Guruwar Upay: आसान तरीके से करें तुलसी की पूजा, भगवान विष्णु की कृपा के लिए करें 108 नामों का जाप
Guruwar Upay Tulsi Puja: गुरुवार के दिन अगर तुलसी की पूजा की जाए तो इससे कई लाभ मिलते हैं। नीचे विस्तार से जानिए कि आसान तरीके से तुलसी की पूजा कैसे की जाए? साथ ही जानें तुलसी के 108 नाम, जिसके जाप से हर मुश्किल से मुश्किल बाधा भी आसान हो जाती है।

हफ्ते के सारे दिन हर मायने में खास होते हैं। एक-एक दिन अलग-अलग भगवान को समर्पित होता है। बात की जाए गुरुवार की तो इस दिन भगवान विष्णु की पूजा होती है। बता दें कि हिंदू धर्म में विष्णु भगवान की पूजा को काफी पवित्र और शुभ माना जाता है। मान्यता है कि विधि-विधान के साथ भगवान की पूजा की जाए ज्ञान के साथ-साथ धन और यश की भी प्राप्ति होती है। साथ ही करियर और शादी से संबंधित होने वाली समस्याएं भी धीरे-धीरे कम होने लगती हैं। गुरुवार की पूजा के कुछ आसान से उपाय हैं इस दिन तुलसी की पूजा का भी विशेष महत्व है। दरअसल भगवान विष्णु को तुलसी मां प्रिय होती है। साथ ही माना जाता है कि तुलसी में मां लक्ष्मी का भी वास होता है। ऐसे में गुरुवार के दिन तुलसी पूजा करना जरूरी है।
ऐसे करें तुलसी की पूजा
अब समझते हैं कि इस दिन तुलसी की पूजा आसान तरीके से कैसे करनी है। सबसे पहले गुरुवार के दिन सुबह जल्दी स्नान करके पीले वस्त्र पहन लेना चाहिए। इसके बाद विधि-विधान के साथ तुलसी मां की पूजा करें। इसके लिए कच्चे दूध को तुलसी पर अर्पित करें। तुलसी को लाल रंग की चुनरी चढ़ाएं। इसके बाद घी के दीप जलाकर पास में रख दें। इसके अलावा तुलसी पूजा मंत्र का सच्चे मन से पाठ करें। इसे काफी पवित्र माना जाता है। आप तुलसी पूजा मंत्र को ऑनलाइन पा सकते हैं या फिर चालीसा मंत्र वाली किताब भी ले सकते हैं। आप चाहे तो हल्दी वाले जल को भी तुलसी पर अर्पित कर सकते हैं। साथ ही तुलसी के 108 नामों का जाप करना भी शुभ माना जाता है। तुलसी की 3 बार परिक्रमा करते हुए इन नामों का जाप करें।
तुलसी के 108 नाम
ॐ श्री तुलस्यै नमः, ॐ नन्दिन्यै नमः, ॐ देव्यै नमः, ॐ शिखिन्यै नमः, ॐ धारिण्यै नमः, ॐ धात्र्यै नमः, ॐ सावित्र्यै नमः, ॐ सत्यसन्धायै नमः, ॐ कालहारिण्यै नमः, ॐ गौर्यै नमः, ॐ देवगीतायै नमः, ॐ द्रवीयस्यै नमः, ॐ पद्मिन्यै नमः, ॐ सीतायै नमः, ॐ रुक्मिण्यै नमः, ॐ प्रियभूषणायै नमः, ॐ श्रेयस्यै नमः, ॐ श्रीमत्यै नमः, ॐ मान्यायै नमः, ॐ गौर्यै नमः, ॐ गौतमार्चितायै नमः, ॐ त्रेतायै नमः, ॐ त्रिपथगायै नमः, ॐ त्रिपादायै नमः, ॐ त्रैमूर्त्यै नमः, ॐ जगत्रयायै नमः, ॐ त्रासिन्यै नमः, ॐ गात्रायै नमः, ॐ गात्रियायै नमः, ॐ गर्भवारिण्यै नमः, ॐ शोभनायै नमः, ॐ समायै नमः, ॐ द्विरदायै नमः, ॐ आराद्यै नमः, ॐ यज्ञविद्यायै नमः, ॐ महाविद्यायै नमः, ॐ गुह्यविद्यायै नमः, ॐ कामाक्ष्यै नमः, ॐ कुलायै नमः, ॐ श्रीयै नमः, ॐ भूम्यै नमः, ॐ भवित्र्यै नमः, ॐ सावित्र्यै नमः, ॐ सरवेदविदाम्वरायै नमः, ॐ शंखिन्यै नमः, ॐ चक्रिण्यै नमः, ॐ चारिण्यै नमः, ॐ चपलेक्षणायै नमः, ॐ पीताम्बरायै नमः, ॐ प्रोत सोमायै नमः, ॐ सौरसायै नमः, ॐ अक्षिण्यै नमः, ॐ अम्बायै नमः, ॐ सरस्वत्यै नमः, ॐ सम्श्रयायै नमः, ॐ सर्व देवत्यै नमः, ॐ विश्वाश्रयायै नमः, ॐ सुगन्धिन्यै नमः, ॐ सुवासनायै नमः, ॐ वरदायै नमः, ॐ सुश्रोण्यै नमः, ॐ चन्द्रभागायै नमः, ॐ यमुनाप्रियायै नमः, ॐ कावेर्यै नमः, ॐ मणिकर्णिकायै नमः, ॐ अर्चिन्यै नमः, ॐ स्थायिन्यै नमः, ॐ दानप्रदायै नमः, ॐ धनवत्यै नमः, ॐ सोच्यमानसायै नमः, ॐ शुचिन्यै नमः, ॐ श्रेयस्यै नमः, ॐ प्रीतिचिन्तेक्षण्यै नमः, ॐ विभूत्यै नमः, ॐ आकृत्यै नमः, ॐ आविर्भूत्यै नमः, ॐ प्रभाविन्यै नमः, ॐ गन्धिन्यै नमः, ॐ स्वर्गिन्यै नमः, ॐ गदायै नमः, ॐ वेद्यायै नमः, ॐ प्रभायै नमः, ॐ सारस्यै नमः, ॐ सरसिवासायै नमः, ॐ सरस्वत्यै नमः, ॐ शरावत्यै नमः, ॐ रसिन्यै नमः, ॐ काळिन्यै नमः, ॐ श्रेयोवत्यै नमः, ॐ यामायै नमः, ॐ ब्रह्मप्रियायै नमः, ॐ श्यामसुन्दरायै नमः, ॐ रत्नरूपिण्यै नमः, ॐ शमनिधिन्यै नमः, ॐ शतानन्दायै नमः, ॐ शतद्युतये नमः, ॐ शितिकण्ठायै नमः, ॐ प्रयायै नमः, ॐ धात्र्यै नमः, ॐ श्री वृन्दावन्यै नमः, ॐ कृष्णायै नमः, ॐ भक्तवत्सलायै नमः, ॐ गोपिकाक्रीडायै नमः, ॐ हरायै नमः, ॐ अमृतरूपिण्यै नमः, ॐ भूम्यै नमः, ॐ श्री कृष्णकान्तायै नमः।




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