How can one attain God without devotion know Premananda Maharaj answer बिना भजन भगवान की प्राप्ति कैसे होगी? जानें प्रेमानंद महाराज का जवाब, एस्ट्रोलॉजी न्यूज़ - Hindustan
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बिना भजन भगवान की प्राप्ति कैसे होगी? जानें प्रेमानंद महाराज का जवाब

लोग अपनी दुविधा और चिंता प्रेमानंद महाराज के सामने रखते हैं, जिसकी बड़ी ही सरलता के साथ वो उत्तर देते हैं, जिसे सुनने के बाद मन शांत हो जाता है। ऐसे ही एक भक्त ने पूछा कि यदि भजन नहीं हो पा रहा है, तो क्या करें कि भगवान की प्राप्ति हो जाए। चलिए जानते हैं कि महाराज जी ने इसका क्या जवाब दिया।

Thu, 25 Dec 2025 05:15 PMDheeraj Pal लाइव हिन्दुस्तान
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बिना भजन भगवान की प्राप्ति कैसे होगी? जानें प्रेमानंद महाराज का जवाब

वृंदावन वाले प्रेमानंद महाराज का सत्संग अब देश में ही नहीं बल्कि विदेश में भी चर्चित हो चुका है। उनके सत्संग में बच्चे, बूढ़े जवां और हर धर्म के लोग शामिल होते हैं। लोग अपनी दुविधा और चिंता प्रेमानंद जी महाराज के सामने रखते हैं, जिसकी बड़ी ही सरलता के साथ प्रेमानंद जी उत्तर देते हैं, जिसे सुनने के बाद मन शांत हो जाता है। ऐसे ही प्रेमानंद महाराज से एक भक्त ने पूछा कि यदि भजन नहीं हो पा रहा है, तो क्या करें कि भगवान की प्राप्ति हो जाए। चलिए जानते हैं कि महाराज जी ने इसका क्या जवाब दिया।

प्रेमानंद महाराज जी इसका जवाब देते हुए कहते हैं कि आपने ऐसा कैसे निश्चय कर लिया कि भजन नहीं हो रहा है? क्यों नहीं हो रहा है और क्यों नहीं होगा? वो आगे कहते हैं कि हमारा मानव जीवन वो संपूर्ण शक्ति संपन्न है, जिससे भगवत प्राप्ति करनी है। बिना भजन के भगवन की प्राप्ति असंभव है। मैं हमेशा से यही कहता हूं कि आखिर लोग बिना भजन के जीते कैसे हैं?

नर्क की प्राप्ति

उन्होंने कहा कि विषय सेवन, विषय चिंतन, प्रपंच चिंतन, ये सब बन सकता है, तो भजन नहीं बन सकता है? इसके लिए प्रयासरत क्यों नहीं हो? इंद्रियों को इतना क्यों विषयों के लिए प्रोत्साहन दे दिया कि भजन ही ना बने, तो भगवत प्राप्ति कैसे होगी? महाराज जी कहते हैं कि मानव जीवन का क्या उद्देश्य है- रुपया, समाज प्रियता, मान-प्रतिष्ठा यह सब यहीं की यहीं धरी रह जाएगी। इंद्रियों का दुलार, मन का दुलार- यह नर्क की प्राप्ति कराएगा।

भगवान के निज अंश
महाराज जी कहते हैं कि हम भगवान के निज अंश है। हम भगवान के भक्तों के संग से अपने मन को जबरदस्ती, बलात भजन में लगाएंगे। हम अविनाशी भगवान के अंश है, क्या नहीं कर सकते हैं। वो आगे कहते हैं कि भजन नहीं कर सकते हैं, लेकिन सब कर सकते हैं। हमारी वाणी है, बोल सकते हैं, तो राम और राधा क्यों नहीं बोल सकते हैं। हाथ है तो परोपकार क्यों ना करें, पैर है तो पदक्षिणा क्यों ना करें, हृदय है तो भगवान को समर्पित क्यों ना करें। महाराज जी कहते हैं कि भगवान का नाम जप ही अंक है। वो कहते हैं कि भजन होता सिद्धों से है। साधक को जबरदस्ती भजन करना पड़ता है।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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