Chandra Grahan: साल का आखिरी चंद्र ग्रहण कब लगेगा, जानें डेट व भारत पर प्रभाव
Chandra Grahan in India Lunar Eclipse 2026 Date and Time : इस साल का अंतिम चंद्र ग्रहण पूर्णिमा के दिन लगने जा रहा है। ये चंद्र ग्रहण पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा, जिसे “ब्लड मून” के नाम से भी जाना जाता है।

Chandra Grahan in India Lunar Eclipse 2026, चंद्र ग्रहण : ज्योतिष की दृष्टि से चंद्र ग्रहण एक महत्वपूर्ण घटना मानी गई है। धार्मिक मान्यताओं में ग्रहण को अशुभ घटना की तरह देखा जाता है। जल्द ही इस साल का आखिरी चंद्र ग्रहण लगने वाला है। इस साल का अंतिम चंद्र ग्रहण पूर्णिमा के दिन लगने जा रहा है। ये चंद्र ग्रहण पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा, जिसे “ब्लड मून” के नाम से भी जाना जाता है। चंद्र ग्रहण लगने से कुछ घंटों पहले से ही सूतक काल शुरू हो जाएगा। ग्रहण के दौरान चंद्रमा गहरे लाल रंग का दिखाई देगा। आइए जानते हैं इस साल का आखिरी चंद्र ग्रहण कब लगेगा, सूतक काल मान्य होगा या नहीं और किन देशों पर प्रभाव देखा जाएगा-
इस साल का आखिरी चंद्र ग्रहण किस दिन लगेगा?
हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल का अंतिम चंद्र ग्रहण श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन लग रहा है। इस साल का अंतिम चंद्र ग्रहण 28 अगस्त के दिन लग रहा है।
क्या साल के सखिरी चंद्र ग्रहण का सूतक मान्य होगा?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चंद्र ग्रहण का सूतक काल ग्रहण शुरू होने के 9 घंटे पहले से ही शुरू हो जाता है।
क्या भारत में दिखाई देगा साल का आखिरी चंद्र ग्रहण?
इस साल का अंतिम चंद्र ग्रहण सुबह के समय से शुरू हो रहा है। इसलिए ये ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा।
क्या भारत में साल के अंतिम चंद्र ग्रहण का सूतक काल मान्य होगा?
नहीं, साल के आखिरी चंद्र ग्रहण का सूतक काल भारत में मान्य नहीं होगा। ऐसा इसलिए क्योंकि ये ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा। इसलिए ग्रहण का सूतक काल भी भारत में मान्य नहीं होगा।
साल के अंतिम चंद्र ग्रहण के दौरान क्या करना चाहिए?
साल के आखिरी चंद्र ग्रहण काल में भगवान के नाम का स्मरण करते रहें। ग्रहण के पूर्व सूतक काल से पहले ही गर्भवती महिलाओं एवं अन्य जीव-जंतु और वस्तुओं पर गेरू डाल दें। पानी, भोजन आदि में तुलसी की पत्तियां डाल दें। ग्रहण के बाद स्नान आदि निवृत होकर संभव हो तो दान कर सकते हैं।ग्रहण लगने से पहले कई मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। ग्रहण समाप्त होने के बाद मंदिरों में विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना और शुद्धिकरण की प्रक्रिया संपन्न की जाती है। ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान-दान और पूजा-पाठ करने से पुण्य की प्राप्ति होती है।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।




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