Kalashtami 2026 Upay: कालाष्टमी पर करें ये 6 उपाय, इन समस्याओं से मिलेगा छुटकारा
Kalashtami 2026 Upay: वैशाख माह की कालाष्टमी 10 अप्रैल 2026, शुक्रवार को मनाई जा रही है। चलिए जानते हैं इस वैशाख कालाष्टमी पर किए जाने वाले कुछ सरल और असरदार उपायों के बारे में, जो जीवन की बाधाएं कम कर सकते हैं।

हिंदू धर्म में कालाष्टमी तिथि का खास महत्व होता है। हर महीने की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी कहा जाता है। यह तिथि भगवान शिव के रौद्र स्वरूप काल भैरव को समर्पित होता है। इस दिन काल भैरव की पूरे विधि-विधान से पूजा अर्चना होती है। साथ ही बुरी नजर और नकारात्मक ऊर्जा से बचने के लिए इस दिन कई उपाय किए जाते हैं। वैशाख का महीना चल रहा है। इस माह की कालाष्टमी 10 अप्रैल 2026, शुक्रवार को मनाई जा रही है। चलिए जानते हैं इस वैशाख कालाष्टमी पर किए जाने वाले कुछ सरल और असरदार उपायों के बारे में, जो जीवन की बाधाएं कम कर सकते हैं।
काल भैरव की पूरे विधि-विधान से करें उपाय
इस दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद व्रत का संकल्प लें। एक चौकी पर काला या नीला वस्त्र बिछाकर भगवान काल भैरव की प्रतिमा स्थापित करें। फिर उनके समक्ष सरसों के तेल का चौमुखी दीपक प्रज्वलित करें। गंगाजल और पंचामृत से अभिषेक कर तिलक अर्पित करें। इसके बाद काले तिल, उड़द दाल और पुष्प अर्पित करें और इमरती या नारियल का भोग लगाएं। अब शांत मन से आसन पर बैठकर भैरव मंत्रों का कम से कम 108 बार जप करें। इसके साथ ही काल भैरव अष्टकम या चालीसा का पाठ करें और व्रत कथा का श्रवण/पाठ करें।
सरसों के तेल का दीपक जलाएं
सरसों का तेल भगवान शनि और काल भैरव दोनों को अत्यंत प्रिय माना जाता है। इसलिए कालाष्टमी की शाम को काल भैरव मंदिर या घर के पूजा स्थल पर मिट्टी के दीपक में सरसों के तेल का दीपक अवश्य जलाएं। दीप प्रज्वलित करते समय 'ॐ कालभैरवाय नमः' या ‘ऊं ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं ऊं’ मंत्र का जप करें। माना जाता है कि इस उपाय को करने से नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव दूर होता है और वातावरण शुद्ध रहता है। इस उपाय से जीवन के सुख-साधनों में बढ़ोतरी होती है।
कुत्ते को खिलाएं ऐसी रोटी
यदि आप लंबे समय से किसी समस्या से जूझ रहे हैं, तो कालाष्टमी के दिन सरसों के तेल से चुपड़ी हुई रोटी काले कुत्ते को खिलाना शुभ माना जाता है। रोटी पर तेल लगाते समय भगवान काल भैरव का स्मरण अवश्य करें। माना जाता है कि इस उपाय से कष्टों में राहत मिलती है और बाधाएं दूर होती हैं।
भैरव चालीसा का पाठ
कालाष्टमी पर भैरव चालीसा का पाठ करने से भय, तंत्र-बाधा और शत्रुओं से उत्पन्न परेशानियां दूर होने की मान्यता है। इसलिए रात्रि के समय शुद्ध होकर भगवान काल भैरव के समक्ष बैठकर भैरव चालीसा का पाठ करें। संभव हो तो इसका 21 बार पाठ करना अधिक फलदायी माना जाता है।
काले रंग का धागा करें अर्पित
यदि जीवन में किसी न किसी प्रकार की कमी बनी रहती है, तो कालाष्टमी के दिन भगवान भैरव के चरणों में काले रंग का धागा अर्पित करें। उसे लगभग 5 मिनट वहीं रहने दें और इस दौरान काल भैरव का ध्यान करते रहें। इसके बाद उस धागे को अपने दाएं पैर में बांध लें। माना जाता है कि इससे अभाव दूर होते हैं और जीवन में संतुलन आता है।
कालाष्टमी की रात्रि करें ये उपाय
काल भैरव की उपासना करने से शनि दोष का प्रभाव कम होने की मान्यता है और जीवन की बाधाएं धीरे-धीरे दूर होती हैं। इसलिए कालाष्टमी की रात्रि में काले कपड़े में उड़द की दाल, काले तिल और सरसों का तेल बांधकर भगवान भैरव को अर्पित करें। चाहें तो इसे किसी भैरव मंदिर में चढ़ा सकते हैं या किसी जरूरतमंद को दान भी कर सकते हैं।
डिस्क्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।




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