Jyeshtha Ekadashi 2026: ज्येष्ठ माह में अधिकमास के दुर्लभ संयोग से पड़ेंगे 4 एकादशी व्रत, जानें इनकी सही तिथि और महत्व
ज्येष्ठ माह 2026 में अधिकमास के दुर्लभ संयोग से 4 एकादशी व्रत पड़ रहे हैं। अपरा एकादशी, पद्मिनी एकादशी, परमा एकादशी और निर्जला एकादशी की सही तिथि, मुहूर्त और महत्व इस लेख में विस्तार से जानिए। इन व्रतों को करने से पुण्य की प्राप्ति, पापों का नाश और सुख-समृद्धि मिलती है।

ज्येष्ठ माह 2026 में एक विशेष दुर्लभ संयोग बन रहा है। इस माह में सामान्य रूप से दो एकादशी व्रत होते हैं, लेकिन अधिकमास लगने के कारण इस बार कुल चार एकादशी व्रत पड़ रहे हैं। यह संयोग भक्तों के लिए विशेष पुण्य प्राप्त करने का अवसर है। ज्येष्ठ माह की शुरुआत 2 मई 2026 से हो रही है और इस माह की अमावस्या 16 मई को है। इसके ठीक अगले दिन 17 मई 2026 से अधिकमास (मलमास) शुरू हो जाएगा।
ज्येष्ठ माह की चार एकादशियों की तिथियां
ज्येष्ठ माह की पहली एकादशी अपरा एकादशी 13 मई 2026, बुधवार को है। इस एकादशी तिथि 12 मई दोपहर 02:52 बजे शुरू होकर 13 मई दोपहर 01:30 बजे तक रहेगी। पारण का समय 14 मई को सूर्योदय के बाद होगा। इसके बाद 17 मई से अधिकमास लग जाएगा। अधिकमास की शुक्ल पक्ष की एकादशी पद्मिनी एकादशी 27 मई 2026 को पड़ेगी। फिर अधिकमास के कृष्ण पक्ष में परमा एकादशी 11 जून 2026 को आएगी। ज्येष्ठ माह की अंतिम एकादशी निर्जला एकादशी 25 जून 2026, गुरुवार को मनाई जाएगी।
अपरा एकादशी का महत्व
अपरा एकादशी को अचला एकादशी भी कहा जाता है। इस व्रत को करने से व्यक्ति को अपार पुण्य की प्राप्ति होती है और अनजाने में किए गए पापों से मुक्ति मिलती है। इस दिन विधि-विधान से व्रत रखने और कथा सुनने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। यह व्रत भक्तों को सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
पद्मिनी एकादशी का महत्व
पद्मिनी एकादशी अधिकमास की शुक्ल पक्ष की एकादशी है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, रानी पद्मिनी ने इस व्रत को कर संतान सुख प्राप्त किया था। इस व्रत से सुख, संपत्ति, संतान और मोक्ष की प्राप्ति होती है। अधिकमास में पड़ने के कारण इसका महत्व और बढ़ जाता है।
परमा एकादशी का महत्व
परमा एकादशी अधिकमास की कृष्ण पक्ष की एकादशी है। कुबेर देव ने सबसे पहले इस व्रत का पालन किया था, जिससे उन्हें धन का अध्यक्ष पद प्राप्त हुआ। इस व्रत से दरिद्रता का नाश, कष्टों से मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह व्रत आर्थिक और आध्यात्मिक उन्नति दोनों के लिए शुभ माना जाता है।
निर्जला एकादशी का महत्व
निर्जला एकादशी ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी है। यह सबसे कठोर एकादशी मानी जाती है क्योंकि इसमें जल भी ग्रहण नहीं किया जाता। इस व्रत को करने से एक वर्ष की सभी एकादशियों का फल प्राप्त होता है। निर्जला एकादशी से सभी पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
अधिकमास में एकादशी व्रत का विशेष महत्व
अधिकमास को पापों और दोषों को दूर करने वाला माना जाता है। इस दौरान किए गए व्रत, दान और पूजा का फल साधारण मास से कई गुना अधिक होता है। ज्येष्ठ माह में अधिकमास लगने से चार एकादशी व्रत का दुर्लभ संयोग बन रहा है। इन व्रतों को श्रद्धा और विधि-विधान से करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और भक्त के सभी संकट दूर करते हैं।
ज्येष्ठ माह 2026 में बन रहे इस दुर्लभ संयोग का लाभ उठाएं। 13 मई को अपरा एकादशी, 27 मई को पद्मिनी एकादशी, 11 जून को परमा एकादशी और 25 जून को निर्जला एकादशी - इन चार एकादशियों का व्रत और कथा श्रवण करने से जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है।




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