Navratri Havan: कैसे करें हवन अष्टमी और नवमी पर, जानें हवन का मंत्र और विधि
How to do Havan Vidhi Navratri Havan Kab Kare : अष्टमी तिथि का दिन चैत्र नवरात्रि का आठवां दिन है। नवमी तिथि नवरात्रि का आखिरी दिन है। ज्यादातर लोग इन्ही दो दिनों में हवन पूजा और कन्याओं को भोजन कराते हैं।

How to do Havan Vidhi Navratri Havan Kab Kare, नवरात्रि हवन : इस साल गुरुवार के दिन चैत्र नवरात्रि की अष्टमी और शुक्रवार के दिन नवमी मनाई जा रही है। अष्टमी तिथि चैत्र नवरात्रि का आठवां दिन है। नवमी तिथि नवरात्रि का आखिरी दिन है। ज्यादातर लोग इन्ही दो दिनों में हवन पूजा और कन्याओं को भोजन कराते हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार, उदया तिथि में 26 मार्च को अष्टमी और 27 मार्च को नवमी है। नवमीऔर अष्टमी तिथि में हवन पूजा करना शुभ माना जाता है। आइए जानते हैं हवन पूजन की विधि और मंत्र -
कैसे करें हवन अष्टमी और नवमी पर, जानें हवन का मंत्र और विधि
सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर साफ-स्वच्छ वस्त्र पहनें। हवन कुंड को साफ कर लें। इसके बाद हवन के लिए साफ-सुथरे स्थान पर हवन कुंड स्थापित करें। पूजा शुरू करने से पहले भगवान गणेश का ध्यान करें। अब गंगाजल का छिड़काव कर सभी देवताओं का आवाहन करें। अब हवन कुंड में आम की लकड़ी, घी और कपूर से अग्नि प्रज्जवलित करें। ऊं आग्नेय नम: स्वाहा मंत्र बोलकर अग्नि देव का ध्यान करें। ऊं गणेशाय नम: स्वाहा मंत्र बोलकर अगली आहुति दें। इसके बाद नौ ग्रहों (ऊं नवग्रहाय नम: स्वाहा) और कुल देवता (ऊं कुल देवताय नम: स्वाहा) का ध्यान करें। इसके बाद हवन कुंड में सभी देवी-देवताओं के नाम की आहुति डालें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हवनकुंड में कम से कम 108 बार आहुति डालनी चाहिए। देवी दुर्गा के नौ रूपों का ध्यान करते हुए आहुति डालें। अंत में बची हुई हवं सामग्री को एक पान के पत्ते पर एकत्रित कर, पूड़ी, हलवा, चना, सुपारी, लौंग आदि रख आहुति डालें। इसके बाद पूरी श्रद्धा के साथ मां की आरती करें। पूरी, हलवा, खीर या श्रद्धानुसार भोग लगाएं। आचवनी करें। क्षमा प्रार्थना करें। सभी को आरती दें और प्रसाद खिलाएं।
नवरात्रि पर हवन करने के मंत्र क्या हैं?
- ऊं आग्नेय नम: स्वाहा
- ऊं गणेशाय नम: स्वाहा
- ऊं नवग्रहाय नम: स्वाहा
- ऊं कुल देवताय नम: स्वाहा
- ऊं ब्रह्माय नम: स्वाहा
- ऊं विष्णुवे नम: स्वाहा
- ऊं शिवाय नम: स्वाहा
- ऊं दुर्गाय नम: स्वाहा
- ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे
- ऊं महाकालिकाय नम: स्वाहा
- ऊं भैरवाय नम: स्वाहा
- ऊं जयंती मंगलाकाली, भद्रकाली कपालिनी दुर्गा क्षमा शिवाधात्री स्वाहास्वधा नमस्तुति स्वाहा
- ऊं ब्रह्मा मुरारी त्रिपुरांतकारी भानु: शशि भूमि सुतो बुधश्च: गुरुश्च शुक्र शनि राहु केतव सर्वे ग्रहा शांति करा भवंतु स्वाहा।
- ॐ दुं दुर्गायै नमः स्वाहा।
- ॐ श्रीं ह्रीं दुं दुर्गायै नमः स्वाहा।
- ॐ दुर्गायै दुर्गपारायै सारायै सर्वकारिण्यै। ख्यात्यै तथैव कृष्णायै धूम्रा सततं नमः ।। स्वाहा।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।




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