 बजे से रात 8:52 बजे तक भी टीका किया जा सकता है।

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राहुकाल में न करें टीका- दूसरी ओर, दोपहर 1:30 बजे से 3:00 बजे तक राहुकाल रहेगा। इस दौरान टीका करना वर्जित है। इसलिए बहनों को इस समय से बचना चाहिए और अपने भाई का तिलक या पूजा किसी अन्य शुभ समय में करना चाहिए।

भाई दूज का महत्व

भाई दूज केवल एक धार्मिक रस्म नहीं है, बल्कि यह भाई-बहन के रिश्ते की गर्माहट, स्नेह और आपसी सम्मान का प्रतीक भी है। इस दिन बहनें अपने भाइयों के हाथों में तिलक करती हैं, उनके लिए प्रार्थना करती हैं और मिठाई खिलाती हैं। भाई भी इस अवसर पर अपनी बहनों को आशीर्वाद देते हैं और उनके जीवन में सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

भाई दूज का पर्व यह सिखाता है कि भाई-बहन के रिश्ते में केवल उत्सव नहीं, बल्कि जिम्मेदारी, प्रेम और आपसी देखभाल भी बहुत जरूरी है। यह दिन भाई और बहन दोनों के लिए भावनात्मक रूप से भी महत्वपूर्ण होता है।

आयुष्मान योग का महत्व

आयुष्मान योग, जो इस बार भाई दूज के दिन बन रहा है, शरीर और मन दोनों के लिए लाभकारी माना जाता है। इसके प्रभाव से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है, रोग-शोक दूर होते हैं और समृद्धि आती है। ज्योतिषविदों का मानना है कि इस योग के दौरान किए गए शुभ कार्य, जैसे कि भाई को तिलक करना, और बहन द्वारा की गई प्रार्थनाएँ और भेंट, विशेष रूप से फलदायी होती हैं।

इस योग के प्रभाव से भाइयों का स्वास्थ्य बेहतर होता है, उनके जीवन में खुशियाँ और सफलता बढ़ती हैं। यह योग धार्मिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है और इसे किसी वरदान के समान माना गया है।

भाई दूज की पूजा और परंपरा

भाई दूज पर बहनें अपने भाई को निमंत्रण देती हैं, उन्हें तिलक करती हैं और पूजा करती हैं। इस दिन भाई भी अपनी बहनों को आशीर्वाद देते हैं और उपहार देते हैं। इस पर्व की खास बात यह है कि इसमें केवल पारंपरिक रस्में ही नहीं, बल्कि भावनात्मक जुड़ाव और प्रेम की अहमियत भी है। भाई दूज का पर्व भाई और बहन दोनों के जीवन में प्रेम, सुरक्षा और विश्वास की भावना को मजबूत करता है।

टीका लगाने का तरीका

शुभ समय में टीका लगाने के लिए बहनें अपने भाई को साफ कपड़े पहनाकर बिठाती हैं, फिर हाथ में चंदन और रोली से तिलक करती हैं। इसके साथ ही मिठाई और फूल अर्पित किए जाते हैं। भाई को भी बहन को आशीर्वाद देना चाहिए और संभव हो तो छोटे-मोटे उपहार दें।

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