अधिकमास में सूर्य जाएंगे रोहिणी नक्षत्र में , नौतपा से तपेगी धरती, इन राशियों को मिलेगा भाग्य का साथ
Surya Gochar 2026 Rohini Nakshatra hindi: रोहिणी नक्षत्र वृषभ राशि का नक्षत्र है, चंद्रमा इसके स्वामी है, इस नक्षत्र में चंद्रमा का प्रभाव होता है, इस नक्षत्र में प्रवेश करने से नौतपा लगते हैं। आपको बता दें कि यह अधिकमास में हो रहा है, इसलिए इस दौरान दान और पुण्य का फल और भी अधिक हो जाता है।

Surya Gochar 2026 Rohini Nakshatra hindi: रोहिणी नक्षत्र वृषभ राशि का नक्षत्र है, चंद्रमा इसके स्वामी है, इस नक्षत्र में चंद्रमा का प्रभाव होता है, इस नक्षत्र में प्रवेश करने से नौतपा लगते हैं। आपको बता दें कि यह अधिकमास में हो रहा है, इसलिए इस दौरान दान और पुण्य का फल और भी अधिक हो जाता है। सूर्य की बात करें तो सूर्य अभी वृषभ राशि में हैं। यह शुक्र की राशि है और चंद्रमा के ही नक्षत्र में सूर्य जा रहे हैं।ऐसे में अधिकमास में सूर्य का यह गोचर आपको लाभ करेगा और आपके लिए अच्छे योग लेकर आएगा। सूर्य अगले महीने जून में मिथुन राशि में गोचर करेंगे। इसके अलावा अगले महीने मृगशिरा नक्षत्र में जाएंगे। अभी 25 मई को सूर्य का नक्षत्र गोचर हो रहा है और इस नक्षत्र में जाने से ही नौतपा लग जाएगें, नौतपा का मतलब है कि जिसमें धरती सबसे अधिक तप्ती है। इन नौ दिनों में सबसे अधिक गर्मी होती है। आइए जानते हैं कि इस परिवर्तन का अच्छा प्रभाव किस राशि पर होगा।
यहां पढ़ें राशियों पर असर
इससे सिंह राशि के लिए अच्छे योग मिलेंगे, आपको भाग्य का साथ मिलेगा, आपके लिए जो काम पहले आप किसी वजह से पूरे नहीं कर पाए, थे, वो अब पूरे होंगे। आपका बैंक बैलेंस इस समय अच्छा होगा।
धनु राशि के लिए भी समय अच्छा है। आपके लिए समय अच्छा रहेगा, आपको एक बाद एक आगे निवेश लाभ देंगे, इस दौरान मकान और वाहन खरीद सकते हैं। दान करना आपके लिए उत्तम रहेगा।
वृष राशि के लिए भी समय उत्तम रहेगा आपको एक नहीं दो योजनाओं के जरिए धन मिल सकता है। इस समय अपने काम में धैर्य रखें और कोशिश करें कि समय पर फैसले लें, जिससे आप अधिक से अधिक लाभ पा सकें।
अधिकमास और नौतपा में क्या करें
नौतपा के दौरान, छाता, पानी और भोजन का दान करना चाहिए। इस दौरान सूर्य से जुड़ी चीजों का दान भी अच्छा माना जाता है। आपको बता दें कि अधिकमास में यक्ष, विवाहादि कार्य नहीं होते । इसमें तीर्थस्नान, देव- दर्शन, व्रत-उपवास आदि, सीमन्तोन्नयन, ऋतुशान्ति, पुंसवन ओर पुत्र आदिका मुख-दर्शन किया जा सकता हे । राज्याभिषेक भी मलमास में हो सकता है । व्रतारम्भ, प्रतिष्ठा, चूडाकर्म, उपनयन, मन्त्रोपासना, विवाह, नूतनगृह-निर्माण, गृह-प्रवेश, गौ आदिका ग्रहण, आश्रमान्तरमें प्रवेश, तीर्थयात्रा, अभिषेक-कर्म, वृषोत्सर्ग, कन्याका द्विरागमन तथा यज्ञ-यागादि मलमास में निषेध है ।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।




साइन इन