Diwali Kab Hai : दिवाली कब है? नोट कर लें धनतेरस से लेकर भाई दूज की सही डेट और शुभ मुहूर्त
Diwali Kab Hai : हिंदू धर्म के सबसे बड़े और प्रमुख त्योहारों में दिवाली का नाम सबसे ऊपर आता है। पूरे साल लोग इस पर्व का बेसब्री से इंतजार करते हैं। दिवाली केवल रोशनी और पटाखों का पर्व नहीं है, बल्कि यह अंधकार पर प्रकाश, असत्य पर सत्य और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।

Diwali Kab Hai : हिंदू धर्म के सबसे बड़े और प्रमुख त्योहारों में दिवाली का नाम सबसे ऊपर आता है। पूरे साल लोग इस पर्व का बेसब्री से इंतजार करते हैं। दिवाली केवल रोशनी और पटाखों का पर्व नहीं है, बल्कि यह अंधकार पर प्रकाश, असत्य पर सत्य और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। इस पर्व पर लोग अपने घरों की सफाई, रंग-रोगन, सजावट और नई चीजें खरीदते हैं। दीपावली केवल एक दिन की पूजा नहीं होती, बल्कि यह पांच दिनों तक चलने वाला महापर्व है। हर दिन का अपना एक विशेष महत्व और पूजन-विधान होता है। धनतेरस से इसका आरंभ होता है और भाई दूज पर इसका समापन माना जाता है। धनतेरस से भाई दूज तक चलने वाले इन पांच दिनों में हर दिन का अपना धार्मिक महत्व है। दिवाली का मुख्य आकर्षण माता महालक्ष्मी का पूजन होता है, जो कार्तिक अमावस्या की रात में होता है। महालक्ष्मी पूजा के दिन लोग घर-आंगन में दीप जलाकर अंधकार को दूर करते हैं और धन-समृद्धि की देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश की विधिवत पूजा करते हैं। आइए जानते हैं, इस साल कब है धनतेरस, छोटी दिवाली, महालक्ष्मी पूजा, गोवर्धन पूजा और भाई दूज…
धनतेरस 2025 (धनत्रयोदशी): कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को धनतेरस के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व स्वास्थ्य, समृद्धि और शुभता का प्रतीक है। 2025 में धनतेरस शनिवार 18 अक्टूबर को है। इस दिन विशेष रूप से भगवान धन्वंतरि, कुबेर और मां लक्ष्मी की पूजा होती है। इस दिन बर्तन, चांदी-स्वर्ण के आभूषण और अन्य धातु की वस्तुएं खरीदना शुभ माना जाता है।
त्रयोदशी तिथि आरंभ: 18 अक्टूबर दोपहर 12:18 बजे
त्रयोदशी तिथि समाप्त: 19 अक्टूबर दोपहर 1:51 बजे
धनतेरस पूजा मुहूर्त: शाम 7:16 से 8:20 बजे तक (अवधि 1 घंटा 4 मिनट)
प्रदोष काल: 5:48 पी एम – 8:20 पी एम
वृषभ काल: 7:16 पी एम – 9:11 पी एम
छोटी दिवाली 2025 (नरक चतुर्दशी) : धनतेरस के अगले दिन छोटी दिवाली या नरक चतुर्दशी मनाई जाती है। इसे नरकासुर वध के प्रतीक के रूप में भी देखा जाता है। इस दिन घर की सफाई, सजावट और भगवान हनुमान की पूजा करने का विशेष महत्व होता है। 2025 में छोटी दिवाली रविवार 19 अक्टूबर को पड़ेगी।
चतुर्दशी तिथि आरंभ: 19 अक्टूबर दोपहर 1:51 बजे
चतुर्दशी तिथि समाप्त: 20 अक्टूबर दोपहर 3:44 बजे
महालक्ष्मी पूजा 2025 (दिवाली): दिवाली का मुख्य दिन कार्तिक अमावस्या को आता है। इस दिन माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा-आराधना कर समृद्धि की कामना की जाती है। घरों और मंदिरों में दीपमालाएं सजती हैं और हर तरफ रोशनी होती है। 2025 में महालक्ष्मी पूजन सोमवार 20 अक्टूबर को होगा।
अमावस्या तिथि आरंभ: 20 अक्टूबर दोपहर 3:44 बजे
अमावस्या तिथि समाप्त: 21 अक्टूबर शाम 5:54 बजे
लक्ष्मी पूजा मुहूर्त: शाम 7:08 से 8:18 बजे तक (अवधि 1 घंटा 11 मिनट)
प्रदोष काल: 5:46 पी एम – 8:18 पी एम
वृषभ काल: 7:08 पी एम – 9:03 पी एम
गोवर्धन पूजा 2025 (अन्नकूट) : दिवाली के अगले दिन गोवर्धन पूजा या अन्नकूट मनाया जाता है। पौराणिक मान्यता है कि इसी दिन भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत उठाकर गांववासियों की रक्षा की थी। इस दिन अन्नकूट बनाकर गोवर्धन की पूजा की जाती है। 2025 में गोवर्धन पूजा बुधवार 22 अक्टूबर को होगी।
प्रतिपदा तिथि आरंभ: 21 अक्टूबर शाम 5:54 बजे
प्रतिपदा तिथि समाप्त: 22 अक्टूबर शाम 8:16 बजे
गोवर्धन पूजा प्रातःकाल मुहूर्त: 6:26 ए एम – 8:42 ए एम (2 घंटे 16 मिनट)
सायाह्नकाल मुहूर्त: 3:29 पी एम – 5:44 पी एम (2 घंटे 16 मिनट)
भाई दूज 2025 : दीपावली महापर्व का अंतिम दिन भाई दूज के रूप में मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों को तिलक कर उनकी लंबी उम्र की कामना करती हैं और भाई बहनों को उपहार देते हैं। 2025 में भाई दूज गुरुवार 23 अक्टूबर को है।
द्वितीया तिथि आरंभ: 22 अक्टूबर रात 8:16 बजे
द्वितीया तिथि समाप्त: 23 अक्टूबर रात 10:46 बजे
भाई दूज तिलक (अपराह्न) समय: 1:13 पी एम – 3:28 पी एम (2 घंटे 15 मिनट)




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