रत्न शास्त्र: ज्ञान और तेज बुद्धि के लिए पहनें ये रत्न, धारण करने से पहले जान लें नियम
आज हम आपको दो ऐसे रत्न के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्हें धारण करने से ज्ञान और बुद्धि तेज होती है। हम बात कर रहे हैं पुखराज और पन्ना रत्न की है। ऐसे में आइए जानते हैं कि पुखराजन कब और कैसे धारण करना चाहिए, साथ ही इससे जुड़े जरूरी नियम क्या हैं।

रत्न शास्त्र में जीवन की कई समस्याओं के समाधान के लिए अलग-अलग रत्नों का उल्लेख मिलता है। हालांकि, इन्हें धारण करने के कुछ विशेष नियम भी बताए गए हैं, जिनका पालन करना बेहद जरूरी होता है। यदि इन नियमों की अनदेखी की जाए, तो लाभ की बजाय नुकसान भी हो सकता है। आज हम आपको एक ऐसे रत्न के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्हें धारण करने से ज्ञान और बुद्धि तेज होती है। हम बात कर रहे हैं पुखराज और पन्ना रत्न की है। ऐसे में आइए जानते हैं कि पुखराजन कब और कैसे धारण करना चाहिए, साथ ही इससे जुड़े जरूरी नियम क्या हैं।
पुखराज का संबंध
आपने कई लोगों को अंगूठी के रूप में पुखराज पहने हुए देखा होगा, जो पीले रंग का एक प्रमुख रत्न है। रत्न ज्योतिष के अनुसार इसका संबंध बृहस्पति ग्रह से माना जाता है। ऐसे में अगर कोई व्यक्ति इस रत्न को धारण करता है, तो इससे उसकी कुंडली में बृहस्पति ग्रह की स्थिति मजबूत हो सकती है। इसके साथ ही जातक के लिए सुख-समृद्धि के योग बनने लगते हैं। वहीं अगर किसी जातक के विवाह में अड़चन आ रही हैं, तो उसे भी पुखराज धारण करने की सलाह दी जाती है, जिससे विवाह संबंधी समस्याएं भी दूर होने लगती हैं। इसे पहनने से शिक्षा, ज्ञान, धन, और सफलता में वृद्धि होती है। इसके साथ ही धन कमाने के लिए ये रत्न बहुत लकी माना जाता है।
इन्हें करना चाहिए धारण
जिस जातकों की कुंडली में गुरु ग्रह की स्थिति कमजोर होती है, उन्हें पुखराज धारण करने की सलाह दी जाती है। इसके साथ ही धनु और मीन राशि के जातकों के लिए भी पुखराज धारण करना शुभ माना गया है, क्योंकि इन राशियों के ग्रह स्वामी बृहस्पति हैं।
धारण करने के कुछ नियम
पुखराज रत्न नवरत्नों में शामिल एक महत्वपूर्ण रत्न है, इसलिए इसे आमतौर पर सोने की अंगूठी में जड़वाकर पहनने की सलाह दी जाती है। इसे धारण करने के लिए शुक्ल पक्ष के किसी भी बृहस्पतिवार को शुभ माना जाता है। इस दिन सूर्योदय से पहले विधि-विधान के साथ पूजा करनी चाहिए। अंगूठी को धारण करने से पहले उसे दूध, गंगाजल, शहद, घी और शक्कर के मिश्रण में कुछ समय के लिए रखें। इसके बाद 5 अगरबत्तियां जलाकर बृहस्पति देव का ध्यान करें। फिर “ॐ ब्रह्म बृहस्पतये नमः” मंत्र का 108 बार जप करते हुए अंगूठी को भगवान विष्णु के चरणों में अर्पित करें। अंत में इस अंगूठी को दाहिने हाथ की तर्जनी उंगली में धारण कर लें।
पन्ना रत्न पहनने से भी बुद्धि होती है तेज
पन्ना रत्न का संबंध बुध ग्रह से माना जाता है। ज्योतिष के अनुसार बुध ग्रह वाणी, बुद्धि और व्यापार का कारक होता है, इसलिए इन क्षेत्रों में सुधार और सफलता पाने के लिए पन्ना धारण करना शुभ और लाभकारी माना जाता है।
पहनने के नियम
बुध ग्रह से जुड़ा होने के कारण पन्ना रत्न को बुधवार के दिन धारण करना शुभ माना जाता है। इसे पहनने से पहले शुद्धि करना आवश्यक होता है। पन्ना को सोने या चांदी की अंगूठी में जड़वाकर पहना जा सकता है। धारण करने से पहले इसे गंगाजल और दूध से शुद्ध करें। इसके बाद पन्ना को हाथ की सबसे छोटी उंगली (कनिष्ठा) में पहनें। साथ ही, रेवती, आश्लेषा और ज्येष्ठा नक्षत्र में भी पन्ना धारण करना शुभ माना गया है।
डिस्क्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।




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