easter 2026 why is it celebrated after good friday significance history and traditions Easter 2026: गुड फ्राइडे के बाद रविवार को क्यों मनाते हैं ईस्टर? जानें इसका महत्व और परंपरा, एस्ट्रोलॉजी न्यूज़ - Hindustan
More

Easter 2026: गुड फ्राइडे के बाद रविवार को क्यों मनाते हैं ईस्टर? जानें इसका महत्व और परंपरा

2026 में ईस्टर 5 अप्रैल को रविवार को मनाया जाएगा। गुड फ्राइडे के बाद ईस्टर क्यों और कैसे मनाया जाता है? जानिए ईस्टर का धार्मिक महत्व, ईसा मसीह के पुनरुत्थान का इतिहास और परिवार के साथ मनाई जाने वाली परंपराएं।

Sat, 4 April 2026 04:47 PMNavaneet Rathaur लाइव हिन्दुस्तान
share
Easter 2026: गुड फ्राइडे के बाद रविवार को क्यों मनाते हैं ईस्टर? जानें इसका महत्व और परंपरा

ईस्टर ईसाई धर्म का सबसे महत्वपूर्ण और आनंदमय पर्व है। यह दिन ईसा मसीह के पुनरुत्थान की याद में मनाया जाता है। साल 2026 में ईस्टर 5 अप्रैल, रविवार को मनाया जाएगा। यह पर्व गुड फ्राइडे के तीन दिन बाद आता है और विश्वास, आशा तथा नई शुरुआत का प्रतीक है। ईस्टर हमें सिखाता है कि मृत्यु के बाद भी जीवन है और अंधकार के बाद प्रकाश अवश्य आता है।

ईस्टर कब है और क्यों मनाया जाता है?

ईस्टर 2026 में 5 अप्रैल को रविवार के दिन मनाया जाएगा। ईसाई मान्यता के अनुसार, ईसा मसीह को गुड फ्राइडे को सूली पर चढ़ाया गया था। तीन दिन बाद, तीसरे दिन वे मृत्यु से जीवित होकर उठे। इसी चमत्कार को ईस्टर के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व केवल एक धार्मिक त्योहार नहीं, बल्कि आशा और पुनर्जीवन का उत्सव है। ईस्टर का अर्थ है 'उठना' या 'पुनरुत्थान'। यह दिन साबित करता है कि चाहे परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों ना हों, ईश्वर की इच्छा से नई शुरुआत हमेशा संभव है।

ईस्टर का इतिहास

ईस्टर का इतिहास ईसा मसीह की क्रूस पर मृत्यु और उसके बाद के पुनरुत्थान से जुड़ा है। गुड फ्राइडे को ईसा मसीह को सूली पर चढ़ाया गया था। उनके शिष्यों और अनुयायियों को लगा था कि सब कुछ समाप्त हो गया है। लेकिन तीसरे दिन, रविवार को उनकी कब्र खाली पाई गई और वे जीवित अवस्था में अपने शिष्यों को दिखाई दिए। यह घटना ईसाई धर्म की नींव है। इसी कारण ईस्टर हमेशा रविवार को मनाया जाता है। ईस्टर की तिथि चंद्रमा के चक्र पर आधारित होती है, इसलिए हर साल यह अलग-अलग तारीख को आता है।

ईस्टर का धार्मिक महत्व

ईस्टर का सबसे बड़ा संदेश है - आशा कभी नहीं मरती। यह पर्व सिखाता है कि सच्चाई और अच्छाई की अंत में जीत होती है। ईसा मसीह का पुनरुत्थान मानव जाति के लिए उद्धार और नई जिंदगी का प्रतीक है।

इस दिन ईसाई समुदाय चर्च में विशेष प्रार्थना और पूजा करता है। लोग एक-दूसरे को 'He is Risen' कहकर बधाई देते हैं। ईस्टर विश्वास, प्रेम, क्षमा और नई शुरुआत का त्योहार है। यह हमें याद दिलाता है कि कठिन समय के बाद भी बेहतर कल अवश्य आता है।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:रत्नशास्त्र: व्यापार-कारोबार में सफलता दिलाता है पन्ना, जानें इसे पहनने के लाभ

ईस्टर से जुड़ी खास परंपराएं

ईस्टर कई रंगीन और अर्थपूर्ण परंपराओं से जुड़ा है:

ईस्टर एग्स (Easter Eggs): अंडे नए जीवन और पुनरुत्थान का प्रतीक हैं। लोग अंडों को रंगीन बनाकर एक-दूसरे को उपहार देते हैं।

चर्च प्रार्थना: सुबह की विशेष ईस्टर सर्विस में लोग सामूहिक प्रार्थना करते हैं।

फैमिली गेदरिंग: परिवार के सदस्य एक साथ इकट्ठा होकर भोजन करते हैं और खुशी मनाते हैं।

ईस्टर बनी (Easter Bunny): बच्चों के बीच लोकप्रिय परंपरा है, जिसमें छिपे हुए अंडे ढूंढने का खेल खेला जाता है।

ये परंपराएं ईस्टर को और अधिक आनंदमय और यादगार बनाती हैं।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:वैशाख माह में तुलसी से जरूर करें ये उपाय, भगवान श्रीहरि का मिलेगा आशीर्वाद

ईस्टर 2026 का संदेश

साल 2026 का ईस्टर 5 अप्रैल को मनाया जाएगा। यह दिन हमें याद दिलाता है कि जीवन में कितनी भी मुश्किलें आएं, विश्वास और धैर्य रखने से नई आशा जागृत होती है। ईस्टर का संदेश सार्वभौमिक है - अंधकार के बाद प्रकाश, मृत्यु के बाद जीवन और निराशा के बाद उम्मीद हमेशा जीवित रहती है।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:रत्न शास्त्र: पुखराज पहनने के बाद ना करें ये 4 गलतियां, इस दिन करें धारण

इस ईस्टर पर हम सब प्रेम, क्षमा और नई शुरुआत का संकल्प लें।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

जानें लेटेस्ट Dharm News, Aaj ka Rashifal और सटीक Panchang की जानकारी। अपनी डेली पूजा के लिए यहाँ पढ़ें Shiv Chalisa, Hanuman Chalisa और Bajrang Baanहिंदू कैलेंडर 2026 की शुभ तिथियों के साथ अपने हर दिन को खास बनाएं!