Premanand Maharaj Pravachan: किसी के पैर छूने से घट जाता है हमारा पुण्य? प्रेमानंद महाराज ने तर्क देते हुए की ये बात
Premanand Maharaj Latest Pravachan: प्रेमानंद महाराज ने हाल ही में अपने प्रवचन में जवाब दिया है कि आखिर किसी से पैर छुआना सही है या गलत? साथ ही उन्होंने बताया है कि अगर कोई ऐसा करता है तो क्या करना चाहिए?

Premanand Maharaj Latest Pravachan: सनातन धर्म में बड़ों का पैर छूना सम्मान और संस्कार से जोड़कर देखा जाता है। दरअसल जब कोई अपनी उम्र से बड़े व्यक्ति के पैर छूता है तो माना जाता है कि सामने वाला अनुभव में बड़ा है और उसने जिंदगी के कई पहर देखे हैं। साथ ही उनके पास ऐसे अनुभव और ज्ञान हैं जिससे उनका सम्मान करना जरूरी है। ऐसे में सामने वाले के पैर छूकर उनके प्रति सम्मान को जताया जाता है और साथ ही उनका आशीर्वाद लिया जाता है। कई लोग अपने यहां इन चीजों को करने से कतराते हैं। या फिर कुछ लोग ये कहकर पैर नहीं छूने देते हैं कि क्यों हमें पाप का भागीदारी बना रहे हो बेटा? वहीं कई लोग अपनों से छोटों द्वारा पैर छूने को संस्कार के तौर पर देखते हैं। इस पर लोगों के मत अलग-अलग हैं। अब वृंदावन के जाने-माने संत प्रेमानंद महाराज ने इस पर अपनी राय व्यक्त की है।
पैर छुआना सही या गलत?
हाल ही में प्रेमानंद महाराज के एक प्रवचन के दौरान एक शख्स ने पूछा कि क्या किसी के पैर छूने से हमारा पुण्य खत्म हो जाता है? इस पर उन्होंने कहा कि अगर आप ऐसा करवाते हैं तो...हमारी पैर छुआने की इच्छा नहीं है। हम छू लेते हैं कोई फर्क नहीं पड़ेगा। अगर हमें खुशी मिलती है और पैर छुआना चाहते हैं तो भजन नष्ट होगा। अगर हमारी इच्छा नहीं है और जो पैर छूने आ रहा है, उसे हमने पहले ही प्रणाम कर दिया और हमारी इच्छा भी नहीं है तो पैर छू भी ले तो पुण्य नष्ट नहीं होगा। पैर छूना और प्रणाम करना एक ही बात है।
प्रेमानंद महाराज ने दिया ये तर्क
प्रेमानंद महाराज ने आगे कहा कि लाखों लोग प्रणाम करते हैं। तो उन लाखों लोगों में हम अपने भगवान को देखकर प्रणाम करते हैं। मेरे भगवान हैं और इनके स्वरूप की वजह से मेरा कोई पुण्य नष्ट नहीं होगा। अगर ये सोच आई कि मैं सबसे श्रेष्ठ हूं तो भजन क्षीण हो जाएगा। सब सोच है। अगर सोच बदल गई तो पुण्य नष्ट होगा। अगर सोच सही रही तो पुण्य नष्ट नहीं होगा। सभी लोगों में भगवान हैं और ये उसकी श्रद्धा है जो आपके पैर छू रहा है लेकिन आप इस योग्य नहीं है और ये आपको ये अंदर से होना चाहिए। मेरे प्रभु सभी लोगों में है। वो छुका और सबसे पहले हमने ही प्रणाम कर लिया। कोशिश करना चाहिए कि कोई हमारे पैर ना छुए। जब कोई जबरदस्ती करें तो भगवत भावना करते हुए उसे प्रणाम कर लेना चाहिए।




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