Katha in Hindi: bhrigu sanhita rachayita bhrigu maharshi ne vishnu ji ko diya tha shrap Katha in Hindi: भृगु-संहिता के रचयिता महर्षि भृगु ने भगवान विष्णु को दिया था श्राप, पृथ्वी पर लेंगे बार-बार जन्म, एस्ट्रोलॉजी न्यूज़ - Hindustan
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Katha in Hindi: भृगु-संहिता के रचयिता महर्षि भृगु ने भगवान विष्णु को दिया था श्राप, पृथ्वी पर लेंगे बार-बार जन्म

भगवान ब्रह्मा के मानस पुत्र महर्षि भृगु का जन्म वैशाख पूर्णिमा के दिन हुआ था। ‘भृगु’ शब्द का अर्थ है-‘उज्ज्वल’, इसीलिए वैदिक साहित्य में भृगु की तुलना सूर्य से की गई है। 

Tue, 28 April 2026 10:52 AMAnuradha Pandey लाइव हिन्दुस्तान
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Katha in Hindi: भृगु-संहिता के रचयिता महर्षि भृगु ने भगवान विष्णु को दिया था श्राप, पृथ्वी पर लेंगे बार-बार जन्म

भगवान ब्रह्मा के मानस पुत्र महर्षि भृगु का जन्म वैशाख पूर्णिमा के दिन हुआ था। ‘भृगु’ शब्द का अर्थ है-‘उज्ज्वल’, इसीलिए वैदिक साहित्य में भृगु की तुलना सूर्य से की गई है। ऋग्वेद के अनुसार ऋषि भृगु अग्नि-देवता ‘मातरश्विन्’ से अग्नि प्राप्त करके, उसे पृथ्वी पर लेकर आए और लोगों को अग्नि का उपयोग करना सिखाया। इसी कारण भार्गवों को अग्निपूजक माना गया है। भृगु ने ही अग्नि को शुद्ध-अशुद्ध का ज्ञान किए बिना सर्वभक्षी होने का शाप भी दिया था। ज्योतिष के प्रसिद्ध ग्रंथ ‘भृगु-संहिता’ के रचयिता महर्षि भृगु हैं।

महर्षि भृगु की पुत्री लक्ष्मी का विवाह भगवान विष्णु से

भागवत पुराण के अनुसार भृगु का विवाह राजा दक्ष की पुत्री ख्याति से हुआ था। इनसे इनके दो पुत्र धाता-विधाता और पुत्री लक्ष्मी का जन्म हुआ। ऋषि भृगु की पुत्री होने के कारण लक्ष्मी का एक नाम भार्गवी भी है। इनकी दूसरी पत्नी काव्यामाता (दिव्या) से पुत्र उशना (दैत्य गुरु शुक्राचार्य) का जन्म हुआ। इनकी एक अन्य पत्नी पौलमी से दो पुत्र च्यवन और ऋचीक हुए। भृगु के बड़े भाई ऋषि अंगिरा हैं, जिनके पुत्र देवगुरु बृहस्पति हैं। महर्षि भृगु की पुत्री लक्ष्मी का विवाह भगवान विष्णु से हुआ।

भगवान विष्णु को शाप

एक पौराणिक कथा के अनुसार देवासुर संग्राम के समय महर्षि भृगु की पत्नी ख्याति ने भृगु की अनुपस्थिति में अपने आश्रम में असुरों की देवताओं से रक्षा की। इससे क्रोधित होकर भगवान विष्णु ने भृगु-पत्नी ख्याति का सुदर्शन चक्र से सिर काट दिया। जब भृगु को यह पता चला कि श्रीहरि ने उनकी पत्नी की हत्या की है, तो उन्होंने भगवान विष्णु को शाप दिया कि वे बार-बार पृथ्वी लोक पर स्त्री के गर्भ से जन्म लेंगे।

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महर्षि भृगु से जुड़ी एक अन्य प्रसिद्ध पौराणिक कथा है। एक बार ऋषि समाज में यह जानने की इच्छा हुई कि ब्रह्मा, विष्णु, महेश में सर्वश्रेष्ठ कौन है। सभी ऋषियों ने यह कार्य भृगु को सौंपा कि वे तीनों की परीक्षा लें और बताएं कि उनमें श्रेष्ठ कौन है। भृगु सबसे पहले ब्रह्मा के पास गए, लेकिन उन्हें प्रणाम नहीं किया। इससे ब्रह्मा क्रोधित हो गए। इसके बाद भृगु महादेव के पास गए। वहां उनके व्यवहार ने शिव को भी क्रोधित कर दिया। इसके बाद वे विष्णु के पास गए और उन्हें योगनिद्रा में लीन देखकर उनके वक्षस्थल पर अपने पैर से प्रहार किया। इससे श्रीहरि की निद्रा टूट गई, लेकिन वे भृगु पर क्रोधित नहीं हुए, बल्कि उनके पांव को सहलाते हुए पूछा कि हे ऋषिवर! मेरे कठोर वक्षस्थल पर आपके पांव लगने से उन्हें पीड़ा तो नहीं पहुंची। यह सुनकर भृगु ने विनीत होकर कहा, ‘प्रभु ऋषि समाज की यह जानने की इच्छा थी कि आप तीनों देवों में सर्वश्रेष्ठ कौन है। आपके व्यवहार ने सिद्ध कर दिया है कि तीनों देवों में आप ही श्रेष्ठ हैं।’

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अरुण कुमार जैमिनि

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