Holashtak 2026: Kab Se Shuru Hoga? Start Date, Upay, Remedies, Holika Dahan aur Holi Kab Hai Holashtak 2026: होलाष्टक कब से शुरू होंगे? जानें सही डेट और खास उपाय, एस्ट्रोलॉजी न्यूज़ - Hindustan
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Holashtak 2026: होलाष्टक कब से शुरू होंगे? जानें सही डेट और खास उपाय

होलिका दहन से पहले आने वाले आठ दिनों को होलाष्टक कहा जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार होलाष्टक की शुरुआत फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से होती है। साल 2026 में होलाष्टक 24 फरवरी से शुरू होकर 3 मार्च तक रहेंगे। ज्योतिष मान्यताओं के मुताबिक इस दौरान शुभ और मांगलिक काम करना ठीक नहीं माना जाता।

Fri, 20 Feb 2026 06:33 PMYogesh Joshi लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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Holashtak 2026: होलाष्टक कब से शुरू होंगे? जानें सही डेट और खास उपाय

Holashtak 2026: होलिका दहन से पहले आने वाले आठ दिनों को होलाष्टक कहा जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार होलाष्टक की शुरुआत फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से होती है। साल 2026 में होलाष्टक 24 फरवरी से शुरू होकर 3 मार्च तक रहेंगे। ज्योतिष मान्यताओं के मुताबिक इस दौरान शुभ और मांगलिक काम करना ठीक नहीं माना जाता। इसलिए शादी-ब्याह, गृह प्रवेश, मुंडन और नए काम की शुरुआत जैसे कार्य इन दिनों में टालना बेहतर होता है।

होलाष्टक में क्यों नहीं होते शुभ काम?- ज्योतिषाचार्यों के अनुसार होलाष्टक के समय ग्रहों का प्रभाव उग्र माना जाता है। इस वजह से यह समय नए काम शुरू करने के लिए अनुकूल नहीं माना जाता। परंपरा के अनुसार इन दिनों धैर्य, संयम और साधना पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। पुराने समय से चली आ रही मान्यता है कि इस दौरान किए गए मांगलिक कामों में रुकावट या परेशानी आ सकती है।

2 मार्च को होगा होलिका दहन, 4 मार्च को होली- ज्योतिष के जानकारों के मुताबिक साल 2026 में 2 मार्च को प्रदोष काल में होलिका दहन किया जाएगा। इसके बाद 4 मार्च को रंगों की होली खेली जाएगी। होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। इस दिन शाम के समय होलिका जलाकर पूजा की जाती है और अगले दिन होली मनाई जाती है।

होलाष्टक में ग्रहों का असर- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार होलाष्टक के आठों दिनों में हर दिन एक-एक ग्रह प्रभावशाली माना जाता है। कहा जाता है कि इन दिनों मन थोड़ा अस्थिर रह सकता है और नकारात्मकता बढ़ सकती है।

अष्टमी- चंद्रमा

नवमी- सूर्य

दशमी- शनि

एकादशी- शुक्र

द्वादशी- गुरु

त्रयोदशी- बुध

चतुर्दशी- मंगल

पूर्णिमा- राहु

इसी वजह से इन दिनों मन को शांत रखने और विवाद से दूर रहने की सलाह दी जाती है।

होलाष्टक में क्या करें, क्या न करें?- ज्योतिषाचार्यों के अनुसार होलाष्टक के दौरान हवन, यज्ञ और मांगलिक संस्कार नहीं किए जाते। इस समय पूजा-पाठ, जप-तप और ध्यान करना ज्यादा फलदायी माना जाता है। संयम से रहना, बुरी आदतों से दूरी बनाना और मन को शांत रखना अच्छा माना जाता है। कुछ जगहों पर यह परंपरा भी है कि नई शादी हुई महिलाएं होलाष्टक के दौरान मायके चली जाती हैं।

होलाष्टक के उपाय: होलाष्टक के दिनों में सुबह-शाम भगवान विष्णु और भगवान शिव का ध्यान करें और घर में शांति बनाए रखें। इन दिनों झगड़ा, गुस्सा और कटु बोल से बचना बहुत जरूरी माना जाता है। अगर मन बेचैन रहे तो रोज थोड़ा समय ध्यान या मंत्र जप में लगाएं। जरूरतमंद को अन्न, कपड़े या छोटी-सी मदद करना शुभ माना जाता है। होलाष्टक के दौरान शराब-मांस से दूरी रखें और नकारात्मक सोच से बचने की कोशिश करें। घर में रोज दीपक जलाकर सकारात्मक माहौल बनाएं। माना जाता है कि इन दिनों संयम और सादगी से रहने पर नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं और मन को शांति मिलती है।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य है और सटीक है। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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